रग – रग में बसे राष्ट्रवाद और देश प्रेम को केंद्र में रख कर आम जन को उद्वेलित करने वाली रचनाकार स्नेहलता शर्मा का जन्म मध्यप्रदेश के इंदौर में 4 अगस्त 1967 को पिता स्व. गोपाल कृष्ण एवं माता स्व. सीता रानी के परिवार में हुआ। ये ढ़ाई वर्ष की रही होंगी तब इनके पिता इन्दौर से कोटा पत्थर का व्यवसाय करने के लिए आ गए और यहीं बस गए। स्वयंपाठी छात्रा के रूप में आपने अर्थशास्त्र, राजनीति विज्ञान, अंग्रेजी में स्नातकोत्तर एवं एम.एड. की शिक्षा प्राप्त की है। आपने बाराँ जिले में अध्यापिका के साथ शिक्षा विभाग में राजकीय सेवा शुरू की। वर्ष 1994 में राजस्थान लोक सेवा आयोग से व्याख्याता अंग्रेजी पद पर चयनित होकर चेचट में लगभग दो वर्ष रहीं। इसी दौरान अगस्त 1995 में पीयूष शर्मा से विवाह हो गया। साहित्यिक अभिरुचि के साथ – साथ मंच संचालन, एंकरिंग, रंगमंच और टीवी सीरियलों में अभिनय और नाट्य लेखन में भी आपकी विशेष रुचि है। कोटा आकाशवाणी से लंबे अरसे तक जुड़े रहकर महिला जगत तथा बाल संसार के लिए कार्यक्रमों में एंकरिंग भी की। सीमा कपूर के निर्देशन में दूरदर्शन पर प्रसारित ‘एकलव्य’ सीरियल में आपकी भूमिका रही।
देश प्रेम, देश की माटी से प्यार, देश पर बलिदान होने वाले वीर सपूत, स्वतंत्रता सेनानियों के किरदारों पर लिख कर राष्ट्रवाद से प्रेरित काव्य सृजन के साथ-साथ विभिन्न विषयों और जीवन के मीठे-कड़वे अनुभवों एवं अनुभूतियों को सहेजते समेटते हुए भावनाओं को कागज़ पर उकेर कविता लिखने में सिद्धहस्त रचनाकार स्नेहलता शर्मा ने साहित्य के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है। यह कहें कि कविता लेखन इनकी अभिरुचि ही नही इनके दिल की धड़कन है तो अतिशयोक्ति नहीं होगी।
आपने विद्यार्थी जीवन से ही कविता लिखना तथा विद्यालय में विशेष अवसरों पर स्वरचित कविता सुनाना इनकी हॉबी बन गया। विद्यालय और महाविद्यालय की पत्र-पत्रिकाओं में निबंध, कहानी, एकांकी, कविता आदि प्रकाशित होने से इनके हौसले को पंख लग गए। शिक्षकों और साथियों का लगातार प्रोत्साहन मिलने से लेखनी में निखार आता गया। इनके लेखन की मुख्य विधा कविता ही रही, यदा-कदा कहानी, निबंध, शोध-पत्र भी लिखती हैं। मुख्यतः हिंदी भाषा ही लेखन और अभिव्यक्ति का माध्यम बनी परंतु कभी-कभी कुछ कविताएँ, एकांकी व शोध-पत्र अंग्रेज़ी भाषा में भी लिखे हैं। इनकी रचनाएँ अधिकांशतः छंद मुक्त हैं। कुछ रचनाएँ गजलें, नज्में, व गीत शैली में लिखे हैं जिनमें उर्दू व हिंदी दोनों भाषाओं के शब्दों का प्रयोग किया गया है। समाज को विविध प्रकार से सावचेत करने वाली लगभग 200 कविताओं का सृजन कर चुकी हैं।
ये अमृता प्रीतम, शिवानी, अजीज आजाद, मुंशी प्रेमचंद, नीरज, हरिशंकर परसाई आदि से प्रभावित हैं, जिनका समकालीन लेखन आज भी प्रासंगिक है। इनका मानना है कि लेखन की कोई भी विधा हो, साहित्यकार को ऐसी रचनाओं का सृजन करना चाहिए जो समाज को एक दिशा दे, मंथन और चिंतन के विषय दे जिन पर सभी अपनी सकारात्मक अभिव्यक्ति दे सकें। इसकी बानगी हाल ही में प्रकाशित इनके काव्य संग्रह, ‘सुनो, पत्थरों के भीतर नदी बहती है’ है। इसके अतिरिक्त कुछ आधा दर्जन साझा संकलनों व पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित इनकी कविताएँ हैं। इन्होंने इनके स्वर्गीय ससुर शिवप्रसाद शर्मा के काव्य संकलन ‘आस्था का दीप’ का संपादन भी इन्होंने किया है।
अनुभव के संग कविताओं के रंग, साफ झलकते हैं इनके सृजन में। कहती हैं, ” कोटा को स्टोन सीटी के नाम से पहचान मिलने से, यहीं पढ़ी लिखी होने से मन में पत्थर की छवि समा गई और कविताओं में पत्थर शब्द का प्रयोग कई बार हुआ है। इसीलिए पुस्तक का नामकरण भी सुनो.पत्थरों के भीतर नदी बहती है रख दिया।”
इनकी रचनाओं में प्रतीक्षा, परीक्षा, जीवन-दर्शन, मंथन, अध्यात्म की भक्ति धारा, वीर रस , शृंगार, प्रकृति, प्रेम एवं विविध अनुभूतियों के साथ भावनाओं की बहती अविरल धारा बहती दिखाई देती है। रचनाओं में एहसास है, जज्बात है, बच्चों की कोमल भावनाएं हैं, माँ के वेदना है, कलियां हैं, प्रतीक्षा है, रिश्ते नाते भी हैं और प्रेम का सागर हिलोरे लेता दिखाई देता है। कर्मवाद के सिद्धांत पर आधारित रचनाएं सीख देती हैं भाग्य, हाथ की रेखाओं से नहीं कर्म करने से बनता है अर्थात पुरुषार्थ ही महत्वपूर्ण है। रचनाओं में सच्च के इकबाल को बुलंद किया गया है। बच्चों के कोमल मन, उनकी हँसी, बाल हट, रुदन, भोलापन आदि को लेकर उनकी बाल रचनाएं हैं। इनका सृजन आशा के दीप जलता है कि समाज की विद्रूपताओं और विषमताओं के बीच भी उनकी लेखनी अपनी धार कभी नहीं खोएगी और शब्दों के वार से इसमें बदलाव की कोशिश जारी रहेगी। रंगीतिका संस्था के माध्यम से साहित्य सेवा कर रही हैं । वर्तमान में आप कोटा शहर की मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी पद पर सेवारत हैं और साहित्य सृजन में लगी हैं।
(संपर्क मकान न. 2, महावीर नगर विस्तार योजना, 6 सेक्टर के सामने, सुभाष सर्किल के पास, कोटा, राज.
मो: 9602943772 )

डॉ. प्रभात कुमार सिंघल
लेखक एवं पत्रकार, कोटा

