सेवा में,
माननीय गृहमंत्री जी,
भारत सरकार,
नई दिल्ली।
महोदय,
सविनय निवेदन है कि कारपोरेट कार्य मंत्रालय द्वारा राजभाषा अधिनियम, 1963 की धारा 3(3) तथा राजभाषा नियमावली, 1976 के प्रावधानों का निरंतर उल्लंघन किया जा रहा है। मंत्रालय न केवल राजभाषा का वास्तविक प्रयोग रोक रहा है, बल्कि राजभाषा विभाग एवं संसदीय राजभाषा समिति के समक्ष भी लगातार झूठे आँकड़े प्रस्तुत कर रहा है।
प्रमुख आरोप :
हिन्दी वेबसाइट केवल दिखावा
मंत्रालय की वेबसाइट https://www.mca.gov.in/content/mca/global/en/home.html पर 2010 से स्थायी रूप से संदेश लिखा है—
“हिंदी वेबसाइट पर कुछ सूचना और दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में, पूरी जानकारी हेतु कृपया अंग्रेजी वेबसाइट देखें।”
इसका अर्थ है कि 15 वर्षों से मंत्रालय ने हिन्दी सामग्री उपलब्ध ही नहीं कराई।
धारा 3(3) का सतत उल्लंघन
गत 15 वर्षों में मंत्रालय द्वारा जारी 232 परिपत्र केवल अंग्रेजी में जारी हुए।
अधिसूचना को छोड़कर धारा 3(3) में उल्लिखित अन्य 13 प्रकार के दस्तावेज भी पूरी तरह अंग्रेजी में ही जारी होते हैं।
राजभाषा नियमावली, 1976 का उल्लंघन
हिंदी में प्राप्त पत्रों के उत्तर दिये ही नहीं जाते हैं, और भूल से कभी दिए जाते हैं तो वे अंग्रेजी में होते हैं, यह नियम 5 (हिंदी पत्राचार) का 100 प्रतिशत उल्लंघन है।
मंत्रालय के मुख्यालय व अधीनस्थ कार्यालयों में नामपट, रबर मुहरें, आयोजनों के बैनर, उपयोग किए जाने वाले पत्रशीर्ष आदि केवल अंग्रेजी में तैयार किये जाते हैं।
मंत्रालय की ऑनलाइन सेवा शिकायत प्रणाली (सर्विस कंप्लेंट) जानबूझकर पूरी तरह अंग्रेजी में रखी गई है ताकि सामान्य नागरिक हिन्दी में शिकायत ही नहीं कर सकें इससे यह सिद्ध होता है कि मंत्रालय के शीर्ष अधिकारी मंत्रालय में राजभाषा के प्रयोग को अलिखित रूप में प्रतिबंधित कर चुके हैं, जो बहुत गंभीर व निंदनीय है।
पीजी पोर्टल पर की गई हिन्दी शिकायतें बिना उत्तर दिए बंद कर दी जाती हैं।
हिन्दी में दायर आरटीआई आवेदनों के उत्तर अंग्रेजी में दिए जाते हैं।
झूठी रिपोर्टिंग और जवाबदेही से पलायन
मंत्रालय के मुख्यालय के राजभाषा अधिकारी त्रैमासिक रिपोर्टों में 100% झूठे आँकड़े भरते हैं, और राजभाषा संबंधी जन शिकायतों की चर्चा शीर्ष अधिकारियों से नहीं करते हैं इससे मंत्रालय में राजभाषा की बड़े पैमाने पर उपेक्षा की जा रही है।
केंद्रीय राजभाषा कार्यान्वयन समिति की पिछली बैठक में भी मंत्रालय के अधिकारियों ने राजभाषा विभाग को झूठी जानकारी दी।
शिकायतकर्ता ने गत 6 माह में 4–5 बार लिखित रूप से इन झूठों का पर्दाफाश किया। (प्रमाण संलग्न है)
राजभाषा विभाग ने मंत्रालय को इस विषय में पत्र भी लिखा, किंतु आज तक मंत्रालय का कोई अधिकारी उत्तर देने का साहस नहीं कर सका।
स्पष्ट है कि जब झूठ पकड़ा गया है तो उत्तर देना उनके लिए कठिन है, परंतु नैतिक दायित्व है कि वे अपनी गलती स्वीकार करें — जिसे मंत्रालय ने जानबूझकर नहीं निभाया।
मंत्रालय ने अपनी वेबसाइट पर राजभाषा अनुपालन के लिए उत्तरदायी संयुक्त सचिव व राजभाषा अधिकारियों व अनुवादकों के संपर्क विवरण (नाम, पदनाम, ईमेल, दूरभाष आदि) प्रकाशित नहीं किये हैं ताकि जनता इनसे सीधे सवाल-जवाब न कर सके व राजभाषा का उल्लंघन लगातार चलता रहे।
कार्रवाई का निवेदन – मंत्रालय द्वारा किए जा रहे इन घोर उल्लंघनों एवं नैतिक गैर-जिम्मेदारी को देखते हुए आपसे प्रार्थना है कि—
मंत्रालय के विरुद्ध कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
मंत्रालय की वेबसाइट, परिपत्र, अधिसूचनाएँ, पत्र-व्यवहार एवं ऑनलाइन प्रणालियाँ तत्काल द्विभाषी बनाई जाएँ।
मंत्रालय के अधिकारियों एवं राजभाषा अधिकारी की जिम्मेदारी तय कर उनके विरुद्ध विभागीय जाँच कराई जाए।
केंद्रीय राजभाषा कार्यान्वयन समिति के समक्ष भविष्य में गलत जानकारी देने वाले अधिकारियों एवं त्रैमासिक रिपोर्टों में 100% झूठे आँकड़े भरने वाले अधिकारियों को दंडित करने की स्पष्ट नीति बनाई जाए।
आपके स्तर से इस शिकायत पर शीघ्र और ठोस कार्रवाई की अपेक्षा है।
सधन्यवाद।
भवदीय,
अभिषेक कुमार
ग्राम सुल्तानगंज, तहसील बेगमगंज,
जिला रायसेन, मध्यप्रदेश – 464570
प्रतिलिपि:
सचिव, राजभाषा विभाग, भारत सरकार।
सचिव, संसदीय राजभाषा समिति।
सचिव, कारपोरेट कार्य मंत्रालय

