केरल हाई कोर्ट ने महात्मा गाँधी की प्रतिमा के साथ अभद्रता करने वाले शख्स के खिलाफ कार्रवाई रद्द कर दी। हाई कोर्ट ने कहा कि ऐसा करना कोई अपराध नहीं था। ऐसा करने वाला एक छात्र था, जिसने महात्मा गाँधी के ऊपर एक क्रिसमस वाला श्रद्धांजलि माला भी रख दिया था।
केरल हाई कोर्ट ने कहा कि छात्र का कृत्य भले ही निंदनीय है, लेकिन उसे कानूनन अपराध नहीं माना जा सकता। हाई कोर्ट ने कहा कि ऐसे कृत्य को दंडित करने के लिए कोई स्पष्ट कानूनी प्रावधान मौजूद नहीं है।
यह मामला केरल हाई कोर्ट की जस्टिस वी जी अरुण की बेंच ने सुना। उन्होंने यह कहते हुए मामला रद्द कर दिया कि याचिकाकर्ता का आचरण भले ही सामाजिक रूप से अस्वीकार्य और निंदनीय हो लेकिन कानून के अनुसार उसे गैर-कानूनी नहीं कहा जा सकता। कोर्ट ने साफ किया कि हर अनैतिक कार्य, अवैध कार्य नहीं होता।
कोर्ट ने ‘nullum crimen sine lege’ यानी ‘बिना कानून के कोई अपराध नहीं’ के सिद्धांत का हवाला देते हुए कहा कि जब तक किसी कृत्य को किसी कानून में अपराध के रूप में परिभाषित नहीं किया गया हो, तब तक उसे अपराध नहीं माना जा सकता।

