Homeखबरें - दुनिया भर की4 दिसंबर को आसमान में दिखाई देगा सुपरमून

4 दिसंबर को आसमान में दिखाई देगा सुपरमून

इस माह की 4 तारीख को आसमान में अनूठी खगोलीय घटना सुपरमून के रूप में देखने को मिलेगी। सुपरमून तो असमान में प्राय: दिखाई देता है लेकिन इस बार ये खास इसलिए है क्योंकि यह आसमान में सबसे अधिक ऊंचाई पर होगा और ऐसा आने वाले 17 साल तक नहीं होगा। आसमान साफ होने पर उज्जैन की जीवाजी वेधशाला और डोंगला वेधशाला से भी देखा जा सकेगा।

सुपरमून का मतलब है पूर्णिमा के दिन चंद्रमा का पृथ्वी से सबसे करीब होना। दिसंबर 2025 का सुपरमून इस साल का अंतिम और बेहद खास चंद्र-दर्शन होने वाला है। वैज्ञानिक, धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से भी यह महत्वपूर्ण घटना है। यह साल 2025 की सबसे खास रातों में से एक होगी, जब चंद्रमा सबसे चमकीला, सबसे बड़ा और आकाश में सबसे ऊंचाई पर दिखाई देगा।

सुपरमून एक अद्भुत खगोलीय घटना है, जब पूर्णिमा की रात चंद्रमा सामान्य दिनों की तुलना में बड़ा और अधिक चमकीला दिखाई देता है। चंद्रमा पृथ्वी की परिक्रमा अंडाकार कक्षा में करता है और इसी कारण कभी वह पास आता है तो कभी दूर चला जाता है। जब चंद्रमा पृथ्वी के सबसे नजदीक होता है, तो उसे पेरिजी कहते हैं।

जब पूर्णिमा के दिन चंद्रमा पृथ्वी से सबसे करीब होता है, तो उसे विशेष ‘सुपरमून’ कहा जाता है। खगोलविदों के अनुसार 4 दिसंबर, 2025 को चंद्रमा आकाश में वर्ष की सबसे अधिक ऊंचाई पर दिखाई देगा। इतनी ऊंचाई पर दिखाई देने वाला चंद्रमा दोबारा 2042 से पहले नहीं दिखेगा। यह 2025 का अंतिम सुपरमून भी है।

कोल्ड मून भी कहते हैं, क्योंकि, दिसंबर में दिखाई देने वाली पूर्णिमा को दुनिया भर में ‘कोल्ड मून’ के नाम से भी जाना जाता है।  इसका कारण यह है कि दिसंबर का महीना उत्तरी गोलार्ध में अत्यधिक ठंड की शुरुआत का समय होता है।

इसी सर्द मौसम को दर्शाने के लिए प्राचीन मूल अमेरिकी मोहॉक जनजाति ने इसे ‘कोल्ड मून नाम दिया था। इसे लॉन्ग नाइट मून भी कहा जाता है क्योंकि यह पूर्णिमा अक्सर शीतकालीन संक्रांति के आसपास पड़ती है। 4 दिसंबर की सुबह 8.37 से 5 दिसंबर की शाम 4.43 बजे तक यह दृश्य देखा जा सकता है।

  • सुपरमून: यह तब होता है जब पूर्णिमा (full moon) चंद्रमा की पृथ्वी के सबसे निकटतम बिंदु, जिसे पेरिगी (perigee) कहा जाता है, के 90% के भीतर होती है। इस निकटता के कारण, चंद्रमा सामान्य से लगभग 14% बड़ा और 30% अधिक चमकीला दिखाई देता है।
  • कोल्ड मून: दिसंबर की पूर्णिमा को पारंपरिक रूप से उत्तरी गोलार्ध में सर्दियों की शुरुआत के साथ मेल खाने के कारण “कोल्ड मून” (Cold Moon) कहा जाता है।
  • दुर्लभक्षण यह 2025 के लगातार चार सुपरमून की श्रृंखला का अंतिम सुपरमून है। इसके अलावा, यह एक दुर्लभ खगोलीय घटना ‘मेजर लूनर स्टैंडस्टिल’ (Major Lunar Standstill) के दौरान पड़ रहा है, जिससे यह 2042 तक फिर से इतना ऊंचा और चमकीला नहीं दिखाई देगा।
इसे कब और कैसे देखें
  • कब: सुपरमून 4 दिसंबर, 2025 को अपने चरम पर होगा, लेकिन यह बुधवार (3 दिसंबर) की रात से लेकर शुक्रवार (5 दिसंबर) की रात तक पूर्ण रूप से दिखाई देगा, जिससे आपके पास इसे देखने के कई अवसर होंगे।
  • कैसे: इसे देखने के लिए किसी विशेष उपकरण की आवश्यकता नहीं है; आप इसे नंगी आँखों से देख सकते हैं। सूर्यास्त के तुरंत बाद पूर्वी क्षितिज पर देखें, जब चंद्रमा ऊपर उठ रहा होता है, क्योंकि उस समय “मून इल्यूजन” (moon illusion) नामक प्रभाव के कारण यह सबसे बड़ा दिखाई देता है।
यह घटना वर्ष का एक शानदार खगोलीय समापन है और यह चिंतन (reflection) और नवीनीकरण (renewal) की अवधि का भी प्रतीक है, क्योंकि वर्ष समाप्त हो रहा है। यह उन खगोल विज्ञान प्रेमियों और फोटोग्राफरों के लिए एक अंतिम और विशेष अवसर है जो चमकीले और बड़े चंद्रमा को देखना चाहते हैं।
spot_img
RELATED ARTICLES
- Advertisment -spot_img

लोकप्रिय

उपभोक्ता मंच

- Advertisment -

वार त्यौहार