“थिएटर में बेतहाशा भीड़ लगी थी। कई हफ्तों तक के टिकट्स बुक हो गए थे। लोग टिकट खरीदने के लिए बेताब थे। लेकिन टिकट मिल ही नहीं पा रहे थे। नतीजा, लोगों ने उत्पात मचाना शुरू कर दिया। ऐसे में बेकाबू हो चुकी भीड़ को काबू में करने के लिए पुलिस की मदद लेनी पड़ी।” फिल्म हिस्टोरियन बी.डी.गर्ग ने अपनी किताब “आर्ट ऑफ सिनेमा” में आलम आरा की रिलीज़ का ज़िक्र करते हुए लिखा।
भारत की पहली साउंड फिल्म आलम आरा, जो साल 1931 में रिलीज़ हुई थी, उसने भारतीय सिनेमा और भारत, दोनों को हमेशा के लिए बदल दिया। और एक इंसान जो इस पूरे बदलाव का अगुआ, या कहना चाहिए कि सूत्रधार बना, वो थे अर्देशिर ईरानी। आज अर्देशिर ईरानी जी का जन्मदिन है। 5 दिसंबर 1886 को एक पारसी परिवार में अर्देशिर ईरानी का जन्म हुआ था। वो कभी स्कूल टीचर हुआ करते थे। केरोसीन इंस्पैक्टर के तौर पर भी उन्होंने काम किया था।
लेकिन वो जीवन में कुछ अलग, कुछ बड़ा करना चाहते थे। इसलिए जे.जे.आर्ट्स स्कूल से उन्होंने ग्रेजुएशन किया। इसके बाद वो अपने पिता के फोनोग्राफिर इक्विपमेंट्स और म्यूज़िक इंस्ट्रूमेंट्स के बिजनेस में हाथ बंटाने लगे। इसी दौरान ही उन्हें फिल्म बिजनेस से जुड़ने का आईडिया आया।
इसलिए अपने दोस्त और बिजनेसमैन अब्दुल अली ईसुफअली के साथ मिलकर अर्देशिर ईरानी ने “टैंट सिनेमा” के ज़रिए फिल्में दिखाने का काम शुरू किया। उस ज़माने में हर जगह आज के जैसे सिनेमाहॉल्स नहीं हुआ करते थे। तब बहुत से लोग टैंट में प्रोजेक्टर लगाकर पब्लिक से पैसे लेकर उन्हें फिल्म दिखाते थे।
टैंट सिनेमा के बिजनेस में अर्देशिर ईरानी को कामयाबी मिली। उनकी जान-पहचान का दायरा बढ़ा। और साल 1905 में वो “यूनिवर्सल स्टूडियोज़” के भारत के प्रतिनिधि बन गए। 1914 में अर्देशिर ईरानी ने ईसुफअली के साथ मिलकर मुंबई का एलेक्ज़ेंडर थिएटर खरीद लिया। साल 1920 में उन्होंने भोगीलाल दवे के साथ मिलकर अपनी पहली प्रोडक्शन कंपनी “स्टार फिल्म्स लिमिटेड” की स्थापना की।
भोगीलाल दवे अमेरिका के “न्यूयॉर्क स्कूल ऑफ फोटोग्राफी” से ग्रेजुएशन करके लौटे थे। उनके साथ मिलकर अर्देशिर ईरानी ने अपनी पहली फिल्म “वीर अभिमन्यू” का निर्माण किया। 1922 में रिलीज़ हुई ये साइलेंट फिल्म अर्देशिर ईरानी की डायरेक्टोरियल डेब्यू थी। इस फिल्म में लीड हीरोइन थी एक्ट्रेस फातिमा बेगम। ये वही फातिमा हैं जिनकी बेटी ज़ुबैदा ने आगे चलकर अर्देशिर ईरानी द्वारा निर्मित भारत की पहली टॉकी फिल्म आलम आरा में काम किया था।
लगभग 15 साइलेंट फिल्मों का निर्माण करने के बाद अर्देशिर ईरानी “स्टार फिल्म्स लिमिटेड” से अलग हो गए और उन्होंने “रॉयल आर्ट स्टूडियो” की स्थापना की। इस नई फिल्म कंपनी के बैनर तले भी उन्होंने कुछ फिल्मों का निर्माण किया। आखिरकार 1926 में उन्होंने स्थापित किया “इम्पीरियल फिल्म्स।”
यही वो बैनर था जिसके अंडर में उन्होंने भारत की पहली टॉकी फिल्म “आलम आरा” का निर्माण किया था। आलम आरा बनाने की प्रेरणा अर्देशिर ईरानी को मिली थी “शो बोट” नाम की एक अमेरिकन फिल्म देखकर जो 40 प्रतिशत टॉकी थी। वो फिल्म अर्देशिर ईरानी ने 1930 में मुंबई के “एक्सेलसियर सिनेमा” में देखी थी।
उस ज़माने में भारतीय बाज़ार में साइलेंट फिल्मों का ही दबदबा था। उस वक्त अमेरिका में बनी टॉकी फिल्में ही अवेलेबल होती थी। मगर जब अर्देशिर ईरानी ने “आलम आरा” बनाई तो दौर पूरी तरह से बदल गया। “आलम आरा” में ही पहला फिल्मी गीत था जिसे “वज़ीर मोहम्मद खान” ने गाया था। उन्होंने एक अहम किरदार भी “आलम आरा” में निभाया था।
इम्पीरियल फिल्म कंपनी जिस जगह मौजूद थी वहां पास ही एक रेलवे ट्रैक था। दिन भर वहां से रेलगाड़ियों का आना-जाना लगा रहता था। इसलिए एक साउंड फिल्म को वहां बनाना बड़ा चुनौतीपूर्ण कार्य था। ऐसे में अर्देशिर ईरानी ने फैसला किया कि वो रात में शूटिंग करेंगे। इस तरह रात के एक बजे से लेकर सुबह तीन बजे तक आलम आरा की शूटिंग की जाती थी।
यानि मात्र तीन घंटे की ही शूटिंग हो पाती थी। यही वजह है कि इस फिल्म को कंप्लीट करने में बहुत वक्त लग गया था। उस ज़माने में ये फिल्म बनाने में चालीस हज़ार रुपए खर्च हुए थे। लेकिन जब ये फिल्म मैजेस्टिक सिनेमा हॉल में रिलीज़ हुई तो लोग इसे देखने के लिए लोग टूट पड़े। फिल्म ने बहुत शानदार बिजनेस किया। कुल 29 लाख रुपए का कलैक्शन इस फिल्म ने किया था।
साल 1934 में अर्देशिर ईरानी ने पहली पर्शियन टॉकी फिल्म भी बनाई थी जिसका नाम था “द लोर गर्ल।” ये फिल्म भी खूब चली थी। उस ज़माने में ईरान में भी इस फिल्म को प्रदर्शित किया गया था। और वहां भी “द लोर गर्ल” को बहुत पसंद किया गया था। 14 अक्टूबर को साल 1969 में 82 साल की उम्र में अर्देशिर ईरानी जी का निधन हो गया था। आर्देशिर ईरानी जी को किस्सा टीवी का सैल्यूट। बिग सैल्यूट।
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