“राम तुम्हारा चरित स्वयं ही काव्य है
कोई कवि बन जाए, सहज संभाव्य है!”
बाली की न बातें खत्म होंगी,न यादें खत्म होंगी. अंतहीन स्मृतियों का कारू का खजाना बन गया है बाली…. आज राम नवमी है और हाली ही के बरसों में “मंदिरों के महादेस बाली “में एक और अप्रतिम प्रतिमा स्थापित की गई है ऐसे पुरुषोत्तम की,जो अपनी- माया, मर्यादा और आदर्श के लिए विश्व भर में पूजित और प्रणम्य हैं. कल देश दशहरा मनाएगा.. राम, उसे,जो है अनाचारी भी…अहमी भी…दम्भी भी… है घमंडी भी.. रावण का वध करेंगे! विजयी होंगे राम..!भूलुंठित होगा रावण…!!
पर रावण की लंका तक का मार्ग था दुर्गम… अछोर सागर… जिसे पार करना भी मुश्किल…लाँघना भी मुश्किल… वहाँ तक पहुंचना भी मुश्किल… वह असाध्य भी …दुष्कर भी…राम ने वानर सेना का किया आव्हान…भारी पत्थर, विशाल पहाड़ के पहाड़, शिलाएं भी चट्टाने भी… वानर सेना ने इन सब का उपयोग कर बनाया पुल…राम सेना पहुंची लंका… किया भीषण युद्ध.. मिली विजय… राम की जय!
ठीक इसी कथ्य और भावभूमि पर आधारित जन- जन के आराध्य, अभिराम – राम की विशाल प्रतिमा को स्थापित किया है गया है बाली के ” नुसा दुआ ” इलाके के ” तोहफाती ” चौराहे पर. जी 20.शिखर सम्मेलन की सत्रहवीं बैठक हुई 15व 16 नवंबर 2022 को और इसकी मेजमानी की इंडोनेशिया ने, बैठक हुई बाली में. इसी बैठक स्थल के समीप टीलों, पहाड़ियों और चट्टानों को चित्ताकर्षक बनाते हुए इसी पर स्थापित की गई राम की नयनाभिराम पराक्रमी और युयुत्सवा!
( रावण से युद्ध के लिए प्रबलाकांक्षी, पूरी तरह तैयार)
इसी मुख्य प्रतिमा के साथ राम के परम सेवक – हनुमान, सुग्रीव और उत्साहित वानर सैना की यहाँ सुन्दर -सजीव – सी मूर्तीयाँ बनाई गई है. फकत तीन साल पहले बनाई इन सनातन धर्मावलंबियों के पूजनीय प्रतीकों की यह प्रतिमाएं, इंडोनेशिया के बारे में, इस आशंका को भी मिटा देती है कि इस देश में खास कर बाली में जो हजारों की तादाद में मंदिर बने हैं, वे सदियों पुराने हैं, तब के, जब वहाँ हिन्दू और बुद्ध बहुतायत में रहते थे. अब, जबकि मुस्लिम आबादी लगातार बढ़ते हुए तकरीबन नब्बे प्रतिशत से भी ज्यादा हो गई है, हिंदू देवी – देवताओं के मंदिर शायद अब न बने. पर इन कयासों के कोहरे को काटते -छाँटते, आशंकाओं को निर्मूल करते हुए
इंडोनेशिया की फिलवक्त राजधानी जकार्ता में सम्पूर्ण एशिया का सर्वाधिक बड़ा और भव्य मंदिर “सनातन धर्म आलयम ” का निर्माण इसी वर्ष पूरा हुआ है.
भगवान मुरुगन ( कार्तिकेय ) को समर्पित इस मंदिर का शिलान्यास सन 2020 में किया गया था. दो वर्षो से भी अधिक निर्माणावधि के बाद इसी साल 2 फरवरी ’25 को मंदिर का भव्य उद्घाटन- आयोजन सम्पन्न हुआ. इंडोनेशिया में इस्लाम कितना भी क्यों बढ़ जाए, जन – जन की रग – रग में बसे राम के प्रति इस देश की आस्था रहेगी अविरल – अविराम!
मैं पहले ही इस तथ्य को बता चुका हूँ कि रामायण, इंडोनेशिया ( बाली ) की आत्मा है.. अजर.. अमर..और सनातन…
यह जरूर है की भारत की रामायण और इंडोनेशिया / बाली की रामायण में भाषा और घटनाओं में तनिक भिन्नता है. भारतीय रामायण के रचयिता वाल्मीकि हैं, जबकि इंडोनेशिया / बाली में प्रचलित रामायण के रचयिता कवि योगेश्वर थे. भारतीय रामायण में राम की नगरी अयोध्या है तो वहाँ अयोध्या को ” योग्या ” कहा जाता है. हम भारतीय, लक्ष्मण को शेषनाग का अवतार मानते हैं जबकि वहाँ नौ सेना अध्यक्ष को लक्ष्मण कहा जाता है.
दशरथ को वहाँ, ” विश्वरंजन ” के तौर उल्लेख किया है सीता को वहाँ ” सिंता ” उच्चारित किया जाता है.
यह भी पूर्व में उल्लेख कर चुका हूँ कि 1973 में दुनिया कि सबसे ज्यादा मुस्लिम आबादी वाले देश इंडोनेशिया ने ही ” अंतर्राष्ट्रीय रामायण सम्मेलन ” आयोजित किया था. इंडोनेशियन रामायण में 26 अध्याय है और इसे ” काकावीन रामायण ” कहा जाता है. इंडोनेशिया के स्वतन्त्रता दिवस – 27 दिसम्बर को यहाँ के युवा, हनुमान का वेश धारण कर सरकारी परेड में शामिल होते हैं. बाली के बारे में अधिकृत सूचनाएं देने वाली लक्ष्मी से जब मेने हाल ही बाली के “उबुद ” इलाके में रामायण को पत्थरों पर उकेरने के बारे में जानना चाहा, उसने बताया कि उबुद में ” आयूंग ” नदी के किनारे पर लगभग एक किलोमीटर लम्बाई में पत्थरों पर रामायण के प्रसंगों को उकेरा गया है. अनेक पत्थरों पर राम – वनवास, सीता हरण और राम – रावण युद्ध जैसे प्रसंगों को कमनीय और कालात्मक तरीके से उकेरा गया है. इस सम्पूर्ण कला क्षेत्र का उद्घाटन
2023 में किया गया था.
लक्ष्मी अपनी आँखों को तनिक और चौड़ा बना लेती है जब वह बताती है की बाली में अनेक स्थानों पर रामकथा को कठपुतली- प्रदर्शन के जरिए प्रस्तुत किया जाता है. कठपुतली शो को बाली में – ” वेयांग कुलित ” कहा जाता है. फादर काबिल बुल्के ने रामायण पर बहुत काम किया. उनके मुताबिक दुनिया में 50 से ज्यादा भाषाओं में राम कथा लिखी गई है. रामायण ही ऐसा महाकाव्य है जिसे आधार बना सबसे ज्यादा लोक कथाएं लिखी गई हैं.
इंडोनेशिया में सबसे ज्यादा प्राचीन “जवानीस रामायण ” है. कहते हैं इसे 9वीं शताब्दी में लिखी जा चुका थी. जावा में रामकथा- प्प्रस्तुति , ” रामायण बेले” के रूप में होती है. जिस मंच पर यह आयोजन होता है उसे – ” वेयांग वॉन्ग ” कहा जाता है. जावा के ही “योग्यकर्ता ” शहर के प्राम्बनन मंदिर में प्रतिदिन रामलीला की प्रस्तुतियाँ होती है.यह मंदिर यहाँ का सबसे बड़ा, सबसे भव्य और सर्वाधिक प्रतिष्ठित मंदिर है. इसे युनेसको ने विश्व धरोहर में शुमार किया है.
यूँ पूरा संसार ही राम के नाम और काम से नित्य ही नतशीष होता है पर इंडोनेशिया / बाली के बागों- बहारों में, नदियों – कछारों में, सागरों – पहाड़ों में…अँधेरे – उजाले में.. जवालमुखी – मुहानों में…
रज में.. रग में.. कण में.. मानव मात्र के मन में…रमे हैं राम! …सियाराम मय सब जग जानी
करहु प्रणाम जोरि जुग पाणी!

पुरुषोत्तम पंचोली
वरिष्ठ लेखक एवं पत्रकार, कोटा