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बसंत पंचमी पर हिंदू सुबह-शाम करेंगे पूजा, मुस्लिम दोपहर में पढ़ेंगे जुमे की नमाज

भोजशाला विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला, धार में 8000+ सुरक्षाकर्मी तैनात

मध्य प्रदेश के धार की ऐतिहासिक भोजशाला में कल बसंत पंचमी और जुमे की नमाज एक साथ होने के कारण छिड़ा विवाद अब शांत हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (22 जनवरी 2026) को एक बड़ा फैसला सुनाते हुए साफ किया है कि कल वहाँ पूजा और नमाज दोनों होगी।

कोर्ट के आदेश के मुताबिक, दोपहर 1 बजे तक हिंदू पक्ष पूजा कर सकेगा, जिसके बाद 1 से 3 बजे के बीच मुस्लिम पक्ष को नमाज अदा करने का समय दिया गया है। 3 बजे के बाद हिंदू पक्ष फिर से अपनी पूजा जारी रख सकेगा। कोर्ट ने प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि दोनों पक्षों के लिए अलग-अलग जगह और विशेष पास की व्यवस्था की जाए।

हिंदू पक्ष की ओर से वकील विष्णु शंकर जैन ने माँग की थी कि बसंत पंचमी के दिन पूरे समय सिर्फ पूजा की इजाजत दी जाए और नमाज को रोका जाए। उनका कहना था कि पूजा सूर्योदय से सूर्यास्त तक चलती है।

वहीं, मुस्लिम पक्ष की तरफ से सलमान खुर्शीद ने पैरवी की। दोनों पक्षों को सुनने के बाद चीफ जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने कहा कि दोनों समुदाय प्रार्थना कर सकते हैं, बस प्रशासन को सुरक्षा और व्यवस्था का ध्यान रखना होगा। मध्य प्रदेश सरकार ने भी कोर्ट को भरोसा दिलाया है कि कानून-व्यवस्था की कोई समस्या नहीं होने दी जाएगी।

इस संवेदनशील मामले को देखते हुए धार जिले में सुरक्षा के बेहद कड़े इंतजाम किए गए हैं। पूरे शहर में 8000 से ज्यादा पुलिसकर्मी और सुरक्षा बल तैनात हैं। चप्पे-चप्पे पर सीसीटीवी से नजर रखी जा रही है। प्रशासन ने पहले ही भोजशाला के 300 मीटर के दायरे को ‘नो-फ्लाइंग जोन’ बना दिया है, यानी वहां ड्रोन या कोई भी उड़ने वाली चीज ले जाना सख्त मना है।

भोजशाला को हिंदू पक्ष माँ सरस्वती का मंदिर (वाग्देवी) मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला की मस्जिद कहता है। साल 2003 से यहाँ की व्यवस्था यह थी कि मंगलवार को हिंदू पूजा करते थे और शुक्रवार को नमाज होती थी। लेकिन इस बार 23 जनवरी को बसंत पंचमी और शुक्रवार एक ही दिन पड़ गए, जिससे यह मामला गरमा गया। फिलहाल, एएसआई (ASI) के सर्वे की रिपोर्ट भी कोर्ट में लंबित है।

किसी भी तरह के तनाव से बचने के लिए प्रशासन ने सड़कों पर टायर, मलबा या निर्माण सामग्री रखने पर भी रोक लगा दी है। उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं से शांति बनाए रखने की अपील की गई है ताकि कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए दोनों पक्षों के धार्मिक आयोजन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सकें।

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