पुणे। पुणे के अजिंक्य डी. वाय. पाटिल विश्वविद्यालय के दसवें दीक्षांत समारोह के अवसर पर उज्जैन के प्रख्यात आध्यात्मिक मार्गदर्शक गुरुजी श्री प्रमोद कुमार शर्मा को प्रतिष्ठित डॉक्टरेट ऑफ लिटरेचर (डी.लिट.) – डी.लिट. (ऑनोरिस कॉज़ा) से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें उनकी आध्यात्मिक साधना, मार्गदर्शन और निःस्वार्थ सेवाओं के लिए प्रदान किया गया, जो वे अपनी दृष्टि-शक्ति और दिव्य अंतर्दृष्टि के माध्यम से निरंतर देते आ रहे हैं। उनके मार्गदर्शन से अनेक वैज्ञानिकों, चिकित्सा विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं को अपने-अपने क्षेत्रों में श्रेष्ठ मार्ग चुनने और बेहतर परिणाम प्राप्त करने में सहायता मिली है। वे जरूरतमंद और वंचित वर्गों की समय पर आर्थिक व अन्य प्रकार की सहायता के लिए भी व्यापक रूप से जाने जाते हैं।
दीक्षांत समारोह के दौरान जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान, उपलब्धियों और समाजसेवा के लिए अन्य विशिष्ट व्यक्तित्वों को भी मानद उपाधियों से सम्मानित किया गया।
अन्य सम्मानित व्यक्तित्वों में शामिल थे: श्रीमती पंकजा गोपीनाथ मुंडे, प्रसिद्ध जननेता, भारत सरकार की पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं महाराष्ट्र की पूर्व उपमुख्यमंत्री, जिन्हें कृषि एवं पशुपालन के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया। अपने धन्यवाद भाषण में उन्होंने विद्यार्थियों को जोखिम लेने और असफलताओं से न डरने की प्रेरणा दी, यह कहते हुए कि सफलता और असफलता जीवन के अभिन्न अंग हैं और दोनों को समान भाव से स्वीकार करना चाहिए।
श्री रोहित शर्मा, विश्व कप विजेता भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान, जिन्हें क्रिकेट के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया। उन्होंने विद्यार्थियों को अनुशासित और परिश्रमी बनने का संदेश दिया, यह बताते हुए कि ये दोनों सिद्धांत शिक्षा और खेल, दोनों में समान रूप से लागू होते हैं।
श्री मनोज पोचाट, गोल्डियम इंटरनेशनल लिमिटेड के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन, जो देश में बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन के मिशन पर कार्य कर रहे हैं।
श्री सुधेश अग्रवाल, गुरुग्राम में 5 अरब रुपये के निवेश से विकसित हो रहे सनातन धर्म सिटी के संस्थापक।
डॉ. निशिकांत ओझा, भारत सरकार के एकीकृत रक्षा स्टाफ के चीफ एडवाइज़र–स्ट्रैटेजिक अफेयर्स एवं स्टडी ग्रुप के चेयरमैन। अपने प्रभावशाली संबोधन में उन्होंने विद्यार्थियों को चेतावनी दी कि डिग्री को यात्रा का अंत न मानें, बल्कि इसे उस कठोर प्रतिस्पर्धात्मक दुनिया में प्रवेश का नया चरण समझें, जहां यदि आप चूक गए तो कोई और अवसर छीन लेगा।
श्री रशीस भंडारी, हीरा निर्यात के प्रतिष्ठित व्यवसायी और नवीन तकनीक से मानव-निर्मित हीरों की निर्माण इकाई स्थापित करने वाले अग्रणी उद्यमी।
समारोह के मुख्य अतिथि गुयाना सहकारी गणराज्य के उच्चायुक्त महामहिम धीरजकुमार सीरज थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के चांसलर डॉ. अजींक्य डी. वाय. पाटिल ने की तथा मंच पर श्रीमती पूजा ए. पाटिल की गरिमामयी उपस्थिति रही।
सभी सम्मानित अतिथियों ने चांसलर और अजिंक्य डी. वाय. पाटिल विश्वविद्यालय की टीम को ऐसी संस्था स्थापित करने के लिए धन्यवाद दिया, जिसका उद्देश्य छात्रों को प्रतिस्पर्धात्मक दुनिया का सामना करने योग्य बनाना है। उन्होंने विद्यार्थियों को नवोन्मेषी और परिश्रमी बनने के साथ-साथ मानवता की सेवा के लिए भी सदैव तत्पर रहने की प्रेरणा दी।
मुख्य अतिथि महामहिम श्री सीरज ने अपने संबोधन में अपने देश गुयाना की विशेषताओं पर प्रकाश डाला और भारतीयों को निवेश एवं पर्यटन दोनों उद्देश्यों से वहां आने का आमंत्रण दिया।
चांसलर डॉ. अजींक्य डी. वाय. पाटिल ने अपने वक्तव्य में विश्वविद्यालय की उस दूरदृष्टि को पुनः रेखांकित किया, जिसके अंतर्गत छात्रों को यह समझाया जाता है कि डिग्री प्राप्त करने के साथ-साथ उन्हें देश को एक वैश्विक शक्ति बनाने में भी योगदान देना है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय व्यावहारिक शिक्षा के लिए नवीनतम तकनीकों और उपकरणों को लाने की व्यापक योजना बना रहा है।
कुलपति डॉ. राकेश कुमार जैन ने कहा कि नवाचार विश्वविद्यालय की पहचान का अभिन्न हिस्सा है और यहां छात्रों को स्वतंत्र रूप से सोचने तथा नए विचार सृजित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
इस भव्य दीक्षांत समारोह का संचालन प्रसिद्ध अभिनेत्री सुश्री विद्या मालवड़े, जो फिल्म चक दे इंडिया में अपनी भूमिका के लिए जानी जाती हैं, द्वारा किया गया।

