राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ और इससे जुड़े तमाम संगठन विगत सौ वर्षों से किस ध्येय, संकल्प और समर्पण के साथ राष्ट्र के कार्य में लगे हैं इसका प्रत्यक्षनअनुभव तभी होता है जब संघ या विश्व हिंदू परिषद् के कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद होता है।
मुंबई के बोनांजा पोर्टफोलियो के श्री एसपी गोयल की पहल पर श्री भागवत परिवार द्वारा आय़ोजित एक ऐसे ही संवाद में विगत कई वर्षों से पूर्वोत्तर भारत में सेवा कार्य कर रहे विश्व हिंदू परिषद् के श्री दीपक जोशी से सीधे संवाद में उनके द्वारा दी गई चौंकाने वाली जानकारी ने श्रोताओं को सोचने पर मजबूर कर दिया। उन्होंने बताया कि यहाँ के लोगों की राष्ट्र व धर्म निष्ठा इतनी प्रबल रही है कि मिशनरियों को पहला इसाई बनाने में 63 साल लग गए।
कार्यक्रम में उपस्थित दिल्ली के चार्टर्ड एकाउंटेंट व पूर्वोत्तर क्षेत्र में बरसों से सेवा कार्य कर रहे श्री सत्य प्रकाश मंगल ने यादगार व रोचक प्रसंग बताकर सबको चौंका दिया।
उन्होंने बताया कि इटानगर क्षेत्र में हतानू नाम का एक इसाई व्यक्ति है, जिसकी 6 पत्नियाँ और 24 लड़के -लड़कियाँ हैं। उस व्यक्ति से लगातारा संपर्क में रहने के बावजूद से भारत माता की जय बोलने में 4 साल लगे। और फिर गौ माता की जय बोलने में दो साल लगे। जब उसने इसाई धर्म छोड़क हिंदू धर्म ग्रहण कर लिया तो उसकी चारों इसाई पत्नियों ने उसे अपने सपने की घटना सुनाते हुए कहा कि प्रभु इशु हमारे सपने में आए और कहा कि उन्होंने कहा है कि तुम्हारे हिंदू बनने से वो नाराज हो गए हैं। इस पर दो दिन बाद हतानू ने अपनी पत्नियों को कहा कि इशु मेरे भी सपने में आए ते और कह रहे थे कि मैं ही शिव हूँ, तुमने जो किया वो ठीक किया। आज उस व्यक्ति ने एक विशाल पहाड़ खरीदकर वहाँ शिव मंदिर बनाने का संकल्प लिया है और वो जी जान से इस काम में लगा है।
दूसरी घटना बताते हुए उन्होंने कहा कि एक दिन कुछ आतंकवादियों ने पूर्वोत्तर क्षेत्र में मेरा अपहरण कर लिया, और मुझे एक अंधेरी झोपड़ी में कैद कर दिया। वहाँ पूरे समय एक एके 56 लिए व्यक्ति मेरी निगरानी करता रहा। मैं जरा भी हिलूं तो वह मुझ पर एके 56 तान देता था। मैं कृष्ण भक्त हूँ और मैने कृष्ण जी को याद किया, अचानक उस व्यक्ति के पेट में ऐसा तेज दर्द शुरु हुआ कि उसने एके 57 रख दी और अपना पेट पकड़कर बैठ गया। मैने उससे कहा कि मैं तुम्हारा दर्द ठीक कर देता हूं और कृष्णजी का नाम लेकर उसकी हथेली पर एक्यूप्रेशर देने लगा, ये चमत्कार ही था कि थोड़ी ही देर में सका दर्द दूर हो गया तो उसने खुश होकर मुझसे कहा कि तुम भागकर सड़क पर चले जाओ। मैं भागकर सड़क के किनारे गया तो एक जीप वाले ने मुझे लिफ्ट दी और मैं सुरक्षित निकल आया।
एक अन्य किस्सा बताते हुए उन्होंने कहा कि नागालैंड के पर्यटन मंत्री और मैं एक होटल में साथ ही ठहरे थे, उन्होंने मुझसे मिलने की जिज्ञासा जताई उनसे मिलने के बाद मैंने उनको धोती पहनाने की पेशकश की तो उसने कहा कि मैं तो क्रिश्चियन हूँ, इस पर मैने कहा कि क्रिश्चियन में कृष्ण ही है ये धोती कृष्ण की निशानी है, वो प्रसन्न हो गए और धोती पहन ली। फिर उन्होंने मुझे नागालैंड के हॉर्नोबिल उत्सव में आमंत्रित किया तो मैने कहा कि इस उत्सव में तो आप गौमांस खाते हो, हम ऐसी जगह नहीं आसकते। बाद में उन्होंने मुझे सूचित किया कि इस बार इस उत्सव में केवल शाकाहारी खाना रहेगा।
श्री दीपक जोशी ने पूर्वोत्तर क्षेत्र के अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, मिजोरम, मणिपुर, नागालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा जिसे प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने अष्टलक्ष्मी नाम दिया है, की संस्कृति और जीवनशैली को लेकर कई रोचक, चौंकाने वाली और रोमांचित करने वाली जानकारियाँ साझा की। उन्होंने बताया कि हजारों सालों से ये सबी क्षेत्र भारत की संस्कृति और परंपारओं का अभिन्न हिस्सा रहे हैं। हमारे कई पौराणिक व वैदिक तीर्थ व मंदिर इन क्षेत्रों में हजारों सालों से हैं। लेकिन विगत तीन सौ वर्षों में हमारा ध्यान इन क्षेत्रों पर नहीं गया। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने पहली बार 1948 में मधुकर लिमये को वहाँ प्रचारक बनाकर भेजा और इसके बाद संघ के समर्पित प्रचारकों की एक लंबी श्रृंखला रही जो उस तक्षेत्र में सेवा कार्य करने जाते रहे जो आज तक अनवरत जारी है। संघ के कई प्रचारकों और कार्यकर्ताओं की वहाँ हत्या तक कर दी गई। लेकिन संघ ने अपने सेवा कार्य और वहाँ के लोगों को राष्ट्र से जोड़ने का काम जारी रखा।
उन्होंने बताया कि इसाई मिनशनरी अंग्रेजों के समय ये ही इन सात राज्यों को तोड़कर एक अलग देश बनाने का षड़यंत्र करती रही, लेकिन वहाँ के आदिवासी समुदाय की अपने समाज व राष्ट्र के प्रति निष्ठा से उनका ये षड़यंत्र सफल नहीं हो पाया। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ को छोड़कर वहाँ कोई ऐसी शक्ति नहीं थी जो लोगों में राष्ट्र प्रेम की धारा को जीवित बनाए रखती।
हमारे लिए ये अष्टलक्ष्मी प्रदेश प्रारंभ से ही आस्था व श्रध्दा के केंद्र रहे हैं। असम का कामख्या का मंदिर तंत्र का सबसे प्रसिध्द व जाग्रत शक्तिपीठ है। गोहाटी में नवग्रह मंदिर व वशिष्ठ जी का आश्रम है। मेघालय में जयंती भद्रकाली का जयंती मंदिर है, जहाँ के पुजारी देशमुख महाराष्ट्र से गए थे और आज उनकी 29वीं पीढ़ी इस मंदिर में पूजा अर्चन का कार्य देख रही है। त्रिपुरा में त्रिपुर सुंदरी का मंदिर है, जो एक प्रमुख शक्ति पीठ है। इंफाल में गोविंददेवजी का मंदिर है और हजारों प्राचीन मंदिर आज भी हैं। मिजोरम का संबंध राम से है। वहाँ पोलाशिव मंदिर है। नागालैंड में खाटू श्याम व हिडिंबा का मंदिर है, जो महाभारत कालीन है। यहाँ परशुराम का भी स्थान है।
उन्होंने कहा कि श्री नरेंद्र मोदीजी के आव्हान पर अष्टलक्ष्मी क्षेत्र के जागरण का जो कार्य प्रारंभ हुआ है उससे पूरे देश की चेतना इस क्षेत्र से जुड़ी है। राजनीतिक दृष्टि से वर्ष 2014 के बाद इस क्षेत्र पर सरकार का ध्यान गया। मोदी सरकार आने के बाद इस क्षेत्र में विकास को एक नई गति मिली।
उन्होंने बताया कि विश्व हिंदू परिषद् और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के कई प्रकल्प अष्टलक्ष्मी क्षेत्र में सैकड़ों सेवा कार्य कर रहे हैं। एकल अभियान व विद्याभारती द्वारा 9 हजार स्कूल और 150 छात्रावास संचालित किए जा रहे हैं। इन स्कूलों से निकले हुए सैकड़ों बच्चे अच्छे संस्थानों में व सरकारी नौकरी कर रहे हैं। यहाँ सक्रिय सैकड़ों उग्रवादी संगठनों से जुड़े हजारों युवा उग्रवाद छोड़कर आज पुलिस व सेना से लेकर विभिन्न सरकारी व निजी संस्थानों में नौकरी कर रहे है। कई लोग खेती में भी लगे हैं।
श्री दीपक जोशी ने बताया कि मोदी सरकार के आने के बाद इस क्षेत्र में 18 एअरपोर्ट बने और 7 नए अएरपोर्ट और बन रहे हैं। सड़कों का जाल तेजी से बिछाया जा रहा है। असम के तिनसुखिया में ऐसी सड़क बनाई गई है जिस पर युध्दक विमान तक सफलतापूर्वक उतर चुके हैं। उन्होंने बताया कि देश के सीमावर्ती राज्य से पूर्वोत्त्र की दूरी मात्र 22 किलोमीटर है। उन्होंने बताया कि वहाँ दृश्य तेजी से बदल रहा है और देश के लोगों का भी पूर्वोत्तर क्षेत्र में पर्यटन व धार्मिक स्थलों पर जाने का आकर्षण बढ़ा है।
कार्यक्रम के आरंभ में श्री वीरेन्द्र याज्ञिक ने श्री दीपक जोशी को श्री भागवत परिवार द्वारा प्रकाशित ग्रंथ अप्रतिम भारत की एक प्रति भेंट की।

