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इतिहास के गौरव और भविष्य का अध्याय बताने वाली पुस्तक के लेखक का मनोगत

दिल्ली में, केशवकुंज, झंडेवाला में, खजाने की शोधयात्रा के हिंदी तथा गुजराती संस्करण का लोकार्पण एक स्मरणीय तथा प्रभावशाली समारोह में संपन्न हुआ।

मैंने प्रारंभ में पुस्तक की भूमिका रखी। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, प्रज्ञा प्रवाह के अखिल भारतीय संयोजक माननीय जे. नंदकुमार जी ने इस पुस्तक के महत्व के साथ ही खजाने की शोधयात्रा क्यों आवश्यक है, इस पर प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा:

“इस पुस्तक से स्पष्ट हो जाएगा कि भारत ही एकमात्र ऐसा देश है जो ज्ञान देने और लेने की प्रक्रिया में परमानंद और आनंद प्राप्त करता है। हमारे देश में नाम भी सोच-विचारकर रखे जाते हैं, नाम देने की एक परिपाटी है, परंपरा है। राम हों या श्रीकृष्ण, हमारे यहां आंतरिक गुणों के आधार पर नाम रखे जाते हैं; दूसरे कल्चर में बाहरी लक्षणों को देखकर नाम रखे जाते हैं।

प्रशांत जी की पुस्तक के माध्यम से भारतीय ज्ञान परंपरा के संदर्भ में ज्ञान प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। इसका पहला मुद्दा है कि भारतीय ज्ञान परंपरा निरंतर सुधार की प्रक्रिया (continuous corrective mechanism) पर आधारित है। भारतीय ज्ञान परंपरा में प्रमाण को महत्व दिया जाता है। तीसरा, यह नवाचार के माध्यम से आगे बढ़ती है।

यह एक साहसिक पहल है, इसका फलक व्यापक और सर्वग्राही है, यह समावेशी है, अन्योन्याश्रित भी है, अंतर्संबंध भी है। इसे देखने का नजरिया बदलने की जरूरत है। यह पुस्तक ‘जय’ की द्योतक है। इसमें 18 अध्याय हैं, यह एक जनप्रिय पुस्तक है, लेखक ने अपनी अद्भुत रचनात्मक शैली के माध्यम से विज्ञान, इतिहास, गणित जैसे विषयों को सुरुचिपूर्ण तरीके से प्रस्तुत किया है।”

लोकार्पण के अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार एवं विचारक, पूर्व राज्यसभा सांसद माननीय बलबीर पुंज जी ने कहा:

“पुस्तक का कलेवर बहुत सुंदर है, इसका कंटेंट भी अच्छा है, प्रस्तुति भी सुंदर है, शब्द विन्यास से पाठक बंध जाता है।

यह एक सिक्वल है। इस पुस्तक का अंग्रेजी वर्जन भी आना चाहिए। हमारी सनातन संस्कृति अनेक बाह्य हमलों के कारण ध्वस्त हुई। बौद्धिक विरासत को नष्ट किया गया। अगर लगातार ये हमले नहीं होते तो विश्व का इतिहास और भूगोल बदला हुआ होता। अब तक हम अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे थे, अब हम ज्ञान परंपरा पर कार्य कर रहे हैं।”

कार्यक्रम का संचालन ‘प्रभात प्रकाशन’ के प्रभात कुमार जी ने किया।

समारोह के अंत में गुजरात से पधारे भारत विचार मंच के सचिव ईशान जोशी जी ने लेखक तथा प्रकाशक का आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।

इस कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह माननीय दत्तात्रेय होसबळे जी के साथ अनेक वरिष्ठ सारस्वत अतिथि उपस्थित थे।

खजाने की शोधयात्रा अब सभी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध है।
Khazane Ki Shodhyatra: https://amzn.in/d/4uOvf4b

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