सुशासन निर्णय लेने की प्रक्रिया है एवं वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा विकासात्मक लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए आवश्यक निर्णयों को क्रियान्वित किया जाता है। विश्व बैंक की प्रतिवेदन ‘ शासन एवं विकास 1992 ‘ के अनुसार, सुशासन वह तरीका है जिसमें सर्वांगीण विकास के लिए देश के आर्थिक एवं सामाजिक संसाधनों का अनुप्रयोग किया जाता है।
भारत में सुशासन का उपयोगिता है कि सार्वजनिक सेवा वितरण प्रणाली (पीडीएस ) उत्कृष्टता के शिखर पर पहुंची है, इसके साथ ही सरकारी योजनाओं एवं आधारभूत परियोजनाओं के क्रियान्वयन में ‘ आदर्श’ बदलाव आया है । सुशासन के द्वारा सरकार ने विभिन्न उपेक्षित समूहों(वंचित वर्गों ) के लिए अपरिवर्तनीय सशक्तिकरण सुनिश्चित किया हैं, जिससे उन्हें सामाजिक सुरक्षा कवच प्रदान करके ‘ आत्मनिर्भर’ बनने में मदद मिला है। लोक कल्याणकारी योजनाओं के बड़े पैमानों पर सविस्तार ने शत – प्रतिशत परिपूर्णता( सैचुरेशन) की ओर अग्रसर है। सुशासन में सभी वर्गों के लिए परिपूर्णता आच्छादन (शत- प्रतिशत सैचुरेशन) के भेदभाव एवं भ्रष्टाचार को समाप्त करने में सहयोग किया है।
सुशासन की समावेशी राजनीति से भारत वृहद लोकतंत्र के साथ-साथ वैश्विक स्तर का ‘ सबसे बड़ा लोकतंत्र’ बन सका है। सुशासन ने भारतीय संस्कृति, संवैधानिक मूल्यों एवं आदर्शों को उचित आयाम दिया है,एवं वैश्विक स्तर पर भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का उन्नयन किया है। भारत अपने कार्यदायी व शासकीय क्षमता से वैश्विक स्तर का “नेता “हो चुका है। वर्तमान में वैश्विक स्तर के ‘ विकासशील राष्ट्र राज्य ‘ (3A , एशिया ,अफ्रीका, अमेरिका (लातिनी),जो पूंजी,अर्थव्यवस्था, भूमंडलीय तापन के प्रबंधन में एवं प्रौद्योगिकी में विकसित नहीं है। वो समस्याओं के समाधान के लिए भारत की तरफ देख रहे हैं।” हम कहीं पर भी हों ,किसी भी छाते के नीचे काम करते हों, लेकिन अंतत: हम सब देश के लिए काम करते हैं! देश के उज्जवल भविष्य के लिए काम करते हैं!, और इसलिए हम जो मेहनत करते हैं। क्या वह सुशासन के लिए काम आ सकती है ? कार्य क्षमता के लिए काम आ सकता है क्या?”
सुशासन की उपादेयता है कि जन धन योजना, आधार एवं प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण ने करोड़ों लोगों को वित्तीय प्रणाली से जोड़ा एवं भ्रष्टाचार रूपी बीमारी पर अंकुश लगाया। 28 अगस्त, 2025 तक वित्तीय समावेशन योजना प्रधानमंत्री जनधन योजना (PMJDY ) के तहत 56 करोड़ से अधिक बैंक खातें खोले गए हैं, जिनमें कुल जमा राशि 2.68 लाख करोड रुपए हैं।उज्ज्वला योजना के अंतर्गत 11 करोड़ से अधिक मुफ्त कनेक्शन दिए गए हैं। आयुष्मान योजना के अंतर्गत लगभग 56 करोड़ से अधिक लोगों को ‘ स्वास्थ्य बीमा ‘ की सुरक्षा मिली हैं । इन तथ्यों से स्पष्ट हो रहा है कि सुशासन से भारत “विकसित भारत @ 20047” की प्राप्ति के लिए अग्रसर है।
भारत का दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के करीब पहुंचना आर्थिक उपलब्धि के साथ उज्जवल भविष्य की दिशा में मजबूत कदम है। यह भविष्य की शक्ति का उद्घोष है। वर्तमान में दुनिया भारत को राजनीतिक स्थिरता, सुअवसर एवं नवाचार के केंद्र के रूप में देख रही हैं ,जिससे निवेशकों की संख्या बढ़ रही हैं। वैश्विक विश्लेषकों का मानना है कि भारत 2027 तक जर्मनी को पीछे छोड़ते हुए ‘ तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था’ बन सकता है। यह महान यात्रा 140 करोड़ों लोगों की लोकाकांक्षा है।
सुशासन जवाबदेही,पारदर्शिता, सामान वितरण एवं सहभागिता के अव्यय पर आधारित हैं ।बैंक सुविधा, शौचालय, एलपीजी सिलेंडर, नल से जल, बिजली कनेक्शन एवं बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं को सभी लोगों को मिलें। सुशासन के उपादेयता के द्वारा यह सभी बुनियादी सुविधाएं सभी भारतीयों तक पहुंच रहे हैं। योजनाओं का लाभ हर हकदार को मिलें न कि जाति, धर्म ,लिंग, क्षेत्र ,राजनीतिक जुड़ाव के आधार पर सुशासन के द्वारा योजनाओं की परिपूर्णता शत – प्रतिशत लोगों को मिल रही है। मूलभूत सुविधाओं का परिपूर्णता ( सैचुरेशन) सभी को शत – प्रतिशत प्राप्त होना सामान वितरण के सिद्धांत का आदर्श है। सार्वजनिक सेवाओं का लाभ लोगों तक पहुंचने में होने वाले लीकेज ( रिसाव) को रोकने में सफलता सुशासन का देन है। कल्याणकारी योजनाओं के द्वारा एवं गरीबी उन्मूलन के प्रयासों पर दुनिया भर के संस्थानों ने भी स्वीकारोक्ति की है। आईएमएफ के शोध पत्र में देश से अत्यधिक गरीबी को समाप्त करने का श्रेय सरकार के पारदर्शी नीतियों के कारण ही हो सका है।
भारत में सुशासन की मजबूती में भ्रष्टाचार ,सरकारी योजनाओं में लीकेज ( रिसाव), नौकरशाही का लालफीताशाही , जवाबदेही की कमी, पारदर्शिता का अभाव, विधियों का सही क्रियान्वयन ना होना, निर्णयों में राजनीतिक हस्तक्षेप, राष्ट्रीय विषयों पर राजनीतिक दलों में मतभेद एवं मनभेद, नागरिक समाज का सशक्त ना होना, न्यायपालिका पर मुकदमों का अत्यधिक बोझ एवं नौकरशाही का जनता से ‘ मित्रवत व्यवहार ‘ की कमी होना है।
भारत में सुशासन के मजबूती के लिए सुझाव –
1. सरकारी योजनाओं के वितरण में पारदर्शिता का उन्नयन हों;
2. अस्थाई कार्यपालिका (मंत्री परिषद) एवं स्थायी कार्यपालिका ( नौकरशाही) में बेहतर समन्वय हों,जिससे जनता के प्रति जिम्मेदारी एवं जवाबदेही बढ़ सकें;
3. शत – प्रतिशत डिजिटलीकरण हों, जिससे योजनाओं में होने वाले रिसाव ( लीकेज) को समाप्त किया जा सकें;
4. मजबूत नागरिक समाज को बढ़ाने के लिए “वर्कशॉप” एवं “प्रशिक्षण कार्यक्रम” को किया जाएं;एवं
5. लोगों की सक्रिय सहभागिता का उन्नयन किया जा सकें, जिससे वह अपने’ हक’ के लिए सजग रहे।
(सामयिक विषयों, इतिहास एवं राष्ट्रीय घटनाओं के विश्लेषण व सामाजिक विचारक हैं)

