पुस्तक विमोचन पर उपराष्ट्रपति ने कहा, भारत एक रहा है और हमेशा एक रहेगा
अच्छा समाज बनाने के लिए व्यक्तिगत प्रयासों को पहचानना ज़रूरी है: उपराष्ट्रपति
प्रत्येक व्यक्ति का समाज को कुछ लौटाने का कर्तव्य है: उपराष्ट्रपति
उपराष्ट्रपति, श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने जाने-माने सर्जन डॉ. सी. पलानीवेलु की आत्मकथा ‘पलानीवेलु गट्ज़’ के हिंदी संस्करण का विमोचन किया और इस किताब को साहस, लगन और मेडिसिन के क्षेत्र में नैतिक नवोन्मेष का एक प्रेरणादायक उदाहरण बताया।
भारत में लेप्रोस्कोपिक सर्जरी के शुरुआती दिनों को याद करते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि 1990 के दशक की शुरुआत में डॉ. पलानीवेलु उन शुरूआती लोगों में से थे जिन्होंने इसकी क्षमता को पहचाना, तब भी जब इस तकनीक पर संदेह किया जा रहा था। उन्होंने कहा कि डॉ. पलानीवेलु ने 1991 में कोयंबटूर में लेप्रोस्कोपिक सर्जरी शुरू की, और दक्षिण भारत में ऐसा पहला केन्द्र स्थापित किया।
किताब के शीर्षक, ‘पालनिवेलु गट्स‘ का ज़िक्र करते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह आत्मकथा सिर्फ़ एक सफल सर्जन की कहानी नहीं है, बल्कि एक ऐसे युवा की यात्रा है जिसने साधारण शुरुआत से लेकर अनुशासन, कड़ी मेहनत और नैतिक विश्वास के ज़रिए मुश्किलों और असफलताओं का मुकाबला किया। उन्होंने आगे कहा कि जब तक व्यक्तियों के ईमानदार प्रयासों और अनुकरणीय योगदान को पहचाना और सराहा नहीं जाता, तब तक एक अच्छा समाज नहीं बनाया जा सकता।
भारत की विविधता पर विचार करते हुए, उपराष्ट्रपति ने टिप्पणी की कि इतनी विविधताओं के बावजूद, भारत एक रहा है और साझा मूल्यों और सामूहिक आकांक्षाओं से बंधा हुआ हमेशा एक रहेगा। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि हिंदी संस्करण का विमोचन विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह समाज के एक बड़े वर्ग, विशेष रूप से हिंदी पढ़ने वालों को, इस उल्लेखनीय जीवन यात्रा तक पहुँचने और उससे प्रेरणा लेने में सक्षम बनाएगा।
डॉ. पलानीवेलु के अपने शिक्षकों और गुरुओं के प्रति गहरे सम्मान की सराहना करते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि उनके नाम पर पुरस्कार शुरू करने की उनकी प्रथा भारत की “गुरुओं” के प्रति श्रद्धा की सदियों पुरानी परंपरा को दर्शाती है और उत्कृष्टता की खोज में विनम्रता और कृतज्ञता के महत्व को रेखांकित करती है।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि समाज हर व्यक्ति को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और समाज को वापस देना हर व्यक्ति का कर्तव्य है। दूरदराज के इलाकों में सर्जनों को प्रशिक्षित करने और लागत प्रभावी सर्जिकल तकनीकों को विकसित करने के डॉ. पलानीवेलु के प्रयासों की सराहना करते हुए, उन्होंने कहा कि इन पहलों ने सामाजिक-आर्थिक समूहों में उन्नत चिकित्सा देखभाल तक पहुंच का काफी विस्तार किया है।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ‘पलानीवेलु गट्स‘ पीढ़ियों को बड़े सपने देखने, ईमानदारी से काम करने और निस्वार्थ भाव से समाज की सेवा करने के लिए प्रेरित करेगा।
इस कार्यक्रम में रेल राज्य मंत्री, श्री रवनीत सिंह; नेशनल मेडिकल कमीशन के चेयरमैन, डॉ. अभिजात सेठ; इंटर-यूनिवर्सिटी सेंटर फॉर टीचर एजुकेशन के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के चेयरमैन, प्रो. डॉ. जे. एस. राजपूत; और जीईएम हॉस्पिटल ग्रुप के सीनियर प्रतिनिधियों सहित कई लोग शामिल हुए।

