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वेदांता के जनक अनिल अग्रवाल को बेटे की मौत से लगा गहरा सदमा, 75 प्रतिशत संपत्ति दान करेंगे

दिग्गज माइनिंग कंपनी वेदांता के चेयरमैन अनिल अग्रवाल के बेटे अग्निवेश अग्रवाल अब नहीं रहे। अनिल अग्रवाल ने X (पूर्व नाम Twitter) पर 7 जनवरी को अपनी जिंदगी का सबसे अधिक अंधेरे वाला दिन कहा। उन्होंने बताया कि 49वर्षीय अग्निवेश का अमेरिका में स्कीइंग के दौरान एक्सीडेंट हो गया था और वह न्यूयॉर्क के माउंट सिनाई हॉस्पिटल में रिकवर हो रहे थे लेकिन एकाएक हार्ट अटैक के चलते उनका निधन हो गया। अग्निवेश की बात करें तो उनका परिचय सिर्फ वेदांता ग्रुप के फाउंडर और चेयरमैन का बेटा होना ही नहीं है बल्कि कॉरपोरेट इंडस्ट्री में उनकी अपनी एक अलग पहचान थी। वह तलवंडी साबो पावर लिमिटेड (TCPL) के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में एक थे।

अग्निवेश का जन्म 3 जून, 1976 को पटना में अनिल और किरण अग्रवाल की बिहारी मिडिल क्लास फैमिली में हुआ था। अग्निवेश ने अजमेर के मशहूर मेयो कॉलेज में अपनी शुरुआती शिक्षा हासिल की और बाद में मुंबई आकर मुंबई विश्वविद्यालय से बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में स्नातक की डिग्री हासिल की। इसके बाद उन्होंने एक सफल प्रोफेशनल करियर बनाया। ध्यान दें कि उन्हें सिर्फ विरासत ही नहीं मिली बल्कि उन्होंने खुद एक विरासत का निर्माण किया। कॉरपोरेट सेक्टर में उनके पास करीब दो दशकों का अनुभव था।

अनिल अग्रवाल और उनके परिवार की कुल संपत्ति करीब 4.2 अरब डॉलर यानी लगभग 35,000 करोड़ रुपये है.

अनिल अग्रवाल Vedanta Resources के फाउंडर और चेयरमैन हैं. उन्होंने 1976 में इस कंपनी की शुरुआत एक छोटी केबल कंपनी से की थी. बहुत कम उम्र में उन्होंने अपने पिता के साथ स्क्रैप के काम से बिजनेस की दुनिया में कदम रखा.कई बार असफल होने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और धीरे धीरे Vedanta को मेटल, माइनिंग, पावर और ऑयल जैसे बड़े सेक्टर में खड़ा किया.एक साधारण परिवार से निकलकर अरबों की कंपनी बनाने वाले अनिल अग्रवाल की कहानी आम लोगों के लिए भी प्रेरणा है.

अनिल अग्रवाल का परिवार हमेशा से सादगी और संस्कारों  के लिए जाना जाता रहा है. परिवार में उनकी पत्नी किरण अग्रवाल हैं, जो लाइमलाइट से दूर रहकर परिवार की धुरी बनी रही हैं. उनके दो बच्चे थे. बेटे अग्निवेश अग्रवाल और बेटी प्रिया अग्रवाल. हाल ही में बेटे अग्निवेश का अमेरिका में इलाज के दौरान कार्डियक अरेस्ट से निधन हो गया, जिससे पूरा परिवार गहरे सदमे में है. बेटे के निधन के बाद अग्निवेश के बारे में बताते हुए अनिल अग्रवाल ने कहा कि वह सिर्फ एक बेटा नहीं, बल्कि उनका सबसे करीबी दोस्त और गर्व था।

अग्निवेश अग्रवाल ने बिजनेस  दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई थी. उन्होंने ‘Fujairah Gold’ जैसी कंपनी खड़ी की थी और Hindustan Zinc के चेयरमैन भी रहे. वह Vedanta Group की कंपनी Talwandi Sabo Power Limited के बोर्ड में शामिल थे.

उनकी बेटी प्रिया अग्रवाल वर्तमान में Vedanta और Hindustan Zinc के बोर्ड में शामिल हैं और हिंदुस्तान जिंक की चेयरपर्सन के तौर पर बड़ी जिम्मेदारियां संभाल रही हैं.  बिजनेस में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है और आने वाले समय में Vedanta की जिम्मेदारी उन्हीं के कंधों पर रहने की उम्मीद है.

एक स्क्रैप  यानी कबाड़ व्यापारी से अपना सफर शुरू करने वाले अनिल अग्रवाल आज भारत के सबसे अमीर व्यक्तियों में शुमार हैं. फोर्ब्स (Forbes) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, अनिल अग्रवाल और उनके परिवार की कुल संपत्ति करीब 4.2 अरब डॉलर यानी लगभग 35,000 करोड़ रुपये है.

वेदांता साल 2003 में London Stock Exchange में लिस्ट होने वाली पहली भारतीय कंपनी बनी. बाद में 2019 में अनिल अग्रवाल ने कंपनी को फिर से प्राइवेट कर लिया. मेटल, माइनिंग, पावर और ऑयल एंड गैस जैसे बड़े सेक्टर में फैले वेदांता ग्रुप का कारोबार आज भारत ही नहीं बल्कि विदेशों तक फैला हुआ है.

75% दौलत दान करने का संकल्प

इतनी बड़ी संपत्ति के मालिक होने के बावजूद अनिल अग्रवाल अपनी सादगी और दानवीर स्वभाव के लिए जाने जाते हैं. उन्होंने ‘Giving Pledge’ के तहत अपनी 75 फीसदी संपत्ति समाज सेवा के लिए दान करने का वादा किया है. अनिल अग्रवाल ने पहले ही ऐलान कर रखा है कि वह अपनी कमाई का 75 फीसदी हिस्सा समाज के कामों में लगाएंगे.बेटे के निधन के बाद उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि अब वह और भी सादगी से जीवन बिताएंगे और अग्निवेश के सपनों को पूरा करने के लिए समाज सेवा के कामों को और तेजी से आगे बढ़ाएंगे.

अग्निवेश अग्रवाल का 49 साल की उम्र में निधन परिवार के लिए सबसे बड़ा झटका है.अब जबकि वह इस दुनिया में नहीं हैं, अनिल अग्रवाल का पूरा ध्यान अपनी बेटी प्रिया अग्रवाल और उनके साथ मिलकर भारत को आत्मनिर्भर बनाने के मिशन होगा. आने वाले समय में वह ग्रुप की बड़ी जिम्मेदरी संभालती नजर आ सकती हैं.

अनिल अग्रवाल ने बताया कि अग्निवेश का सपना था कि देश में कोई बच्चा भूखा न सोए और हर युवा को काम मिले, इसी संकल्प को और हर युवा को काम मिले, इसी संकल्प को लेकर अब अग्रवाल परिवार आगे बढ़ने जा रहा है.

बेटे के निधन के बाद वेदांता चेयरमैन अनिल अग्रवाल दान करेंगे 75% संपत्ति, बोले- ‘सादगी से जिउंगा, पूरी जिंदगी’Forbes के मुताबिक, अनिल अग्रवाल की कुल नेटवर्थ 4.2 अरब डॉलर है, जो भारतीय रुपये में लगभग 35,000 करोड़ रुपये के आसपास है. वेदांता, माइनिंग, पावर और ऑयल जैसे बड़े सेक्टर में काम करती है और भारत के साथ विदेशों में भी कंपनी की मौजूदगी है.

वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल इस वक्त अपनी जिंदगी के सबसे मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं. बेटे अग्निवेश अग्रवाल के अचानक निधन ने उन्हें अंदर से तोड़ दिया है. इस गहरे दुख के बीच उन्होंने एक बड़ा फैसला दोहराया है, जिसने सबका ध्यान खींचा है. अनिल अग्रवाल ने कहा है कि वह अपनी कमाई का 75 फीसदी से ज्यादा हिस्सा दान करेंगे. इसे वह समाजिक कामों में लगाएंगे और आगे की जिंदगी और भी सादगी से जिएंगे.

अनिल अग्रवाल ने अपने भावुक पोस्ट में लिखा कि उन्होंने यह वादा अपने बेटे अग्निवेश से किया था. उन्होंने कहा कि जो भी कमाया है, उसका बड़ा हिस्सा समाज को लौटाया जाएगा. बेटे के जाने के बाद उन्होंने यह संकल्प और मजबूत किया है और कहा है कि अब उनकी बाकी जिंदगी इसी मकसद के लिए होगी.

आज मेरे जीवन का सबसे दर्दनाक दिन है।
मेरा अग्निवेश, मेरा 49 साल का बेटा, आज हमारे बीच नहीं रहा। एक बाप के कंधे पर बेटे की अर्थी जाये इससे बुरा और क्या हो सकता है। अग्निवेश अपने दोस्त के साथ अमेरिका में skiing करने गया था। वहां accident हो गया। वो Mount Sinai Hospital, New York में ठीक हो रहा था। हमें लगा सब ठीक हो जाएगा… लेकिन अचानक cardiac arrest हो गया। और हमारा बच्चा हमें छोड़कर चला गया।

3 जून 1976 को पटना में जब अग्नि हमारी दुनिया में आया, वो पल आज भी आंखों के सामने है। एक middle class Bihari परिवार में जन्मा था अग्नि।
तुम्हारे साथ बिताया गया हर एक पल आज बहुत याद आ रहा है बेटा।
अपनी माँ का दुलारा अग्नि बचपन में बेहद चंचल और शरारती था। हमेशा हँसता, हमेशा मुस्कुराता| यारों का यार था वो, और अपनी बहन Priya को लेकर सबसे प्रोटेक्टिव भी।
उसने Mayo College, Ajmer में पढ़ाई की। बेहद strong personality थी अग्नि की – boxing champion, horse riding का शौकीन, और कमाल का musician। उसने Fujairah Gold जैसी शानदार कंपनी खड़ी की, और Hindustan Zinc का Chairman भी बना।
लेकिन इन सबसे ऊपर अग्नि बेहद simple था। हमेशा अपने friends और colleagues के बीच में ही रहता था। जिससे भी मिलता, उसे अपना बना लेता था। वो हमेशा ज़मीन से जुड़ा रहा सीधा, सच्चा, जिंदादिली और इंसानियत से भरा।
वो सिर्फ बेटा नहीं था – वो मेरा दोस्त था, मेरी शान था, मेरी पूरी दुनिया था।
मैं और किरन टूट से गए हैं। बस यही सोच रहे हैं कि हमारा बेटा तो चला गया। लेकिन जो लोग हमारे वेदांता में काम करते हैं, वो सब अग्निवेश ही तो हैं। वो सब हमारे बेटे-बेटियां हैं।
अग्नि और मेरा सपना था, हिंदुस्तान को आत्मनिर्भर बनाना। वो हमेशा कहता था – “पापा, हमारे देश में क्या नहीं है? फिर हम किसी से पीछे क्यों रहें?”
हमारी दिली इच्छा यही रही कि देश का कोई बच्चा भूखा न सोए, कोई बच्चा अनपढ़ न रहे, हर महिला अपने पैरों पर खड़ी हो, और सभी युवाओं को रोज़गार मिले।
मैंने अग्निवेश से वादा किया था हमारे पास जितना भी धन आएगा, उसका 75% से ज्यादा समाज के काम में लगायेंगे। आज फिर वो वादा दोहराता हूँ। अब और भी सादगी से जीवन जीऊंगा। और अपनी बाकी जिंदगी इसी में लगा दूंगा।
हम उन सभी मित्रों, सहकर्मियों और शुभचिंतकों का दिल से धन्यवाद करते हैं जो हमेशा अग्निवेश के साथ रहे।
अभी तो साथ मिलकर बहुत कुछ करना था अग्नि। तुम्हें पूरी जिंदगी जीनी थी। कितने सपने थे, कितने अरमान थे, सब कुछ अधूरा ही रह गया। समझ नहीं आता, तुम्हारे बिना अब ज़िन्दगी कैसे कटेगी बेटा।
तुम्हारे बिना ज़िंदगी हमेशा अधूरी रहेगी, लेकिन तुम्हारे सपने अधूरे नहीं रहने दूंगा।
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