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मानवाधिकारों की पूरी व्यवस्था की मूल भावना सहानुभूति और करुणा है: एनएचआरसी के महासचिव भारत लाल

भुवनेश्वर।  शिक्षा जीवन को बदलने और एक न्यायपूर्ण तथा समावेशी समाज के निर्माण का सबसे सशक्त माध्यम है। यह बात राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के महासचिव भरतलाल ने गत शनिवार को अपने कीट-कीस के दौरे के दौरान कही।

कीस के छात्रों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षा ने उनके अपने जीवन और करियर को आकार देने में निर्णायक भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा, “यदि मैं आज इस मुकाम तक पहुँचा हूँ तो इसका कारण शिक्षा है। शिक्षा के बिना व्यक्ति बहुत कुछ हासिल नहीं कर सकता।” उन्होंने छात्रों से अपने समय का सर्वोत्तम उपयोग कर ज्ञान और विवेक अर्जित करने का आग्रह किया।

उन्होंने कहा, “मैं यहाँ कीट और कीस से कुछ सीखने आया हूँ। इन संस्थानों के संस्थापक महान् शिक्षाविद् प्रोफेसर अच्युत सामंत को मैं इस अद्भुत कार्य के लिए बधाई देता हूँ। शिक्षा मन, संस्कृति, व्यवहार और सोच को आकार देती है और कीस अपनी शिक्षा के माध्यम से जीवन बदलने का काम कर रहा है।”

भरत लालजी ने अपने संबोधन में छात्रों को मजबूत चरित्र और दूसरों की मदद करने की भावना विकसित करने के लिए प्रेरित किया। उनके अनुसार, मानवाधिकारों का मूल उद्देश्य सामाजिक कलंक को समाप्त करना और हर व्यक्ति के लिए गरिमा और समानता सुनिश्चित करना है।

बाद में कीट नॉलेज ट्री श्रृंखला के अंतर्गत व्याख्यान देते हुए उन्होंने दोहराया कि शिक्षा व्यक्ति की संस्कृति, व्यवहार और सोच को आकार देती है। उन्होंने कहा, “मानवाधिकारों की पूरी व्यवस्था की मूल भावना सहानुभूति और करुणा है। मानवाधिकारों की रक्षा हमारे डीएनए में है।”

उन्होंने युवाओं से मानवाधिकारों के संरक्षक बनने और सभी के लिए समानता तथा गरिमा के मूल्यों को बनाए रखने का आह्वान किया।

समकालीन चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि मानवाधिकार और श्रम स्थितियाँ अब वैश्विक आर्थिक विकास के केंद्र में आ रही हैं। “यदि व्यवसाय भविष्य में संपत्ति का सृजन करना चाहते हैं, तो उन्हें श्रमिकों के कल्याण को बढ़ावा देना होगा और पर्यावरण की रक्षा करनी होगी।” उन्होंने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में संभावित व्यापार बाधाओं से बचने के लिए जीवन और कार्य परिस्थितियों में सुधार आवश्यक है।

उन्होंने भारत में मानवाधिकारों की सुरक्षा के लिए संस्थागत व्यवस्थाओं के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 32 नागरिकों को न्याय तक पहुँच की गारंटी देता है, जिससे वे अपने अधिकारों के उल्लंघन की स्थिति में कानूनी उपाय प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने कहा, “कोई भी व्यक्ति मानवाधिकार आयोग से संपर्क कर सकता है। वर्ष 2023–24 में ही आयोग को प्रतिदिन 300 से अधिक शिकायतें प्राप्त हुईं।”

मानवाधिकारों की रक्षा में सुशासन की भूमिका पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि बेहतर सार्वजनिक सेवा वितरण और पारदर्शिता अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद न्याय को कमजोर करते हैं और संस्थाओं को क्षति पहुँचाते हैं।

इस कार्यक्रम में महान् शिक्षाविद् कीट-कीस के प्राणप्रतिष्ठाता प्रोफेसर अच्युत सामंत सहित कीट डीम्ड विश्वविद्यालय के अनेक वरिष्ठ अधिकारी, कुलपति प्रोफेसर सरनजीत सिंह, प्रो-वाइस चांसलर राजू केडी, छात्र, शिक्षक और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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