कोटा / जवाहर कला केंद्र जयपुर के कृष्णायन सभागार में “सम्मुख” के अन्तर्गत मंचासीन अतिथि अभीषेक तिवारी, नंद भारद्वाज और ईश्वर चंद्र माथुर के सान्निध्य में लेखक साहित्यकार नंद भारद्वाज, देवांशु पद्मनाभ एवं विजय जोशी की पुस्तकों पर चर्चा और कविता पाठ हुआ।
मंचासीन अतिथियों ने अपने उद्बोधन में चर्चित पुस्तकों पर कहा कि अपनी संस्कृति और सामाजिक संरचना को समझने के लिए ऐसी पुस्तकों को पढ़ना आवश्यक है जो अपने समय को जानने और परखने का अवसर देती हैं।
इस अवसर पर कथाकार एवं समीक्षक विजय जोशी ने अपने संपादन में प्रकाशित ’’सांस्कृतिक एवं पुरातात्विक वैभव“ के बारे में बताया कि इसमें पुरातत्वविद् रमेश वारिद के समय-समय पर अपनी समृद्ध संस्कृति, ऐतिहासिक गरिमा और वैभवशाली पुरासम्पदा पर लिखित एवं विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित चयनित आलेखों का संचयन है। इन आलेखों में शैव दर्शन, शिव पूजन परम्परा और पुरातात्विक सांस्कृतिक एवं कलात्मक चिंतन गहराई से विवेचित हुआ है।
लेखक साहित्यकार नंद भारद्वाज एवं देवांशु पद्मनाभ ने चर्चा में अपनी पुस्तकों का परिचय देकर उनके विशेष सन्दर्भों को उल्लेखित किया। कवयित्री अभिलाषा पारीक, कामना राजावत और शारदा कृष्ण सहित युवा कवि किशन प्रणय ने कविताओं की प्रस्तुति से श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया।
कार्यक्रम के संयोजक प्रमोद शर्मा ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए बताया कि साहित्य एवं कला को प्रोत्साहित करने के लिए हर माह यह कार्यक्रम आयोजित किया जाता है। संचालन अभिलाषा पारीक ने किया।
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