Homeप्रेस विज्ञप्तिअमूर्त सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण

अमूर्त सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण

केंद्र सरकार ने पूरे देश में लोक कला एवं संस्कृति के विभिन्न रूपों की रक्षा, संवर्धन और संरक्षण के लिए सात क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र (जेडसीसी) स्थापित किए हैं, जिनके मुख्यालय पटियाला, नागपुर, उदयपुर, प्रयागराज, कोलकाता, दीमापुर और तंजावुर में हैं। ये जेडसीसी अपने सदस्य राज्यों में नियमित रूप से विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियों और कार्यक्रमों का आयोजन करते हैं।

ये जेडसीसी लुप्तप्राय कला रूपों, लोककथाओं, मौखिक परंपराओं और प्रथाओं का ऑडियो, वीडियो और लिखित सामग्री के रूप में दस्तावेजीकरण भी करते हैं। दस्तावेजीकरण और डिजिटलीकरण की प्रक्रियाएँ निरंतर जारी हैं।

जेडसीसी द्वारा संचालित गुरु-शिष्य परंपरा योजना ऐसी ही एक पहल है, जिसमें पारंपरिक गुरु, युवा शिष्यों को प्रशिक्षित करते हैं ताकि सांस्कृतिक ज्ञान की निरंतरता सुनिश्चित हो सके, जिससे कलाकारों, शोधकर्ताओं और परंपराओं के सामुदायिक वाहकों को सहायता मिलती है।

जेडसीसी द्वारा कई लोक कला रूपों/मौखिक परंपराओं की पहचान की गई है, जैसे कि: लोरी और कायन गायन, दांडी, अंगीगर, प्रधानी, भदम और शैतान नृत्य, बुर्रा कथा, वीरनाट्यम, बुट्टा बोम्मलु, दप्पू, तप्पेटा गोलू, कोलनालु, गरागालु, विलासिनी नाट्यम, पुलिवेशालु, पगती वेशालु, डोल्लू और पूजा कुनिथा, वीरगासे, यक्षगान, कराडी माजलु, लम्बानी कुनिथा, नंदी ध्वजा कुनिथा, कराडी गोम्बे, उम्माथाटा, सुग्गी कुनिथा, सोमन कुनिथा, कनियारकली, कोलकली, कुम्माट्टी काली, थुंबी थुल्लल, मारगम काली, कथकली, ओप्पना, तिरुवथिराकली, थेय्यम, पदयानी, पूथन और थिरा, मुदियेतु, अर्जुन निरथियम, चकयार कुथु, ओट्टन थुल्लल, पुलिकाली, करगट्टम, ओयिलट्टम, परायट्टम (थप्पट्टम), पुलियाट्टम, पुरविअट्टम, कावड़ी अट्टम, देवराट्टम, जुमला मेलम, कनियान कूथु, कालियाट्टम, थुडुम्बट्टम, कोलकलियाट्टम, बोम्मालट्टम, थोलपावैकुथु, थेरुकुथु, चेक्काबजाना, बोनालु, पोथिराजू, चिरुथलबजाना, ओग्गु कथा, चिंदु यक्षगान, कालियाअट्टम, गराडी नृत्य, करगट्टम, निकोबारी नृत्य, रांची के ओरांव, मुंडा और खरिया सामुदायिक नृत्य, लावा नृत्य, कोलकाली, परिचाकली, डफुमुत्तु, ओप्पाना।

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