मुंबई हाल ही में वैश्विक इंटरनेट शासन से जुड़ी महत्वपूर्ण चर्चाओं का केंद्र बना, जब Internet Corporation for Assigned Names and Numbers (ICANN) का पाँच दिवसीय कम्युनिटी फोरम शहर के जियो वर्ल्ड सेंटर में संपन्न हुआ। यह आयोजन मुंबई के उभरते हुए व्यावसायिक क्षेत्र बी के सी में आयोजित किया गया।
इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में दुनिया भर से इंटरनेट नीति-नियंता , तकनीकी विशेषज्ञ, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, नागरिक समाज के सदस्य और इस क्षेत्र के शिक्षाविद शामिल हुए। ये सभी मिलकर उस वैश्विक तंत्र के निर्माण और संचालन में भूमिका निभाते हैं, जिस पर आज अरबों इंटरनेट उपयोगकर्ता निर्भर हैं। सीमाओं के पार फैले इस विशाल नेटवर्क के लिए ऐसे मंच अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, जहाँ तकनीकी विषयों, सार्वजनिक नीतियों और नवाचार के बीच संवाद संभव हो सके।
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आईकैन वैश्विक डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र में एक विशेष भूमिका निभाता है। यह संस्था इंटरनेट के मूलभूत ढाँचे—जैसे डोमेन नेम सिस्टम और आईपी एड्रेसिंग—के समन्वय का कार्य करती है, ताकि इंटरनेट स्थिर, सुरक्षित और सुचारु रूप से संचालित होता रहे। इसीलिए इसके कम्युनिटी फोरम केवल सम्मेलन नहीं होते, बल्कि ऐसे कार्यस्थल होते हैं जहाँ विभिन्न हितधारक मिलकर इंटरनेट के भविष्य से जुड़े निर्णयों पर विचार-विमर्श करते हैं।
फोरम के दौरान कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई। इनमें इंटरनेट के तकनीकी ढाँचे से लेकर डिजिटल युग की नई चुनौतियाँ भी शामिल थीं। प्रतिभागियों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के नियमन, साइबर सुरक्षा, ऑनलाइन सुरक्षा और डिजिटल संसाधनों तक समान पहुँच जैसे मुद्दों पर विचार साझा किए। इन चर्चाओं से स्पष्ट हुआ कि आज इंटरनेट शासन केवल तकनीकी ढाँचे तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें नवाचार, सुरक्षा और डिजिटल अधिकारों के बीच संतुलन बनाना भी शामिल है।

इस फोरम की एक विशेषता युवाओं की सक्रिय भागीदारी भी रही। ICANN NextGen Program जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से विभिन्न विश्वविद्यालयों और तकनीकी संस्थानों से जुड़े छात्र और युवा पेशेवर—विशेषकर विकासशील देशों से—इस वैश्विक मंच से जुड़े।
इन युवा प्रतिभागियों ने इंटरनेट से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर अपने प्रोजेक्ट प्रस्तुत किए। इनमें एआई के कारण आने वाली चुनौतियां, बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को मजबूत करने, नेटवर्क की स्थिरता बढ़ाने और अधिक समावेशी इंटरनेट गवर्नेंस ढाँचे विकसित करने जैसे मुद्दे शामिल थे। इस कार्यक्रम ने उन्हें यह समझने का अवसर दिया कि वैश्विक संस्थाएँ, तकनीकी कंपनियाँ और नीति-निर्माता मिलकर इंटरनेट की आधारभूत संरचना का संचालन कैसे करते हैं।

फोरम के दौरान मुझे कई नेक्स्टजेन प्रतिभागियों से मिलने और उनके कार्यों के बारे में जानने का अवसर मिला। विशेष रूप से पुणे के दो इंजीनियरिंग छात्रों—मानस और अपर्णा—से हुई बातचीत बेहद प्रेरक रही। उनके लिए यह अनुभव केवल एक सम्मेलन में भाग लेने का अवसर नहीं था, बल्कि इंटरनेट के जटिल वैश्विक तंत्र को करीब से समझने का मौका भी था।
उनकी जिज्ञासा इस बात को लेकर थी कि उद्योग और स्टार्टअप किस तरह इंटरनेट इकोसिस्टम के भीतर अपनी विशेष तकनीकी क्षमताओं के आधार पर नए समाधान विकसित कर रहे हैं। यह अनुभव उन्हें यह समझने में भी मददगार रहा कि किस प्रकार अकादमिक शोध धीरे-धीरे वास्तविक तकनीकी नवाचार का रूप लेता है।
इस कार्यक्रम में India School on Internet Governance (inSIG) के पूर्व प्रतिभागियों की भी महत्वपूर्ण उपस्थिति रही। inSIG ने पिछले कुछ वर्षों में भारत में इंटरनेट नीति और शासन से जुड़े विषयों पर जागरूकता और विशेषज्ञता विकसित करने में अहम भूमिका निभाई है।
फोरम के दौरान कई पूर्व प्रतिभागी सक्रिय रूप से विभिन्न सत्रों और गतिविधियों में भाग लेते नजर आए। इसी दौरान एक अनौपचारिक बैठक में inSIG के कई सक्रिय प्रतिभागियों—अमृता चौधरी, सतीश बाबू , आनंद राजे, अनुपम अग्रवाल, सनी, आदर्श बु और प्रदीप गुप्ता—ने आपस में विचार-विमर्श किया।
इस अवसर पर उनकी एक अनौपचारिक बैठक देवेश त्यागी से भी हुई, जो National Internet Exchange of India (NIXI) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं। इस बातचीत में इस बात पर चर्चा हुई कि भारत किस प्रकार वैश्विक डिजिटल परिदृश्य में अपनी भूमिका को और सशक्त बना सकता है तथा अपनी रचनात्मक और तकनीकी क्षमताओं को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अधिक प्रभावी ढंग से प्रस्तुत कर सकता है।
मुंबई के लिए इस प्रकार के वैश्विक आयोजन की मेजबानी करना भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इससे यह स्पष्ट होता है कि भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था तेजी से विकसित हो रही है और वैश्विक तकनीकी नीतियों को आकार देने में उसकी भूमिका लगातार बढ़ रही है।
आज जब डिजिटल तकनीकें समाज और अर्थव्यवस्था को गहराई से प्रभावित कर रही हैं, तब सहयोगात्मक इंटरनेट शासन की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक महसूस की जा रही है। इंटरनेट एक साझा वैश्विक संसाधन है, जिसकी स्थिरता और खुलापन बनाए रखने के लिए सरकारों, निजी कंपनियों, तकनीकी समुदाय और नागरिक समाज के बीच निरंतर सहयोग आवश्यक है।
मुंबई में हुई इन चर्चाओं ने यह संकेत दिया कि इंटरनेट का भविष्य केवल स्थापित संस्थाओं के हाथ में ही नहीं रहेगा। नई पीढ़ी के युवा भी उतनी ही ऊर्जा और कल्पनाशीलता के साथ इस डिजिटल दुनिया को अधिक समावेशी, सुरक्षित और मजबूत बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
(लेखक स्टेट बैंक के सेवानिवृत्त अधिकारी हैं और समसामयिक विषयों पर नियमित लेखन करते हैं)

