आगरा में मुस्लिम दोस्त ने ब्रेनवॉश किया, कोलकाता में इब्राहिम ने कलमा पढ़वाया
6 राज्यों में रेड डालकर 10 लोगों को पकड़ा। मास्टर माइंड अभी पुलिस की पहुंच से दूर है।🥺😷
आगरा से गायब हुईं दो सगी बहनें 4 महीने बाद 1300 Km दूर कोलकाता से बरामद हुईं। साथ ही, यूपी को हिला देने वाले धर्मांतरण की नई कहानी के पन्ने भी खुल गए।
इसके तार दुनिया के 5 देशों से जुड़े। जोकि भारत में इस्लाम को बढ़ावा देने के लिए फंडिंग कर रहे। आगरा पुलिस ने भारत के 6 राज्यों में रेड डालकर 10 लोगों को पकड़ा। मास्टर माइंड अभी पुलिस की पहुंच से दूर है।
दोनों बहनों का ब्रेनवॉश कैसे हुआ? वो कैसे कोलकाता तक पहुंचाई गईं? आगरा समेत दूसरे राज्यों में फैले इस नेटवर्क को समझने के लिए दैनिक भास्कर टीम ने जांच से जुड़े अधिकारियों से बात की। जो कुछ सामने आया, वो चौंकाने वाला था। पढ़िए रिपोर्ट…
कॉलेज की दोस्त साइमा कहती- हिजाब पहनने से सिक्योर रहोगी
दोस्ती, ब्रेनवॉश और धर्मांतरण की इस कहानी की शुरुआत आज से 4 साल पहले यानी 2021 में हुई। आगरा के सदर इलाके में एक सामान्य परिवार रहता है। इस परिवार में दो बहनें हैं। बड़ी बहन मुस्कान (बदला हुआ नाम) 33 साल की है। उसने आगरा के डीईआई कॉलेज से एमफिल किया है।
उसके साथ खुशबू उर्फ साइमा नाम की एक लड़की पढ़ती थी, जो ऊधमपुर (कश्मीर) की रहने वाली है। साइमा से उसकी अच्छी दोस्ती हो गई। अक्सर कॉलेज और कोचिंग में आते-जाते साइमा, मुस्कान को इस्लाम धर्म की अच्छाइयों के बारे में बताती रहती थी।
वह कई बार मोबाइल पर वीडियो दिखाती और कहती कि हिजाब पहनने से सुरक्षा रहती है, तुम्हारे धर्म में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है। धीरे-धीरे मुस्कान को भी लगने लगा कि इस्लाम धर्म बेहतर है। मुस्कान के घर के पास ही एक मस्जिद थी। जब मस्जिद में अजान होती थी, तो वह अपने घर पर ही नमाज पढ़ती।
शुरुआत में वह यह सब अपने परिवार से छिपाकर करती रही। मगर एक दिन, जब उसकी मां घर के मंदिर में पूजा कर रही थी, तब मुस्कान ने उन्हें रोक दिया। कहा- इनकी पूजा करके कुछ नहीं होगा, आप नमाज पढ़ा करो। इसके बाद वह घर में होने वाली पूजा-पाठ का खुलकर विरोध करने लगी।
उधर, साइमा लगातार मुस्कान का ब्रेनवॉश कर रही थी। उसने पढ़ने के लिए उसे इस्लामिक किताबें भी दीं। जिनका हिंदी अनुवाद मुस्कान अपने घर लेकर आई और पूरे परिवार से कहा- आप इनको पढ़ो, अल्लाह ही बरकत देगा।
बेटी की इन हरकतों को देखकर घरवाले परेशान रहने लगे। 2021 में वह अचानक घर से गायब हो गई। वह साइमा के कहने पर घर छोड़कर जम्मू-कश्मीर के ऊधमपुर जा रही थी। मगर रास्ते में लैंडस्लाइड हो गया, जिसमें वह फंस गई। जब किसी ने उसकी मदद नहीं की, तो मुस्कान ने परिवार को फोन किया।
तब मुस्कान के पिता ऊधमपुर पहुंचे और उसे अपने साथ लेकर आए। उस वक्त मुस्कान ने परिवार को यह नहीं बताया कि वह घर छोड़कर क्यों गई थी। परिवार भी बेटी के मिल जाने से खुश था, इसलिए मुस्कान एक बार फिर अपनी रूटीन लाइफ में वापस आ गई।
बेटी इस्लाम को मानने लगी तो मोबाइल छीना
साइमा के संपर्क में होने की वजह से मुस्कान अब हिंदू धर्म से काफी दूर जा चुकी थी। ऐसे में परिवार ने बेटी से फोन छीन लिया। उसका घर से बाहर निकलना बंद करा दिया। तब मुस्कान अपनी छोटी बहन खुशबू (बदला हुआ नाम) के फोन का इस्तेमाल करने लगी। छोटी बहन उस वक्त 16 साल की थी।
अब खुशबू भी बड़ी बहन को मोबाइल पर इस्लाम से जुडे़ वीडियो सुनने और देखने लगी। मुस्कान ने अपनी छोटी बहन का भी ब्रेनवॉश करना शुरू कर दिया। दोनों मिलकर इस्लाम की बातें करती। घरवालों से बातें छिपाने लगीं। छोटी बहन के फोन के जरिए बड़ी बहन ने साइमा को परिवार की बंदिशों के बारे में बताया।
अब साइमा समझ गई कि मुस्कान उसके कनेक्शन से बाहर जा रही है। साइमा ने मुस्कान को रीत बनिक उर्फ मोहम्मद इब्राहिम का नंबर दिया। कहा- यही व्यक्ति तुमको आगरा से निकाल सकता है। रीत बनिक सोशल मीडिया पर धर्म परिवर्तन से जुडे़ पोस्ट करता था।
वो ऐसे लोगों की तलाश में रहता था, जोकि धर्म परिवर्तन की इच्छा रखते हैं। इसके बाद दोनों बहनें रीत बनिक से इंस्टाग्राम के जरिए बातें करने लगीं। उसने दोनों बहनों से कहा- घर का दबाव तभी तक है, जब तक तुम सनातन धर्म में हो, इस्लाम कबूल करो, फिर नई जिंदगी शुरू होगी।
पहले कलमा पढ़वाया, फिर धर्म परिवर्तन कराया
रीत बनिक ने दोनों बहनों के घर से भागने, उनके रुकने और धर्म परिवर्तन की योजना तैयार करवाई। मगर खुशबू 18 साल की नहीं हुई थी। इसलिए उन्होंने 2 साल तक इंतजार किया। खुशबू के 18 साल के होते ही रीत बनिक ने उसको धर्मांतरण के लिए तैयार किया।
24 मार्च, 2024 को मुस्कान के परिजन दिल्ली गए थे। उसी दिन दोनों बहनें घर से निकल गईं। रीत उर्फ इब्राहिम ने पहले दोनों बहनों को एक शख्स का नंबर देकर उसके पास भेजा। दोनों को मस्जिद में कलमा पढ़वाया गया। इसके बाद दोनों को ट्रेन से दिल्ली भेजा। दोनों बहनें इस दौरान बुर्के में रहती थीं।
मुस्कान और खुशबू दिल्ली में तीन दिन तक ठहरीं। वहां से दोनों बिहार गईं और फिर कोलकाता पहुंचीं। इसके बाद दोनों बहनों को कोलकाता में मौलवी के सामने शाहदा (इस्लाम में आस्था रखने की घोषणा) हुआ। दोनों बहनों ने कानूनी तरीके से इस्लाम अपनाया। दोनों बहनें आयशा और गैंग के अन्य सदस्यों के संपर्क में आईं।
एक बहन अमीना तो दूसरी जोया हो गई
कोलकाता में रीत ने दोनों बहनों को मुस्लिम बस्ती में रुकवाया। उनके नाम भी बदल दिए गए। बड़ी बहन का नाम अमीना तो छोटी का नाम जोया रख दिया गया। दोनों बुर्का पहनकर ही घर से निकलती थीं। गैंग के सदस्य मुस्लिम युवकों से उनका निकाह कराने की तैयारी में थे, जिससे वो फिर कभी वापस अपने धर्म में न लौट सकें। दोनों बहनें सोशल मीडिया पर इस्लाम के पक्ष में मुहिम चलाने लगी थीं।
अब दोनों बहनों को रिकवर करने की कहानी भी पढ़िए…
गायब होने के 41 दिन बाद अपहरण का केस लिखा
इधर, आगरा में इनके पिता ने बेटियों की गुमशुदगी की एप्लिकेशन सदर थाने में दी। पिता ने पुलिस को बताया- उनकी बड़ी बेटी की दोस्ती ऊधमपुर, जम्मू-कश्मीर की रहने वाली साइमा से है। उसने ही बेटी का ‘ब्रेनवॉश‘ किया। मगर शुरुआत में आगरा पुलिस इस केस की गंभीरता को नहीं समझ सकी।
पुलिस से सहयोग नहीं मिलने पर पीड़ित पिता अपनी दोनों बेटियों की तलाश में इधर-उधर भटकता रहा। तमाम कोशिशों के बाद दोनों बेटियों के गायब होने के 41 दिन बाद (4 मई, 2025) पुलिस ने अपहरण का केस दर्ज किया। इसमें साइमा को नामजद किया गया।
पुलिस ने छानबीन की तो पता चला कि दोनों बहनें धर्मांतरण की मुहिम से जुड़ गईं। ठीक उसी अंदाज में जैसे फिल्म ‘द केरल स्टोरी’ में युवतियां, दूसरी युवतियों को फंसाती दिखती हैं। इस जानकारी के बाद पुलिस हरकत में आई और जांच साइबर क्राइम पुलिस को दी गई।
डीजीपी तक मामला पहुंचा तो 7 टीमें बनाईं
इसके बाद डीजीपी राजीव कृष्ण ने इस पर संज्ञान लिया। पुलिस कमिश्नर दीपक कुमार ने खुद पूरे मामले को देखना शुरूकिया। एडीसीपी सिटी आदित्य के नेतृत्व में 7 टीमें बनाई गईं। सर्विलांस, साइबर सेल से पुलिस को अहम जानकारियां मिलीं।
उसके बाद पुलिस की छापेमारी शुरू हुई। पुलिस की एक टीम बैरकपुर (कोलकाता) गई। सबसे पहले वहां से दोनों सगी बहनों के बारे में जानकारी जुटाई, उन्हें सुरक्षित किया। उसके बाद बैरकपुर छावनी में बकर महल निवासी शेखर रॉय उर्फ हसन अली को पकड़ा। आरोपी बारासात कोर्ट में कर्मचारी है।
उससे हुई पूछताछ के आधार पर गोवा से एक महिला आयशा (एसबी कृष्णा) को पकड़ा। कोलकाता से अली हसन उर्फ शेखर रॉय, यहीं से ओसामा, आगरा से रहमान कुरैशी, मुजफ्फरनगर के खालापार से अब्बू तालिब, देहरादून से अबुर रहमान, जयपुर से मोहम्मद अली और जुनैद कुरैशी को गिरफ्तार किया गया।
पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार किए गए 10 आरोपियों में कई हिंदू थे, जो धर्मांतरण करके मुस्लिम बन गए थे। बाद में यह उसी गैंग का हिस्सा बन गए और लड़के-लड़कियों को धर्मांतरण करके मुस्लिम बनाने लगे।
साभार फेसबुक

