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सामाजिक संस्थाएँ समाज को जोड़ने और जाग्रत करने का काम करती हैः श्री सुरेश प्रभु

कोई भी समाज तभी विकास कर सकता है जब उस समाज में सामाजिक संस्थाएँ सक्रिय हों। सरकारें अपना काम करती है, लेकिन सरकारी व्यवस्थाएँ इतनी जटिल होती है कि उसका परिणाम आने में समय लगता है। मैं माननीय अटल जी और श्री नरेंद्र मोदीजी के नेतृत्व मे कई मंत्रालयो में काम कर चुका हूँ और मैने अनुभव किया है कि जब तक समाज और सामाजिक संस्थाएँ साथ न आएँ, सरकार अपने काम में सफल नहीं हो सकती।

ये बेबाक विचार पूर्व केंद्रीय मंत्री श्री सुरेश प्रभु ने मुंबई के लोनावला के पास स्थित कैवल्य धाम और मानव साधन विकास संस्था द्वारा सामाजिक क्षेत्र में मिलकर कार्य करने के लिए अनुबंध किए जाने के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में व्यक्त किए। श्रीमती उमा प्रभु व श्री अरविंद तिवारी ने अनुबंध पत्र पर हस्ताक्षर कर इसे साझा किया।

अपने बेबाक और स्पष्ट विचारों के लिए जाने जाने वाले श्री सुरेष प्रभु ने कहा कि राजनीति व सरकार में रहते हुए मैने महसूस किया कि समाज को आगे बढ़ाने के लिए सामाजिक संगठनों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, इसी विचार को साकार करने के लिए हमने मानव विकास संस्थान प्रारंभ किया, और मुझे प्रसन्नता है कि आज इसने अपनी सफल यात्रा के 25 वर्ष पूर्ण कर लिए हैं। इन 25 वर्षों में हमने हजारों युवक युवतियों को आत्मनिर्भर तो बनाया ही उनके अंदर आत्मसम्मान का भाव भी पैदा किया।

श्री प्रभु ने कहा कि हम एक बहुत बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहे हैं। कैवल्य धाम की 10 वर्षों की ऐतिहासिक व गौरवमयी यात्रा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि कैवल्य धाम के संस्थापक पूज्य गुरुजी ने योग के माध्यम से लोगों को स्वस्थ रखने का जो संकल्प देखा था, उनका ये सपना आज हमारे प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदीजी की वजह से पूरी दुनिया में साकार हो रहा है। दुनिया के सभी देशों में योग दिवस मनाया जा रहा है। दुनिया भर के लोग योग सीखने भारत आना चाह रहे हैं। अपनी चीन यात्रा की एक घटना का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि चीन में मुझे एक युवती मिली जो कई बार भारत आकर योग सीखकर गई थी और फिर से आना चाहती थी, लेकिन उसको वीज़ा नहीं मिला। मुझे उम्मीद है मोदीजी की चीन यात्रा के बाद ऐसी समस्याएँ नहीं आएगी। श्री प्रभु ने कहा कि योग आयुर्देव और प्राकृतिक चिकित्सा की वजह से ही भारत विश्व गुरु बना। आज हम एक बार फिर से पूरी दुनिया का नेतृत्व करने के लिए आगे बढ़ रहे हैं।

श्री प्रभु ने कहा कि कैवल्यधाम स्वास्थ्य और योग अनुसंधान केंद्र आधुनिक विज्ञान की स्थापना 1924 में स्वामी कुवलयानन्द ने की थी। जिस व्यक्ति ने 1924 में योग को लेकर एक संस्थान की स्थापना की उस व्यक्ति की दूरदर्शिता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

गणपति जी की स्थापना और विसर्जन को लेकर उन्होंने कहा कि लोग अपनी सुविधा के लिए गणपतिजी को डेढ़ दिन घर में बिठाते हैं और विसर्जित कर देते हैं। इसका कोई धार्मिक कारण नहीं है बल्कि जो लोग दो दिन भी मछली खाए बगैर नहीं रह सकते उन लोगों ने ऐसी परंपरा प्रारंभ की होगी। उन्होंने कहा कि मनुष्य का मन धार्मिक संस्कारों को भी बदल देता है।

कैवल्य धाम के सीईओ एवँ सचिव श्री अरविंद तिवारी ने कहा कि कैवल्यधाम पुणे के पास लोनावला (महाराष्ट्र, भारत) में स्थित है। इसकी फ्रांस और संयुक्त राज्य अमेरिका तथा कुछ अन्य देशों में भी इसकी अपनी पहचान है और वहाँ से विगत सौ वर्षों से लोग यहाँ योग सीखने के लिए आ रहे हैं।

कैवल्यधाम में एक प्राकृतिक चिकित्सा केन्द्र भी है। इसके विभिन्न पाठ्यक्रमों में प्रति वर्ष लगभग 250 छात्र प्रवेश लेते हैं। इसमें प्रवेश लेने वाले छात्र भारत के साथ विदेशों से (मुख्य रूप से चीन, जापान, कोरिया, फ्रांस, संयुक्त राज्य अमेरिका और कनाडा से) भी आते हैं।

कार्यक्रम में बांबे उच्च न्यायालय के माननीय न्यायमूर्ति श्री रमेश धानुका, श्री राजन वेलुणकर, श्री राजकुमार सेक्सरिया, श्री राकेश सेक्सरिया, श्री नानिक रूपानी, श्री महेन्द्र संदेशा, श्री निशांत जैन, श्रीअंकित भंडारी, श्री मयंक लुणावत, श्री संतोष पाठक सहित कैवल्य धाम और मानव साधन विकास संस्था से जुड़े प्रमुख लोग उपस्थित थे।

मानव साधन विकास संस्था के बारे में

स्थापना व उद्देश्य:
MSVS की स्थापना 1997 में हुई थी, जिसका उद्देश्य ग्रामीण और वंचित समुदायों को संपन्न और आत्मनिर्भर बनाना है। यह स्वास्थ्य, शिक्षा, कौशल विकास, पर्यावरण चेतना और सामुदायिक उत्थान जैसे क्षेत्रों में काम करती है। संस्थापक अध्यक्ष में सुरेश प्रभु (Suresh Prabhu) और चेयरपर्सन उमा प्रभु (Uma Prabhu) हैं msvs.org.in।

भौगोलिक क्षेत्र:
MSVS मुख्य रूप से महाराष्ट्र के सिंधुदुर्ग और रत्नागिरि जिलों में सक्रिय है, और इसका मुख्यालय नवी मुंबई (कपूरखैरणे) में स्थित है।

भगिनी संस्था – Jana Shikshan Sansthan (JSS):
MSVS ने सिंधुदुर्ग और रत्नागिरि में ग्रामीण स्तर पर पहला Jana Shikshan Sansthan (JSS) स्थापित किया। पिछले 24 वर्षों में इसने 100,000 से अधिक लोगों को व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया, जिसमें 85% लाभार्थी महिलाएँ थीं।

प्रमुख कार्यक्षेत्र एवं परियोजनाएँ

  1. कौशल विकास (Skill Development & Entrepreneurship)
    MSVS के विभिन्न प्रशिक्षण केंद्रों, विशेष रूप से Entrepreneurship Development Institute, में निम्नलिखित कोर्स उपलब्ध हैं:

  • ब्यूटी और हेयर केयर

  • मेहंदी (Henna) बॉडी आर्ट

  • सिलाई और फैशन डिज़ाइन

  • कढ़ाई और कृत्रिम आभूषण निर्माण

  1. जनशिक्षण संस्थान (Jan Shikshan Sansthan – JSS)
    इसने निम्नलिखित जैसे छोटे अवधि (3-6 महीने) वाले व्यावसायिक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम आयोजित किए हैं:

  • बाँस कारीगरी, वेल्डिंग, फैब्रिकेशन

  • बेकरी, फोटोग्राफी, वीडियो

  • घड़ी और मोबाइल मरम्मत

  • फल प्रसंस्करण, मेहंदी, प्लंबिंग इत्यादि
    इनके परिणामस्वरूप कई प्रतिभागी स्वरोजगार या स्थिर रोजगार पा चुके हैं msvs.org.in।

  1. साइंस और स्वास्थ्य शिक्षा (Health & Paramedical Education)

स्कूल ऑफ नर्सिंग:
सिंधुदुर्ग में यह पहला प्रयास है, जो स्थानीय महिलाओं को नर्सिंग शिक्षा प्रदान करता है जिससे उन्हें स्वास्थ्य क्षेत्र में करियर बनाने में सहायता मिलती है msvs.org.in।

इंस्टिट्यूट ऑफ पैरामेडिकल साइंसेज:

  • मेडिकल लैब तकनीशियन (2 वर्ष)

  • ऑपरेशन थियेटर असिस्टेंट (1 वर्ष)

  • ICU असिस्टेंट (6 महीने)
    भविष्य में फ़िज़ियोथेरेपी, स्पीच थैरेपी, ऑक्यूपेशनल थैरेपी जैसे कोर्स शुरू करने की योजना है msvs.org.in।

  1. विज़न मिशन (Vision Mission Project)
    सिंधुदुर्ग और रत्नागिरि के 300+ गांवों में स्कूल के बच्चों की दृष्टि जांच करके मुफ्त चश्मे उपलब्ध कराने और ज़रूरत पड़ने पर विशेषज्ञों से उपचार करवाने का काम MSVS कर रही है।

प्रभाव और उपलब्धियाँ

विस्तार: 1163 गाँवों तक पहुँच, 97,551 परिवारों को लाभ, 76,372 महिला लाभार्थियों, 4,572 बच्चे।

महिलाओं के उत्थान में विशेष योगदान: JSS कार्यक्रमों में 85% लाभार्थी महिलाएँ msvs.org.in।

सहयोग: NABARD, IFFCO, Godrej, Ford Foundation, ICICI Foundation जैसे संस्थानों के साथ साझेदारी।

वेब साईट: https://www.msvs.org.in/

कैवल्यधाम की वेब साईट: https://kdham.com/

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