कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. हूबनाथ पांडेय के संस्था परिचय और स्वागत भाषण से हुआ। इसके पश्चात, समारोह के अध्यक्ष श्री विश्वनाथ सचदेव के कर-कमलों द्वारा नरेश सक्सेना जी को शाल, श्रीफल, प्रशस्ति पत्र और नकद धनराशि भेंट कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर पत्रिका ‘युगीन काव्या’ के नरेश सक्सेना पर केंद्रित विशेषांक का लोकार्पण भी किया गया। मंच पर नरेश सक्सेना के साथ विश्वनाथ सचदेव, विजय कुमार, हृदयेश मयंक, विनोद दास, डॉ. हूबनाथ पांडेय, रमन मिश्र और प्रमोद बंब सुशोभित थे।
मुख्य वक्ता के रूप में श्री विजय कुमार ने नरेश जी की कविताओं की अत्यंत सुंदर और गहरी मीमांसा प्रस्तुत की। उन्होंने नरेश जी के व्यक्तित्व से जुड़े कुछ रोचक संस्मरण सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
समारोह का मुख्य आकर्षण स्वयं नरेश सक्सेना रहे। 88 वर्ष की उम्र में भी उनकी ऊर्जा और उत्साह देखते ही बनता था। उन्होंने लगभग 40 मिनट तक मंच संभालते हुए अपनी कालजयी कविता ‘चम्बल’ के अंशों के साथ-साथ कई महत्वपूर्ण रचनाओं का पाठ किया। उन्होंने गद्य कविता में छिपी लय और ताल पर बहुत बारीकी से बात की और मस्ती भरे अंदाज में कविताओं की संगीतमय प्रस्तुतियां दीं। उनकी इस ऊर्जा ने उपस्थित जनसमूह को एक प्रेरक और ललित अनुभव से भर दिया।
अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में श्री विश्वनाथ सचदेव ने नरेश जी को बधाई देते हुए बहुत संक्षेप और सारगर्भित बातें कहीं। उन्होंने स्वर्गीय हस्तीमल हस्ती जी के साथ अपने पुराने और आत्मीय संबंधों को याद किया। कार्यक्रम के अंत में हस्ती जी के सुपुत्र श्री प्रमोद बंब ने सभी आगंतुकों और सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
पूरे कार्यक्रम को रमन मिश्र ने अपने कसे हुए और गरिमामय संचालन से एक सूत्र में पिरोए रखा। उन्होंने नरेश जी की पंक्तियों और हस्ती जी के शेरों का बखूबी इस्तेमाल कर कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई।
इस साहित्यिक जुटान में धीरेंद्र अस्थाना, एस. आर. हरनोट, अनूप सेठी, शैलेश सिंह, राकेश शर्मा, मुख्तार ख़ान, दिनेश शाकुल, अजय रोहिल्ला, श्रीकांत आप्टे, प्रशांत जैन, मधु शुक्ला, कुसुम तिवारी, आर.एस. विकल, जुल्मी राम सिंह यादव, अवधेश राय, ललिता अस्थाना, विनीता, और किरण मिश्र जैसे अनेक गणमान्य लेखक और साहित्य-प्रेमी अंत तक उपस्थित रहे। श्रीकांत आप्टे द्वारा नरेश सक्सेना की कविता पर बनाया गया पोस्टर सब के लिए आकर्षण का केंद्र था।

