Homeश्रद्धांजलिस्व. उमाकांत वाजपेयी के व्यक्तित्व में कई आयाम थे

स्व. उमाकांत वाजपेयी के व्यक्तित्व में कई आयाम थे

मुम्बई के सुप्रसिद्ध हिंदीसेवी डॉ उमाकांत बाजपेयी की श्रद्धांजलि सभा अभूतपूर्व थी। उनकी पावन स्मृतियों पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन रविवार 9 नवंबर 2025 को जुहू के मिलेनियम क्लब में किया गया। भारी तादाद में रचनाकारों, पत्रकारों और कलाकारों ने डॉ उमाकांत बाजपेयी को श्रद्धा सुमन अर्पित किए और उनकी विशिष्ट उपलब्धियां को याद किया। इनमें उद्घोषक हरीश भिमानी, अभिनेता विष्णु शर्मा, भक्तकवि नारायण अग्रवाल, गायक उदित नारायण, पूर्व गृह राज्यमंत्री कृपाशंकर सिंह, पत्रकार अभिजीत राणे, आचार्य पवन त्रिपाठी और आशीर्वाद के चेयरमैन ब्रजमोहन अग्रवाल जैसे कई प्रतिष्ठित लोग शामिल थे।
डॉ उमाकांत बाजपेयी की सुपुत्रियों निरूपमा बाजपेई, नीता बाजपेई और संगीता बाजपेयी ने उपस्थित लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया।श्रद्धांजलि सभा का संचालन पत्रकार राजेश विक्रांत ने किया। उल्लेखनीय है कि मुंबई की प्रमुख साहित्यिक, सांस्कृतिक संस्था आशीर्वाद के संस्थापक, सुप्रसिद्ध हिन्दीसेवी डॉ उमाकांत बाजपेयी अपनी सांसारिक यात्रा पूर्ण कर गुरुवार 6 नवंबर 2025 को प्रभु चरणों में लीन हो गए थे।
डॉ. उमाकांत बाजपेयी का व्यक्तित्व बहुआयामी था।सन् 1969 से मुंबई में उन्होंने आशीर्वाद नाम की पत्रिका का प्रकाशन तथा सन् 1977 से ‘आशीर्वाद’ साहित्यिक, सांस्कृतिक व सामाजिक संस्था का शुभारंभ किया। देश-विदेश के हिन्दी सेवियों को पुरस्कृत व सम्मानित करने की उनकी यात्रा अनवरत जारी रही।
राजेश विक्रांत ने बताया कि डॉ उमाकांत बाजपेयी ने आशीर्वाद के पुरस्कृत एकांकी, मुंबई के हिन्दी कवि तथा मुंबई की हिन्दी कवयित्रियां पुस्तकों का संपादन किया। एक लेखक के रूप में उनके चार कहानी संग्रह प्रकाशित हैं- 1.एक था नर एक थी मादा, 2. एक सोने का मृग, 3.बैंड बाजा बुलेट और 4. जय राम जी की।
डॉ उमाकांत बाजपेई ने सन् 1974 एवं 1978 में अखिल भारतीय लेखक सम्मेलन का आयोजन किया। सन् 1978 से पच्चीस वर्षों तक लगातार आशीर्वाद फ़िल्म अवार्ड का आयोजन किया। सन् 1991 से हिन्दी के प्रचार-प्रसार हेतु आशीर्वाद राजभाषा पुरस्कार का शुभारंभ किया जो 33 वर्षों से जारी है। सन् 2012 में 24 घंटे चलने वाले अखंड कवि सम्मेलन का आयोजन किया। वर्ष 2019 में आशीर्वाद की स्वर्ण जयंती मनायी गयी जिसमें 50 विविध आयामी लोगों को पुरस्कृत किया गया।
डॉ उमाकांत बाजपेयी ने अपना पूरा जीवन हिन्दी का साथ, हिन्दी का विकास और हिन्दी पर विश्वास के लिए समर्पित किया था। वे एक कर्मठ हिन्दी सेवी के रुप में हमेशा याद किए जाएंगे।
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