Homeपत्रिकाकला-संस्कृतिफिल्म समीक्षा की बारीकियों पर श्री विनोद नागर से एक सार्थक चर्चा

फिल्म समीक्षा की बारीकियों पर श्री विनोद नागर से एक सार्थक चर्चा

पिछले पाँच दशकों से फ़िल्म लेखक समीक्षक के रूप में सक्रिय विनोद नागर (भोपाल) की सिनेमा पर केन्द्रित 9 पुस्तकें प्रकाशित हैं। “सुबह सवेरे का सिने विमर्श” और “सिने विमर्श सुबह सवेरे का” ये जुड़वाँ पुस्तकें भारत में हिन्दी फ़िल्म समीक्षाओं के पहले प्रकाशित संग्रह के रूप में चर्चित हुईं। विनोद नागर की ताज़ा कृति ‘प्रजातंत्र में बातें फ़िल्मों की’ कोरोना काल में सहमे बॉलीवुड की कसक को बयाँ करती है। रविवार 1 जून 2025 को इसी किताब पर चित्रनगरी संवाद मंच मुंबई ने मृणालताई हाल, केशव गोरे स्मारक ट्रस्ट, गोरेगांव में एक चर्चा का आयोजन किया।
चर्चा की शुरुआत करते हुए शायर देवमणि पांडेय ने कहा कि सरल सहज भाषा और आत्मीय शैली में लिखी गई यह पुस्तक बेहद पठनीय है। यह सिने जगत का एक ऐसा दस्तावेज़ है जिसमें समय, समाज, संस्कृति और इतिहास का ज़िक्र करते हुए महत्वपूर्ण मुद्दों को रेखांकित किया गया है। फ़िल्म समीक्षा लिखते समय विनोद नागर मौजूदा समय के ज्वलंत सवाल उठाते हैं और श्रोताओं को उस पर सोचने के लिए बाध्य करते हैं। यही उनकी रचनात्मक उपलब्धि है।
प्रख्यात मनोरंजन पत्रकार और मीडिया प्रोफेशनल पराग छापेकर ने कहा कि सरल भाषा में महत्वपूर्ण बातें करना आसान काम नहीं होता। मगर विनोद नागर में यह हुनर है। उनकी बातें दिल से निकलती हैं और दिल तक पहुंचती है। उनके लेखन में हमेशा एक सामाजिक चिंता मौजूद रहती है। यही चिंता उन्हें एक महत्वपूर्ण लेखक बनाती है।
विनोद नागर ने श्रोताओं के साथ अपने कई रोचक अनुभव साझा किये। उन्होंने बहुत विनम्रता से श्रोताओं के सवालों के जवाब दिए। श्रोताओं के साथ संवाद करते हुए उन्होंने कहा कि सिनेमा, दृश्य और संवाद का माध्यम है। सिनेमा पहले काग़ज़ पर जन्म लेता है बाद में पर्दे पर सरकार होता है। पुरानी फ़िल्मों में कहानी को इस तरह पेश किया जाता था कि दर्शक अपनी भावनाओं पर नियंत्रण नहीं कर पाता था और रोता था। ऋषिकेश मुखर्जी की फ़िल्म ‘सत्यकाम’ का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सिनेमा समय सापेक्ष चलता है और हमेशा दर्शकों की भावनाओं का प्रतिनिधित्व करता है। संयोजक पल्लवी मेहता के वक्तव्य से चर्चा का समापन हुआ। कार्यक्रम का संचालन डॉ मधुबाला शुक्ल ने किया।
सब टीवी से जुड़े अतिथि कवि अभिनव नागर ने ‘पापा’ और ‘हिंदी’ पर बढ़िया कविताएं सुनाईं। उनकी असरदार प्रस्तुति को श्रोताओं का बहुत अच्छा प्रतिसाद मिला। कवयित्री सम्मेलन में कवयित्रियों ने कमाल किया। उन्होंने सामयिक विषयों पर ऐसी ऐसी सतरंगी कविताएं पेश कीं कि सभागार लगातार तालियों से गूंजता रहा। इस सूची में शामिल थीं – डॉ अलका अग्रवाल सिगतिया, हर्षा खन्ना, निधि सिंह, डॉ ऋतु नागर, अनिता विजयवर्गीय, अंकिता खत्री ‘नादान’, अनामिका शर्मा और पल्लवी मेहता।
श्रोताओं में प्रो राम बक्ष (जेएनयू), गायिका अरुणा गुप्ता (न्यूयार्क), बहुभाषी शायर नवीन सी चतुर्वेदी, कवि अनिल गौड़, शायर क़मर हाजीपुरी, कवि कथाकार प्रदीप गुप्ता, पत्रकार चंद्रकांत जोशी, पत्रकार इरफ़ान सामी, कवि राजू मिश्र कविरा, कवि अभिनेता अनुज वर्मा, कवयित्री कुसुम तिवारी, कवयित्री अम्बिका झा आदि कई सम्मानित रचनाकार मौजूद थे।
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