आज पुस्तक मेला लगा हुआ था तो अर्चना दी का कल फ़ोन आया कि आयुषी कल पुस्तक मेले में चल रही है क्या तो हमने भी हां कर दी।
वहां एक विशेष मजहब वालों के स्टाल पे जाना हुआ जो वहां गए होंगे उन्होंने देखा होगा कि एक स्टाल पर लोग कुरान और वेदों की शिक्षा को एक बता रहे हैं और ईश्वर अल्लाह एक है ऐसा भी बता रहे हैं और आवाज दे देकर बुला रहे हैं कि आइये
सुनिए ….
सो हम दोनों भी उधर ही हो लिए की कम से कम देख तो लें हीं….
हुआ यूं कि दो-तीन छोरी मुंह पर कपड़ा ढके समझा रही थी तो उसने हमको बुलाया आइये आप भी तो हम भी खड़े हो गए कई बहनें पहले भी खड़ी थी, तो उसने शुरू किया इस्लाम और वेद तो एक हैं और ये राम,कृष्ण, पैगम्बर साहब सब ईश्वर ने भेजे थे और जेहाद का अर्थ बताया कि किसी भी उद्देश्य के लिए पुरूषार्थ करना औऱ मुस्लिम का अर्थ है जो ईश्वर के कार्य के लिए स्वयं को समर्पित कर दे और ये ईश्वर, अल्लाह सब एक हैं इनमें कोई भेद नहीं है जब वो स्वयं नहीं लड़ते तो हम क्यों लड़े और उसने बताया कि आज तो हिन्दू लोग संस्कृत नहीं पढ़ते…. वेद नहीं पढ़ते .गीता नहीं पढ़ते……और बोली गीता,बाइबिल सब एक हैं. वेद मनु ने बनाये, मनुस्मृति मनु ने बनाई….. जैसे आप लोग हिन्दू हो तो आप लोगों को भी संस्कृत नहीं आती…… आपने भी वेद के ब्रह्म सूत्र नहीं पढ़े होंगे……
फिर जब बहुत देर हो गई और सुना नहीं गया कुछ घणा ही हो गया तो मैंने कहा मान लीजिए आपकी इस बात से मैं सहमत हूँ कि कुरान और वेद एक है लेकिन एक बात बताओ पाकिस्तान में कुरान मानने वाले ज्यादा हैं या हिंदुस्तान में ? तो बोली पाकिस्तान में तो फिर मैंने पूछा आपके 57 देश हैं मतलब इस्लाम वालों के 57 देश हैं…. सब कुरान को मानते हैं या नहीं? तो बोली कुरान मानते हैं तो मैंने कहा ये बताइये पाकिस्तान, अफगानिस्तान, इराक़,ईरान जितने भी मुस्लिम देश हैं एक में भी शांति है? तो बोली वो कुरान पढ़ ही नहीं पाते….
फिर मैंने कहा कसाब ने क्या पढ़ा?
बुरहान वानी ने क्या पढ़ा?
लादेन ने क्या पढ़ा?
बगदादी ने क्या पढ़ा?
अलकायदा वालों ने क्या पढ़ा?
अफजल गुरु ने क्या पढ़ा?
लादेन ने क्या पढ़ा?
तो कह री उन सबने कुरान को समझा ही नहीं…… आपको उन्हें कुरान के बारे में बताना चाहिए मैंने कहा जब वो हमको मारने आएगा तो क्या हम कहेंगे रूक भाई पहले कुरान पढ़ 

कैसी बात करती हो?? वहां खड़े सब लोग हसने लगे……….फिर कहने लगी वो लोग अशिक्षित हैं पढ़ते नहीं हैं कुरान को….. उन्होंने कुरान की शिक्षा को माना ही नहीं है…..
रोजगार के लिए हथियार उठाते हैं फिर मैंने वहां खड़ी बहनों की औऱ इशारा करके कहा कि मैंने मान लिया कि इन बहनों ने संस्कृत नहीं पढ़ी,ये वेद और गीता को नहीं जानती लेकिन ये कसाब की तरह हथियार भी तो नहीं उठाती……..और अभी आप कह रही थी कि जो कुरान को पढ़ने वाला मुस्लिम है वो दूसरे के दर्द से आहत होता है तो ये बहनें जो यहां हैं और हिन्दू हैं ये कुरान नहीं जानती लेकिन जब पेशावर में कुरान के मानने वालों ने बम फोड़े तो पूछो इनकी आंखों में आंसू थे कि नहीं तो
उन सबने कहा हां हम भी दुखी थे….



तो मैंने उस मुस्लिम लड़की से कहा ये सब उदाहरण चीख चीखकर कहते हैं कि वेद शांति का संदेश देते हैं और कुरान जो देती है उसको तो सारी दुनिया जानती है…….
फिर मुझे कह रही कि आपने संस्कृत और वेद पढ़े होते तो आप
कुरान को अलग ही नहीं मानती फिर आप स्वयं कहती कि वेद
औऱ कुरान एक है मैंने कहा सुन बहना तू पूछ वेदों के बारे में क्या पूछना है?
मैंने वेद पढ़े हैं और मुझे संस्कृत अच्छे से आती है……. इसलिये मुझे समझ में आता है की आपका मूल उद्देश्य क्या है.. और मैंने
कहा थोड़ा ज्ञान दुरुस्त कर बहिना मनु ने वेद नहीं मनुस्मृति लिखी है……. खूब लंबी बहस चली एक दो मुस्लिम भी sry करके बोलने आये फिर वो जितनी हिन्दू बहनें खड़ी थी वो सब समझ गई ये अब फंस गए तो हसते हुए चलने लगी फिर इतना अर्चना दी ने उन मुस्लिम लड़कियों से बात की इतना मैं उन हिन्दू बहनों के पीछे गई तो वो हंसने लगी मैंने कहा बावला बना रही थी बहुत तेज हैं ये अपनी बुराई न बताती……आपको फंसा रही थी…..फिर वो हंसते हुए कहने लगी आप लोगों ने बढिया कर दिया…. बेज्जती कर दी तगड़े से…..फिर एक और उन्हीं में से एक किताब लेके आई आप ये पढ़ो इसमें सब है…. फलाना ढिकाना….. लेकिन एक बात है एक बार को वें घूम तो गए ही थे





बात बहुत करनी थी लेकिन उनकी शक्ल देखकर
हंसी रोक नहीं पाई मैं और निकल ली







सब मुस्लिमों ने हाथ मिलाकर इज्जत के साथ विदा किया बात तो बहुत हुई लेकिन याद इतना सा ही रह गया…..
कहने का मतलब ये ही है अपने बच्चों को वेदों के बारे में बताओ हिंदुओं , संस्कृत कम से कम इतनी तो पढ़ाओ ही कि कोई चलता फिरता यूँ ही न फुसला ले वर्ना वो दिन दूर नहीं ki ये हमारे वालों को अपना बना लेंगे….. वो तो हम थोड़ा जानते थे तो अड़ गए वर्ना जितनी वहां हिंदू बहनें खड़ी थी वो तो पूर्ण प्रसन्न हो रही थी।
यही है इनका तरीका मीठा जहर बनकर अंदर घुस जाते हैं और
धर्मांतरण कराते हैं और हम केवल अपने परिवार को भी नहीं संभाल पा रहे कुछ भी हो लेकिन भयावह था। अगर यही रहा तो स्थिति अच्छी नहीं है। लव जेहाद कैसे कर जाते हैं उनके बीच जाओगे तो समझ पाओगे….. स्थिति जितना समझते हैं उससे ज्यादा भयावह है…….
एक पाठिका द्वारा भेजा गया संस्मरण
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