नासिक। ये एक अनोखा आयोजन था। नासिक के स्वामी नारायण मंदिर के भव्य सभाग्रह में नासिक के प्रमुख लोगों और संतों व महात्माओं की उपस्थिति में बटुकों के नंदीवाचन व शंखनाद की सामूहिक गूँज के साथ दैनिक भास्कर के नासिक संस्करण का शुभारंभ हुआ। महर्षि गौतम गोदावरी वेद विद्या प्रतिष्ठान के विद्यार्थियों ने मंत्रोच्चार किया। गुणगौरव न्यास संचालित अनंत विजय शंखनाद पथक ने वैदिक मंत्रों पर शंखनाद किया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि महानिर्वाणी अखाड़ा के अध्यक्ष, श्री वैष्णोदेवी श्राईन बोर्ड के सदस्य व मुंबई के विले पार्ले स्थित संन्यास आश्रम के पूज्य स्वामी महामंडलेश्वर विश्वेश्वरानंद जी थे। उन्होंने कहा कि संत समाज सभी को सुखी और निरोग देखना चाहता है। उन्होंने कहा सनातन धर्म का उद्देश्य पूरी दुनिया समभाव और सद्भावना को बढ़ाना है और यही संतों को भी वाणी है।
उन्होंने कहा कि नासिक में भास्कर का आगमन कुंभ से पहले हुआ है। उन्होंने समाचार माध्यमों की विश्वसनीयता पर कहा, ‘हमें कई माध्यमों से समाचार प्राप्त होते हैं लेकिन लोगों का विश्वास समाचार पत्र पर सबसे अधिक होता है। समाचार पत्र पहले भी सूचनाओं का सबसे विश्वसनीय स्रोत माने जाते थे और आज भी हैं। हम सभी जिज्ञासु हैं और जानना चाहते हैं। हमारे जानने की इच्छा के कारण ही महाभारत, श्रीमद्भागवत गीता जैसे महान ग्रंथों की रचना हुई है। उसी जिज्ञासा को पूरी सच्चाई के साथ दैनिक भास्कर शांत करता है।
उपस्थित सभी संतों ने समाज के प्रति दैनिक भास्कर के सरोकार का समाना करते हुए धार्मिक नगरी में उसके आगमन पर शुभकामनाएँ और आशीर्वाद दिया।
उल्लेखनीय है कि नासिक के सिंहस्थ में में 2027 में 2 अगस्त, 31 अगस्त और 11 सितंबर को अमृत स्नान और 42 पूर्व स्नान होंगे। इन तिथियों की सूचना दैनिक भास्कर को अपने प्रसार क्षेत्रों में देनी चाहिए।
इससे पहले संतों का स्वागत दैनिक भास्कर के चेयरमैन और प्रधान संपादक मनमोहन असवाल, प्रबंध संचालक कैलाश अग्रवाल, संचालक राकेश अग्रवाल, संचालक सुमित अग्रवाल, संचालक शिवा अग्रवाल, संचालक पलक आवाल, समूह संपादक प्रकाश दुबे, संचालक (पश्चिम) विल्फ्रेड परेरा और वाइस प्रेसिडेंट डॉ. विद्यापति उपाध्याय ने किया।
संत समागम का आरंभ दीप प्रज्जवलन से हुआ। कार्यक्रम की प्रस्तावना दैनिक भास्कर के समूह संपादक प्रकाश दुबे ने रखी। संत समागम का संचालन श्री पंचमुखी हनुमान मंदिर (श्री दिगंबर अखाड़ा) के महंत भक्तीचरण दास महाराज ने किया।
संत समागम में महंत डॉ. अनिकेत शास्त्री देशपांडे, श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर शिवगिरी जी महाराज, अखिल भारतीय श्री पंच दिगंबर अखाड़ा और बड़ा लक्ष्मीनारायण मंदिर के महंत रामस्नेहीदास महाराज, श्री पंचमुखी हनुमान मंदिर (श्री दिगंबर अखाड़ा) के महंत भक्तिचरण दास महाराज, श्री पंचायती आनंद अखाड़ा के श्री महंत शंकरानंद सरस्वतीजी महाराज, अखिल भारतीय श्री पंच दिगंबर अखाड़ा के श्री महंत रामकिशोरदास शास्त्री महाराज, श्री पंच निर्मोही अखाड़ा के श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर रघुनाथ महाराज देवबाप्पा (फर्शीवाले बाबा), श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर सोमेश्वरानंद सरस्वती महाराज और रामकुंड पुरोहित संघ के पूर्व अध्यक्ष सतीश शुक्ल ने भी विचार व्यक्त किए।
संत समागम में श्री पंचदशनाम जूना अखाड़ा, श्री पंचायती आवाहन अखाड़ा, श्री पंचायती अखाड़ा, श्री पंचायती निरंजनी अखाड़ा, श्री पंचायती आनंद अखाड़ा, श्री महानिर्वाणी अखाड़ा, श्री पंचायती अटल अखाड़ा, श्री पंचायतो बड़ा उदासीन अखाड़ा, श्री पंचायती नया उदासीन अखाड़ा, श्री पंचायती निर्मल अखाड़ा, अखिल भारतीय श्री पंच दिगंबर अखाड़ा, अखिल भारतीय श्री पंच निर्वाणी अखाड़ा, अखिल भारतीय श्री पंच निर्मोही अखाड़ा और स्वामीनारायण मंदिर (बीएपीएस) के महामंडलेश्वर, साधु-महंत और महात्मा उपस्थित थे।

