Homeपुस्तक चर्चापर्यटन और संग्रहालय : पर्यटन और अनुसंधान के केंद्र हमारे संग्रहालय

पर्यटन और संग्रहालय : पर्यटन और अनुसंधान के केंद्र हमारे संग्रहालय

ऐतिहासिक पुरातत्व, कला, मूर्तियां, अभिलेख, शिलालेख, संस्कृति, विज्ञान जैसी महत्वपूर्ण वस्तुओं के संग्रह को प्रदर्शित कर आमजन तक पहुंचने वाले संग्रहालय एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक और शैक्षिक संस्थान हैं। इनका प्रमुख उद्देश्य जनता को इन वस्तुओं के बारे में शिक्षित करना और उन्हें सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराना है। संग्रहालय छात्रों, शोधकर्ताओं और आम जनता को विभिन्न विषयों के बारे में जानने, सीखने और अनुसंधान करने के अवसर प्रदान करते हैं।

संग्रहालयों में अक्सर व्याख्यान, कार्यशालाएं और प्रदर्शनियां आयोजित की जाती हैं, जो दर्शकों को वस्तुओं और उनके इतिहास के बारे में अधिक जानकारी प्रदान करती हैं। संग्रहालय वस्तुओं को संरक्षित करने, उनकी देखभाल करने और सुरक्षा के लिए जिम्मेदार भी होते हैं। अपने उद्देश्यों की पूर्ति के लिए संग्रहालय विभिन्न डिजिटल उपकरणों और सॉफ्टवेयर के उपयोग द्वारा यहां संपन्न होने वाले कार्यक्रमों को अधिक मनोरंजक और ज्ञानवर्धन का उपक्रम किया जा रहा है, जिससे अधिक से अधिक लोग लाभान्वित हो सकें।

ऐतिहासिक, पुरातत्व एवं वैज्ञानिक अनुसंधान के ये महत्वपूर्ण केंद्र संग्रहालयों में संरक्षित और प्रदर्शित वस्तुओं को मनोरंजन की दृष्टि से देखने के लिए प्रति वर्ष लाखों पर्यटक पहुंचते हैं। संग्रहालय वर्तमान में पर्यटन विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण का एक महत्वपूर्ण केंद्र होने से संग्रहालय पूरे विश्व में पाए जाते हैं। भारत में भी सभी राज्यों में संग्रहालय हैं। कभी संग्रहालय की अवधारणा ऐतिहासिक और पुरातत्व सामग्री पर आधारित थी। समय के साथ-साथ इस अवधारणा में नई अवधारणाएं जुड़ती गईं और संग्रहालयों के विविध रूप सामने आए।

वर्तमान में इतिहास और पुरातत्व के साथ-साथ विज्ञान, जीवाश्म, वायुसेना, रेल, वस्त्र, गुड़िया, मानव, संस्कृति, सबमरीन, रक्षा, हस्तशिल्प और हथकरघा, पतंग, पुरानी कार, चित्रकला, लोकगीत, सैंड मूर्तियां, औद्योगिक एवं तकनीक, युद्धपोत, वास्तु, आदिवासी कला और संस्कृति और वानिकी आदि संग्रहालयों की लंबी श्रृंखला हमारे देशभर में है।

डॉ. प्रभात कुमार सिंघल ने इस विषय पर श्रमसाध्य कार्य कर “पर्यटन और संग्रहालय” नामक पुस्तक का लेखन किया है। एक सूचना के अनुसार भारत में विविध प्रकार के लगभग एक हजार संग्रहालय हैं। लेखक ने 16 राज्यों के राज्यवार 90 प्रमुख संग्रहालयों के निर्माण, क्रमिक विकास, दीर्घाओं में प्रदर्शित प्रमुख प्रदर्शनों की विशेषताओं को सामने लाने का प्रयास किया है। जगह-जगह संग्रहालयों के चित्र भी पुस्तक को आकर्षक बनाते हैं। आवरण पृष्ठ पर कोलकाता संग्रहालय में मिश्र की मम्मी का चित्र दर्शनीय है।

भारत में संग्रहालयों के विकास के बारे में लेखक लिखते हैं: भारत में सर्वप्रथम 1796 ई. में पुरातत्विक अवशेषों को संग्रहित करने की आवश्यकता बंगाल की एशियाटिक सोसाइटी द्वारा महसूस की गई। सोसायटी के माध्यम से सर विलियम जोन्स द्वारा 1784 में कोलकाता में “इंपीरियल म्यूजियम” नाम से एक अलग इकाई के रूप में विकसित हुआ, जो बाद में “इंडियन म्यूजियम, कलकत्ता” के नाम से जाना गया।

यह संग्रहालय कला, पुरातत्व, नृविज्ञान, प्राणी विज्ञान, भूविज्ञान और वनस्पति विज्ञान जैसे छह खंडों में फैला हुआ है। वर्तमान में यह भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के तहत राष्ट्रीय महत्व का संग्रहालय है। यहाँ 4000 वर्ष प्राचीन जीवाष्म, कलश में बुद्ध की अस्थियों के अवशेष, प्राचीन वस्तुएं, ममी, युद्ध सामग्री, आभूषण, कंकाल, प्राचीन सिक्के, दुर्लभ मुगल शैली के चित्र, उल्का पिंड आदि प्रदर्शित किए गए हैं।

हैदराबाद का सलारजंग संग्रहालय देश के सबसे विख्यात संग्रहालयों में से एक है। यहाँ 1.1 मिलियन कलाकृतियां एवं कला खंडों का संग्रह इसे भव्य स्वरूप प्रदान करता है। संग्रहालय की 36 दीर्घाओं में मुगल काल की हजार से अधिक कलाकृतियां, 9 हजार पांडुलिपियां एवं 47 हजार मुद्रित चित्रकारी की पुस्तकें प्रदर्शित की गई हैं। यहां का घड़ी कक्ष और 19वीं सदी की ब्रिटिश संगीतमय घड़ी विशेष आकर्षण हैं।

अहमदाबाद में केलिको वस्त्र संग्रहालय वस्त्र कला की दृष्टि से देश का महत्वपूर्ण संग्रहालय है। दांडी कुटीर संग्रहालय, पतंग संग्रहालय, कुरुक्षेत्र का श्रीकृष्ण संग्रहालय, हिमाचल प्रदेश का सुकेती जीवाश्म संग्रहालय, विशाखापत्तनम का सबमरीन संग्रहालय, नेपियर संग्रहालय (तिरुअनंतपुरम), मथुरा संग्रहालय, रेल संग्रहालय (रिवाड़ी, दिल्ली, चेन्नई, मैसूर), वन अनुसंधान केंद्र देहरादून, कोलकाता का वनस्पति संग्रहालय, राष्ट्रीय पुरातत्व संग्रहालय दिल्ली, भारतीय वायुसेना संग्रहालय, लाल किला संग्रहालय, शंकर अन्तर्राष्ट्रीय गुड़िया संग्रहालय, जयपुर का अल्बर्ट हॉल, सिटी पैलेस संग्रहालय, बिड़ला विज्ञान संग्रहालय – ये सभी संग्रहालय प्रमुख हैं।

कुछ अन्य उल्लेखनीय संग्रहालयों में शामिल हैं:

  • चंद्रगिरि पुरातत्व संग्रहालय (आंध्रप्रदेश)

  • डायनासोर संग्रहालय (गांधीनगर)

  • सिटी संग्रहालय (चंडीगढ़)

  • कांगड़ा कला संग्रहालय (धर्मशाला)

  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संग्रहालय (मैसूर)

  • लोकगीत संग्रहालय

  • सैंड मूर्तिकला संग्रहालय

  • कोच्चि पुरातत्व संग्रहालय

  • विश्वेश्वरैया औद्योगिक एवं तकनीक संग्रहालय (बेंगलुरु)

  • करवर युद्धपोत संग्रहालय

  • हम्पी पुरातत्व संग्रहालय

  • इंदौर केंद्रीय संग्रहालय

  • जय विलास महल संग्रहालय (ग्वालियर)

  • राज्य संग्रहालय और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय (भोपाल)

  • छत्रपति शिवाजी महाराज वास्तु संग्रहालय (मुंबई)

  • अमरावती पुरातत्व संग्रहालय

  • भुवनेश्वर का आदिवासी कला और संस्कृति संग्रहालय

  • उम्मेद पैलेस और मेहरानगढ़ संग्रहालय (जोधपुर)

  • हल्दीघाटी संग्रहालय

  • आहड़ संग्रहालय और भारतीय लोककला मंडल (उदयपुर)

  • गंगा गोल्डन जुबली संग्रहालय (बीकानेर)

  • राजकीय संग्रहालय और राव माधो सिंह संग्रहालय (कोटा)

  • रॉयल संग्रहालय (तंजावुर)

  • सरकारी संग्रहालय (चेन्नई)

  • भारत कला भवन (वाराणसी), सारनाथ संग्रहालय

  • राष्ट्रीय संग्रहालय (इलाहाबाद)

  • रेजिडेंसी संग्रहालय (लखनऊ)

  • पोर्टब्लेयर, पटना, रांची, जम्मू, अगरतला, गोवा, आनंदपुर साहेब के संग्रहालय

पुस्तक की भूमिका में पर्यटन प्रेमी बाल मुकंद ओझा लिखते हैं:

“संसार के कई महान नगर अपने श्रेष्ठ संग्रहालयों के कारण विश्व भर में जाने जाते हैं। देशी एवं विदेशी पर्यटकों के साथ-साथ इतिहास, कला एवं विज्ञान के विद्यार्थी, शिक्षक एवं जनसाधारण भी अपने जीवन में संग्रहालयों का भ्रमण एवं अवलोकन अवश्य करते हैं। संग्रहालय विदेशी मुद्रा अर्जित करने के सशक्त एवं विश्वसनीय स्रोत बनते जा रहे हैं।”

लेखकीय में डॉ. प्रभात कुमार सिंघल लिखते हैं:

“अनादिकाल से वर्तमान समय तक के भारत के इतिहास, सभ्यता और संस्कृति के दर्शन करना, जानना और समझना है तो संग्रहालय एकदम सही एवं उपयुक्त पर्यटन स्थल हैं। संग्रहालय आभासीय, जीवंत और दृश्यात्मक संग्रह से पर्यटकों के दिमाग में स्थाई प्रभाव छोड़ते हैं।”


पुस्तक का विवरण:
पुस्तक : पर्यटन और संग्रहालय
लेखक : डॉ. प्रभात कुमार सिंघल
प्रकाशक : वीएसआरडी एकेडमिक पब्लिशर, मुंबई
प्रकाशन वर्ष : अगस्त 2021
मूल्य : ₹162
एक्सपोर्ट प्राइस : US $18.00
पृष्ठ संख्या : 163
प्रकार : पेपरबैक
आईएसबीएन : 13: 978-93-914

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