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हीरनंदानी मुंबई के एक जोड़े ने घर खरीद बेचकर गिफ्ट देकर टैक्स बचाकर अधिकारियों को चौंकाया

हीरनंदानी, मुंबई के एक जोड़े, कविता दमानी और उनके पति, ने आयकर अधिनियम की धारा 54 का उपयोग करके टैक्स बचाया। मामला कुछ इस प्रकार है:

प्रॉपर्टी का गिफ्ट: कविता के पति ने 2002 में खरीदे गए दो फ्लैट्स (34 लाख और 17 लाख रुपये में) को 2017 में कविता को रजिस्टर्ड गिफ्ट डीड के माध्यम से दे दिया। गिफ्ट पर कोई टैक्स नहीं लगता, बशर्ते यह नजदीकी रिश्तेदार (जैसे पति-पत्नी) के बीच हो।

फ्लैट्स की बिक्री: कविता ने 2020 में इन दोनों फ्लैट्स को 6 करोड़ रुपये में बेच दिया। इससे लगभग 4 करोड़ रुपये का दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ (LTCG) हुआ।

नया घर खरीदा: कविता ने बिक्री से प्राप्त राशि का उपयोग अपने पति से ही एक नया आवासीय फ्लैट (लोधा एस्टेला) 3.85 करोड़ रुपये में 2021 में खरीदा। इस लेनदेन में TDS और स्टैंप ड्यूटी का भुगतान किया गया।

धारा 54 के तहत छूट: आयकर अधिनियम की धारा 54 के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति दीर्घकालिक आवासीय प्रॉपर्टी बेचकर उस राशि से एक साल पहले या दो साल बाद नया आवासीय घर खरीदता है, तो उसे LTCG पर टैक्स छूट मिल सकती है। कविता ने इस शर्त को पूरा किया, क्योंकि उन्होंने बिक्री से प्राप्त राशि को नए घर में निवेश किया।

आयकर विभाग की आपत्ति और ITAT का फैसला: आयकर विभाग ने दावा किया कि यह लेनदेन पति-पत्नी के बीच केवल टैक्स बचाने के लिए किया गया था और क्लबिंग प्रावधानों (धारा 64) के तहत लाभ पति की आय में जोड़ा जाना चाहिए। हालांकि, आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (ITAT), मुंबई ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया।

ITAT ने कहा कि:
गिफ्ट डीड वैध और रजिस्टर्ड थी।
फ्लैट्स की बिक्री और नया घर खरीदने की प्रक्रिया पारदर्शी थी।
कविता ने धारा 54 की सभी शर्तों का पालन किया, जैसे कि बिक्री की राशि उनके खाते में जमा हुई और नया घर खरीदने के लिए उसी का उपयोग किया गया।
रिश्तेदार (पति) से घर खरीदने पर कोई कानूनी रोक नहीं है, बशर्ते लेनदेन वास्तविक हो।

परिणाम: ITAT ने कविता को धारा 54 के तहत पूर्ण टैक्स छूट दी, जिससे 4 करोड़ रुपये के LTCG पर कोई टैक्स नहीं देना पड़ा।

टैक्स बचाने के लिए अपनाए गए प्रमुख कदम:

रजिस्टर्ड गिफ्ट डीड: प्रॉपर्टी का हस्तांतरण वैध और पारदर्शी था।
धारा 54 का उपयोग: बिक्री की राशि को नए आवासीय घर में समयबद्ध तरीके से निवेश किया गया।
दस्तावेजीकरण: सभी लेनदेन (गिफ्ट, बिक्री, खरीद) के लिए उचित दस्तावेज और बैंक रिकॉर्ड बनाए गए।
समय अंतराल: गिफ्ट (2017) और बिक्री (2020) के बीच पर्याप्त समय रखा गया, जिससे टैक्स बचाव के इरादे पर संदेह कम हुआ।
TOLA एक्ट का लाभ: कोविड-19 के कारण समयसीमा में छूट (TOLA एक्ट) का उपयोग करके भुगतान समय पर पूरा किया गया।

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