1947 में भारत के विभाजन के समय, पाकिस्तान (जिसमें वर्तमान बांग्लादेश शामिल था) में हिंदुओं की संख्या लगभग 20% थी। विभाजन के बाद, पश्चिमी पाकिस्तान (वर्तमान पाकिस्तान) में हिंदू आबादी लगभग 15% थी। 1947 में पाकिस्तान में हिंदुओं की आबादी लगभग 15-20% थी, जो अब घटकर 2.17% रह गई है। इस गिरावट के पीछे विभाजन के बाद का पलायन, धार्मिक उत्पीड़न, और सामाजिक भेदभाव जैसे कई कारण हैं। हालांकि, सिंध प्रांत में हिंदू समुदाय अभी भी सांस्कृतिक और धार्मिक गतिविधियों में सक्रिय है, और हिंगलाज माता जैसे तीर्थस्थल आज भी उनकी आस्था का केंद्र बने हुए हैं।
जबकि भारत में 1947 में भारत की कुल जनसंख्या लगभग 34 करोड़ (340 मिलियन) थी। उस समय मुस्लिम आबादी लगभग 3.5 करोड़ (35 मिलियन) थी, जो कुल जनसंख्या का लगभग 10.4% थी। 2023 में, भारत सरकार ने लोकसभा में बताया कि देश में मुस्लिम आबादी लगभग 19.75 करोड़ (197.5 मिलियन) है, जो कुल जनसंख्या का लगभग 14.2% है।2025 तक, यह संख्या लगभग 20 करोड़ (200 मिलियन) होने का अनुमान है, जो कुल जनसंख्या का लगभग 14.3% होगा।
विभाजन के दौरान, बड़ी संख्या में हिंदुओं ने भारत की ओर पलायन किया, जबकि कुछ ने पाकिस्तान में ही रहने का निर्णय लिया। हालांकि, विभाजन के बाद के वर्षों में, पाकिस्तान में हिंदू समुदाय को विभिन्न प्रकार की चुनौतियों का सामना करना पड़ा, जिसमें धार्मिक उत्पीड़न, जबरन धर्म परिवर्तन, और सामाजिक भेदभाव शामिल हैं।
पाकिस्तान की 2023 की जनगणना के अनुसार, हिंदू आबादी लगभग 52 लाख (5,217,216) है, जो कुल जनसंख्या का 2.17% है। हिंदू समुदाय मुख्य रूप से सिंध प्रांत में केंद्रित है, जहाँ वे कुल जनसंख्या का 8.81% बनाते हैं। उमरकोट जिला पाकिस्तान का एकमात्र हिंदू बहुल क्षेत्र है, जबकि थारपारकर जिले में हिंदुओं की संख्या सबसे अधिक है।
पाकिस्तान में विभाजन से पहले लगभग 428 हिंदू मंदिर थे, लेकिन वर्तमान में केवल 22 मंदिर ही अस्तित्व में हैं। इनमें से अधिकांश मंदिर सिंध, पंजाब, बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा प्रांतों में स्थित हैं। सिंध में सबसे अधिक 11 मंदिर हैं, जबकि पंजाब में 4, बलूचिस्तान में 3 और खैबर पख्तूनख्वा में 2 मंदिर हैं।
पाकिस्तान में प्रमुख हिंदू मंदिर और तीर्थ स्थल
हिंगलाज माता मंदिर (बलूचिस्तान): यह पाकिस्तान का सबसे बड़ा हिंदू तीर्थ स्थल है, जहाँ हर साल हिंगलाज यात्रा के दौरान 2.5 लाख से अधिक श्रद्धालु एकत्र होते हैं।
काटासराज मंदिर (पंजाब): यह प्राचीन शिव मंदिर है, जो पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान शिव के आँसू से बना है।
उमरकोट शिव मंदिर (सिंध): यहाँ शिवरात्रि के अवसर पर तीन दिवसीय उत्सव मनाया जाता है, जिसमें हजारों श्रद्धालु भाग लेते हैं।
चुरियो जाबल दुर्गा माता मंदिर (सिंध): यह मंदिर शिवरात्रि के दौरान विशेष रूप से प्रसिद्ध है, जहाँ 2 लाख से अधिक श्रद्धालु एकत्र होते हैं।
स्वामीनारायण मंदिर (कराची): यह कराची का एक प्रमुख मंदिर है, जहाँ से हिंगलाज यात्रा की शुरुआत होती है।
इन मंदिरों की वर्तमान स्थिति चिंताजनक है। कई मंदिरों को होटल, स्कूल या मदरसे में बदल दिया गया है, जबकि कुछ मंदिरों को अवैध रूप से कब्जा कर लिया गया है। हालांकि, पाकिस्तान सरकार ने 2019 में 400 हिंदू मंदिरों की पुनर्स्थापना और हिंदू समुदाय को सौंपने की योजना की घोषणा की थी, लेकिन इस पर कार्यान्वयन की गति धीमी रही है। India Today
पाकिस्तान में हिंदू मंदिरों की संख्या में भारी गिरावट आई है, और जो मंदिर बचे हैं, वे भी उपेक्षा और अवैध कब्जे का शिकार हैं। हालांकि, कुछ प्रमुख तीर्थ स्थल जैसे हिंगलाज माता मंदिर और उमरकोट शिव मंदिर अभी भी सक्रिय हैं और हिंदू समुदाय की आस्था का केंद्र बने हुए हैं।

