Homeमीडिया की दुनिया सेफोटो पत्रकार की बोलती तस्वीरों ने बुज़ुर्ग को न्याय दिलाया

फोटो पत्रकार की बोलती तस्वीरों ने बुज़ुर्ग को न्याय दिलाया

कहते हैं तस्वीरें बोलती हैं और काफी हद तक सच ही बोलती हैं, लेकिन किसी को इंसाफ दिला दें ऐसा कम ही देखने को मिलता है। dainikbhaskar.com के लखनऊ के एक फोटो जर्नलिस्ट की ऐसी तस्वीरें इन दिनों सोशल मीडिया पर छाई हुईं, जिसने एक बुजुर्ग को इंसाफ दिलाया।

यूपी पुलिस आम लोगों के साथ कैसा बर्ताव करती है, इसकी एक तस्वीर शनिवार को राजधानी लखनऊ में नजर आई। यहां हजरतगंज के जीपीओ के पास फुटपाथ पर टाइपिंग का काम करने वाले एक बुजुर्ग से एक पुलिस इंस्पेक्टर ने मारपीट की। महज 50-100 रुपए रोजाना कमाने वाले 65 साल के बुजुर्ग इंस्पेक्टर के सामने हाथ जोड़ते रहे, लेकिन इंस्पेक्टर ने उनका टाइपराइटर तक तोड़ दिया। हालांकि, बाद में बुजुर्ग ने इंस्पेक्टर को यह कहते हुए माफ कर दिया कि मैं भी बाप हूं। पुलिस बर्बरता की ये तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं, जिसके बाद खुद मुख्यमंत्री कार्यालय को मामले का संज्ञान लेना पड़ा।

फोटो जर्नलिस्ट आशुतोष त्रिपाठी की खींची इन तस्वींरों में प्रदीप कुमार नाम का एक पुलिस अफसर बुजुर्ग कृष्ण कुमार के टाइपराइटर को लात मारकर तोड़ता हुआ दिखाई दे रहा है। घटना के समय आशुतोष मौके पर ही मौजूद थे। उन्होंने वक्त की नजाकत को भांपते हुए अपना कैमरा निकाला और पूरे घटनाक्रम को सिलसिलेवार ढंग से अपने कैमरे में कैद कर लिया। एक तस्वीर में पुलिसवाला फोटोग्राफर को धमकाता हुआ भी साफ दिखाई दे रहा है। लेकिन आशुतोष ने धमकियों की परवाह किए बगैर निडर होकर अपना काम पूरा किया।

इस दौरान इस घटना को कैमरे में कैद कर रहे फोटो जर्नलिस्ट को पुलिसवाले ने धमकाया भी। उन्होंने पहले फोटोज डिलीट करने को कहा और इसके बाद कहा, ‘मेरा नाम बड़े-बड़े अक्षरों में लिखना, ताकि एसएसपी भी मेरे बारे में जान सकें।’

पुलिस बर्बरता की ये तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने के बाद मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के कार्यालय को तुरंत हरकत में आना पड़ा और दोषी पुलिस अफसर को निलंबित कर दिया गया। पीड़ित कृष्ण कुमार को आला अधिकारियों ने उनके घर पर जाकर बाइज्जदत नया टाइपराइटर दिया और उनके साथ हुए दुर्व्यनवहार के लिए माफी भी मांगी। इतना ही नहीं यूपी के सीएम ने पीड़ित को एक लाख रुपए की सहायता भी प्रदान की है और उन्हें पूरी सुरक्षा में उनके कार्यस्थल तक सुरक्षित ले जाने और वापस घर ले आने की जिम्मेदारी भी पुलिस को सौंपी है।

पूरे साहस और संवेदनशीलता के साथ पत्रकारिता का बेहतरीन उदाहरण पेश करने वाले आशुतोष कई अखबारों में काम कर चुके हैं। इस खबर के वायरल होने के साथ ही सोशल मीडिया पर उन्हें भी खूब वाहवाही मिल रही है।
साभार- http://www.samachar4media.com/ से

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