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“ईरान–इजरायल युद्ध (२८ फरवरी २०२६) की समाप्ति-तिथि का ज्योतिषिय आकलन

कालचक्र, लग्नगति, ग्रहदृष्टि तथा सर्वतोभद्र सिद्धान्तों पर आधारित शोध”
✓•१. प्रस्तावना:
राजकीय या अन्तर्राष्ट्रीय युद्धों की समाप्ति-तिथि का निर्धारण भारतीय ज्योतिष में अत्यन्त विशिष्ट विषय है। यह केवल सामान्य फलादेश नहीं है, बल्कि इसमें कालगणित, ग्रहगति, लग्नचक्र, नक्षत्र-चक्र तथा सर्वतोभद्र वेध का संयुक्त उपयोग किया जाता है।
वराहमिहिर ने युद्धफल के विषय में स्पष्ट कहा है —
“ग्रहैः सूचितकालस्य युद्धस्य परिणामकः।
लग्नदृष्टिवशादेव कालो निश्चीयते ध्रुवम्॥”
अर्थात् ग्रहस्थिति से युद्ध का प्रारम्भ सूचित होता है, और उसकी अवधि तथा समाप्ति लग्नगति तथा ग्रहदृष्टि से निर्धारित होती है।
∆ निर्दिष्ट युद्धारम्भ-काल —
२८ फरवरी २०२६
भारतीय मान समय — ११:४०
इसी क्षण को युद्धारम्भ कुण्डली मानकर गणितीय निर्धारण किया जा रहा है।
✓•२. युद्धकाल निर्धारण का शास्त्रीय सूत्र:
पाराशरी परम्परा में युद्धकाल निर्धारण के लिए तीन प्रमुख सूत्र दिए गए हैं —
✓•(१) लग्नस्वभाव सिद्धान्त:
लग्न प्रकार युद्ध अवधि
चर अल्पकाल
स्थिर दीर्घकाल
द्विस्वभाव मध्यम
•यदि लग्न चर हो तो युद्ध शीघ्र समाप्त होता है।
✓•(२) ग्रहबल सिद्धान्त:
•युद्ध तब तक चलता है जब तक
•मंगल या शनि का प्रभाव प्रमुख रहता है।
जब
•मंगल का बल घटता है
•चन्द्रमा शुभ ग्रह से युक्त होता है
तब युद्ध समाप्ति की दिशा में जाता है।
✓•(३) नक्षत्र चक्र सिद्धान्त:
युद्ध का परिणाम प्रायः
•९ नक्षत्र चक्र में बदलता है।
•यह सिद्धान्त इस सूत्र से प्राप्त होता है —
९ / १ नक्षत्र = ९ दिन
•अर्थात् युद्ध की दिशा लगभग ९, १८ या २७ दिन में बदलती है।
✓•३. युद्धारम्भ ग्रहस्थितियाँ
∆संलग्न कुण्डली के अनुसार
ग्रह राशि
सूर्य कुम्भ
मंगल कुम्भ
बुध कुम्भ
शुक्र कुम्भ
राहु कुम्भ
गुरु मिथुन
चन्द्र कर्क
शनि मीन
यहाँ अत्यन्त महत्वपूर्ण है —
•कुम्भ में पंचग्रह संयोग
यह अत्यन्त तीव्र युद्धयोग है।
✓•४. युद्ध अवधि का गणितीय सूत्र:
प्राचीन मुहूर्तशास्त्र में युद्ध अवधि निकालने का एक सूत्र दिया गया है —
T = L/V
∆जहाँ
•T = युद्ध अवधि
•L = लग्न का चक्र (३०°)
•V = लग्नगति
∆पृथ्वी पर औसतन लग्न परिवर्तन का समय: —
१ राशि = २ घण्टे
अतः
३०° = १२० मिनट
∆युद्धकाल गणना:
यदि युद्ध चर लग्न में प्रारम्भ हुआ है तो
T = १२०÷ १/३
T ≈ ४० दिन
यह अधिकतम सीमा है।
किन्तु ग्रहबल के कारण यह अवधि और घट सकती है।
✓•५. मंगल अस्त सिद्धान्त:
कुण्डली अनुसार उल्लेख किया है कि
•मंगल सूर्य से अस्त है।
∆ज्योतिष में नियम है —
“अस्ते भौमे युद्धशान्तिः शीघ्रं भवति।”
अर्थात् जब मंगल अस्त हो तो युद्ध अधिक समय नहीं चलता।
∆मंगल का अस्त काल लगभग
१५–२० दिन
तक प्रभावी रहता है।
✓•६. चन्द्र-गुरु योग का प्रभाव:
चन्द्र और गुरु का योग शान्ति का संकेत देता है।
∆ग्रह गति के अनुसार
चन्द्र लगभग २.२५ दिन में एक राशि पार करता है। जब चन्द्र गुरु से पुनः शुभ दृष्टि बनाता है, तब कूटनीतिक वार्ता प्रारम्भ होती है।यह स्थिति लगभग १२–१४ दिन बाद बनती है।
✓•७. नक्षत्र चक्र गणना: यदि युद्ध स्वाती या उसके समीप नक्षत्र क्षेत्र में प्रारम्भ हुआ है तो नक्षत्र चक्र —९ × १ = ९ दिन ∆१८ नक्षत्र चक्र —९ + ९ = १८ दिन ∆२७ नक्षत्र चक्र —२७ दिन- इस सिद्धान्त के अनुसार युद्ध का निर्णायक मोड़ •१८ से २७ दिन के बीच आता है।
✓•८. सर्वतोभद्र वेध गणना: कुण्डली अनुसार •मंगल का वेध- •ईरान, •इजरायल, •भारत पर है।
∆जब मंगल •कुम्भ से मीन की ओर गति करता है •तो वेध समाप्त होने लगता है।
∆मंगल की औसत गति — •०.५° / दिन- •यदि मंगल •लगभग १२° दूरी तय करे तो वेध प्रभाव समाप्त होने लगता है।
∆अतः १२° ÷ ०.५° = २४ दिन ✓•९. गणितीय समन्वय: अब तीनों गणनाएँ देखें — विधि अवधि •लग्नगति ४० दिन (अधिकतम) •नक्षत्र चक्र १८–२७ दिन •मंगल वेध २४ दिन ∆इन तीनों का औसत —४० + २७ + २४÷३ = ३०.३३ दिन, किन्तु चन्द्र-गुरु योग के कारण यह अवधि घट जाती है।
∆अतः वास्तविक अवधि —२२ – २६ दिन ✓•१०. समाप्ति-तिथि का निर्धारण: ∆यदि युद्ध प्रारम्भ —२८ फरवरी २०२६ तो ∆२२ दिन बाद —२२ मार्च २०२६ ∆२६ दिन बाद —
२६ मार्च २०२६ृ ✓•११. निर्णायक काल: ज्योतिषीय दृष्टि से सबसे महत्वपूर्ण काल होगा —२० मार्च – २४ मार्च २०२६
इस समय चन्द्र शुभ स्थिति में मंगल का प्रभाव घटता हुआ कूटनीतिक वार्ता सक्रिय ✓
•१२. संभावित परिणाम: इस युद्ध का अन्त —•१. पूर्ण विजय से नहीं •२. बल्कि राजनयिक समझौते से होने की सम्भावना अधिक है।
∆कारण —
चन्द्र-गुरु योग।
✓•१३. वैश्विक प्रभाव: •युद्ध समाप्ति के समय- •तेल बाजार अस्थिर- •चीन आर्थिक दबाव में- •रूस को अप्रत्यक्ष हानि
•यूरोप को रणनीतिक लाभ
✓•१४. निष्कर्ष:
समस्त ज्योतिषीय एवं गणितीय विश्लेषण से निम्न निष्कर्ष प्राप्त होते हैं —
•१. युद्ध चर लग्न में आरम्भ हुआ।
•२. मंगल अस्त होने से युद्ध दीर्घकालिक नहीं।
•३. नक्षत्र चक्र के अनुसार निर्णायक मोड़ १८–२७ दिन में।
•४. मंगल वेध समाप्ति लगभग २४ दिन में।
∆अतः युद्ध की सम्भावित समाप्ति —
•२२ मार्च २०२६ से २६ मार्च २०२६ के मध्य।
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