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हम गायों को संरक्षित करेंगे तो गाय हमारी संस्कृति, कृषि और सभ्यता को संरक्षण देगी

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख श्री रामलाल ने कहा कि देश ने गाय को बचाने के लिए कई अंदोलन किए हैं जिसमें कूका विद्रोह प्रमुख है। अंग्रेजों के शासन के पहले पंजाब में गौहत्या पर पाबंदी थी, लेकिन जब वहां गौहत्या पर प्रतिबध हटा तो कूका विद्रोह के माध्यम सै इसका विरोध किया गया। इसमें कई अंग्रेज अधिकारीयों को गौसेवकों ने मार दिया। यह विद्रोह संत समाज द्वारा किया गया था।

इस्कान सभाग्रह में आयोजित एक भव्य समारोह में ईश्वर सृष्टि द्वारा प्रकाशित गौभारती ग्रंथ के विमोचन पर पर अपने विचार व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि गायों को सरकार नहीं बचा सकती इसके लिए समाज को ही आगे आना होगा। हम जब अपने इतिहास में झांकते हैं तो पाते हैं कि हमारी सुदृढ़ अर्थ और कृषिव्यवस्था का मुख्य आधार हमारा गौवंश था।

गौशालाओं को संरक्षित करेंगे तो हम अपने आपको ही संरक्षित करेंगे। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने गौसेवा संवर्ध्दन समिति बनाई है जो देश के गौवंश को बचाने व संरक्षित करने का का कार्य कर रही है।

उन्होंने कहा कि स्व. हस्तीमलजी संघ के ऐसे समर्पित कार्यकर्ता थे जो आजीवन गौसेवा करते रहे और गौवंश को बचाने में अपना तन-मन और धन लगा दिया।

इस अवसर पर इस्कॉन खारघर, मुंबई के अध्यक्ष स्वामी सूरदास जी ने तीखे शब्दों में सवाल उठाते हुए कहा कि हम अपनी संस्कृति और सांस्कृतिक मूल्यों से कट गए हैं इसलिए गौवंश को बचाने के लिए इस तरह के आयोजन करना पड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब कृष्ण मात्र 7 साल के थे तो गोपाष्टमी के दिन वे अपनी 7 लाख गायों को चराने के लिए जाने की जिद करने लगे तो उनके पिता ने कहा कि तुम पैर में जूते तो पहन लो, इस पर कृष्ण ने कहा कि जब मेरी सब गैयाँ बगेर जूते के जा रही है तो मैं जूते कैसे पहन लूँ, आप इन सब गायों के लिए जूतों की व्यवस्था कर दें।

उन्होंने कहा कि गाय की पूजा करने वाले इस देश में लोग कुत्ते पाल रहे हैं और कुत्ते सीधे बेडरुम तक पहुँच गए हैं। उन्होंने कहा कि हम ब्रह्म संहिता पढ़ेंगे तो अपने गौरवशाली इतिहास और पूर्वजों के बारे में जान सकेंगे। उन्होंने कहा कि मुंबई के वडाला के आईसीटी संस्थान में गौमूत् पर किए गए शोध में चौंकाने वाले नतीजे सामने आए हैं।

उन्होंने कहा कि गीता, गाय और श्रीमद् भागवत के माध्यम से हम पूरी दुनिया को अपनी बौध्दिक विरासत से अवगत करा सकते हैं। लेकिन हमको शरीर के तल पर जीने की बजाय आत्मा के तल पर जीना होगा।

उन्होंने कहा कि पूज्यप्रभुपाद जी ने गीता के माध्यम से इस्कॉन को 100 से ज्यादा देशों में स्थापित कर कृष्ण की महिमा को पहुँचाया है और दुनिया में 700 कृष्ण मंदिरों की स्थापना की है।

कार्यक्रम के प्रारंभ में च्वाईस कंपनी के श्री कमल पोद्दार ने कहा कि  तुलसीदास जी ने प्रभु श्री राम के जन्म के महत्व को विप्र, धेनु सुर संत हित लियो मनुज अवतार से रेखांकित किया. यानी श्री राम का जन्म विद्वानों, गाय, देवताओं और मनुष्य के कल्याण के लिए हुआ था इसमें भी गाय को दूसरे क्रम पर रखा गया था। इसीसे हम समझ सकते हैं कि भारतीय संस्कृति में गाय का क्या महत्व है।

उन्होंने गौभारती ग्रंथ के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि आप जब इस ग्रंथ को देखेंगे तो पाएंगे कि इसमें गाय की उपयोगिता के कितने आयामों के बारे में बताया गया है। उन्होंने एक घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने तत्कालीन गृहमंत्री गोविंद वल्लब पंत को एक गोपनीय पत्र देकर गीता प्रेस गोरखपुर के संस्थापक हनुमान प्रसाद पोद्दार के पास भेजा। जब वो पत्र पोद्दार जी ने खोलकर देखा तो उन्होंने अपनी अस्वीकृति में सिर हिला दिया। तब पंतजी ने उनसे पूछा कि इस पत्र में क्या लिखा है तो पोद्दार जी ने कहा कि राष्ट्रपतिजी मुझे भारत रत्न का अलंकरण देना चाहते हैं जो मुझे स्वीकार्य नहीं। श्री पोद्दार ने कहा कि जो लोग रा,टर् के कार्य में लगे होते हैं उनको किसी तरह का पुरस्कार प्रभावित नहीं करता।

ईश्वरसृष्टि के संस्थापक श्री कमलेश पारीक का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि पारीक जी ने ईश्वर सृष्टि के माध्यम से भारतीय संस्कृति की एक ऐसी लौ जगाई है जो आने वाले कई वर्षों तक हमारी संस्कृति को आलोकित करती रहेगी।  कमलेश जी ने इस ग्रंथ के माध्यम से हमारे गौवंश को लेकर जो शोधपूर्ण लेख प्रकाशित किए हैं, उनको पढ़कर ही रोमांच और गर्व महसूस होता है।

इस अवसर पर श्री कमलेश पारीक ने बताया कि राजस्थान के सीकर में ईश्वर सृष्टि के माध्यम से एक ऐसा प्रकल्प तैयार किया गया है जिसमें ऋषि-कृषि तंत्र मंत्र और गौसंवर्धन संरक्षण का कार्य किया जाएगा। इसमें आयुर्वेद प्राकृतिक चिकित्सा और गौशाला का प्रारंभ हो चुका है, आने वाले समय में निःशुल्क गुरुकुल के माध्यम से वेदों और संस्कृत को संरक्षित करने का कार्य किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के निष्ठावान स्वयं सेवक ईश्वर सृष्टि की स्थापना से लेकर गौभारती ग्रंथ के प्रेरणास्त्रोत रहे हैं। उनकी स्मृति में पहला गौसेवक पुरस्कार मुंबई के समर्पित गौ सेवक श्री

गौ भारती ग्रंथ के संपादक श्री वीरेन्द्र याज्ञिक ने कहा कि यह ग्रंथ मात्र गाय की महिमा नहीं बताता है बल्कि गाय के माध्यम से हमारी प्राचीन संस्कृति, परंपरा और आने वाले भविष्य के प्रति जागरुक करता है।

इस पूरे आयोजन को सफल बनाने में च्वाईस समूह के श्री सुयश पाटोदिया का विशेष सहयोग रहा।

समारोह में जाने माने उद्योगपति श्री रामप्रकाश बूबना, सुधीर जी विद्वंस, एकल अभियान के श्री सत्यनारायण काबरा अतिथि के रूप में उपस्थित थे। इसके अतिरिक्त मुंबई शहर की कई संस्थाओं के प्रतिनिधि इस कार्यक्रम के साक्षी बने। कार्यक्रम में सीताराम पारीक, जयचंद शेट्टी, संजय पटेल जैसे समर्पित सेवाभावी लोगों की उपस्थिति उल्लेखनीय रही। जयपुर से पुष्कर उपाध्याय, अहमदाबाद से विजय परसाण, इन्दौर से श्री सुरेन्द्र त्रिपाठी, सीकर से महेश ठाकर इस कार्यक्रम के साक्षी बनने के लिए विशेष रूप से आए। कार्यक्रम का संचालन श्री विनोद मोरवाल ने किया।

ईश्वरसृष्टि के संस्थापक श्री कमलेश पारीक का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि पारीक जी ने ईश्वर सृष्टि के माध्यम से भारतीय संस्कृति की एक ऐसी लौ जगाई है जो आने वाले कई वर्षों तक हमारी संस्कृति को आलोकित करती रहेगी।  कमलेश जी ने इस ग्रंथ के माध्यम से हमारे गौवंश को लेकर जो शोधपूर्ण लेख प्रकाशित किए हैं, उनको पढ़कर ही रोमांच और गर्व महसूस होता है।

इस अवसर पर श्री कमलेश पारीक ने बताया कि राजस्थान के सीकर में ईश्वर सृष्टि के माध्यम से एक ऐसा प्रकल्प तैयार किया गया है जिसमें ऋषि-कृषि तंत्र मंत्र और गौसंवर्धन संरक्षण का कार्य किया जाएगा। इसमें आयुर्वेद प्राकृतिक चिकित्सा और गौशाला का प्रारंभ हो चुका है, आने वाले समय में निःशुल्क गुरुकुल के माध्यम से वेदों और संस्कृत को संरक्षित करने का कार्य किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के निष्ठावान स्वयं सेवक ईश्वर सृष्टि की स्थापना से लेकर गौभारती ग्रंथ के प्रेरणास्त्रोत रहे हैं। उनकी स्मृति में पहला गौसेवक पुरस्कार मुंबई के समर्पित गौ सेवक श्री लक्ष्मीनारायण चाण्डक को प्रदान किया गया ।

गौ भारती ग्रंथ के संपादक श्री वीरेन्द्र याज्ञिक ने कहा कि यह ग्रंथ मात्र गाय की महिमा नहीं बताता है बल्कि गाय के माध्यम से हमारी प्राचीन संस्कृति, परंपरा और आने वाले भविष्य के प्रति जागरुक करता है।

इस पूरे आयोजन को सफल बनाने में च्वाईस समूह के श्री सुयश पाटोदिया और श्री लक्ष्मीकांत सिंगड़ोदिया का विशेष सहयोग रहा।

समारोह में जाने माने उद्योगपति श्री रामप्रकाश बूबना, सुधीर जी विद्वंस, एकल अभियान के श्री सत्यनारायण काबरा अतिथि के रूप में उपस्थित थे। इसके अतिरिक्त मुंबई शहर की कई संस्थाओं के प्रतिनिधि इस कार्यक्रम के साक्षी बने। कार्यक्रम में सीताराम पारीक, जयचंद शेट्टी, संजय पटेल जैसे समर्पित सेवाभावी लोगों की उपस्थिति उल्लेखनीय रही। जयपुर से पुष्कर उपाध्याय, अहमदाबाद से विजय परसाण, इन्दौर से श्री सुरेन्द्र त्रिपाठी, सीकर से महेश ठाकर इस कार्यक्रम के साक्षी बनने के लिए विशेष रूप से आए। कार्यक्रम का संचालन श्री विनोद मोरवाल ने किया।

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