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मृत माँ के शरीर ने तीन दिन तक अबोध बेटी को जीवित रखा

नौ महीने की नन्ही ग्रेट मिलर 7 नवम्बर 1917 को केंटकी के एप्पलाचियन पहाड़ों में एक सुनसान लकड़ी के केबिन में अपनी मां की निर्जीव देह के पास जीवित पाई गई।

ग्रेट तीन दिनों तक अपनी मां के शव के साथ अकेली रही — तीन दिन तक वह बार-बार अपनी मृत मां का दूध पीने की कोशिश करती रही, रो-रोकर अपनी आवाज खो बैठी, और अंत में चुप होकर अपनी मां के ठंडे शरीर से लिपटकर लेट गई… मानो मौत का इंतज़ार कर रही हो।

जब एक पड़ोसी परिवार का हालचाल जानने आया, तो उसने ग्रेट को मां के निर्जीव शरीर से सटी हुई पाया — भूखी, प्यास से कमजोर, लेकिन जिंदा। बाद में उस पड़ोसी ने कहा कि वह दृश्य उसे जीवन भर सताता रहा। जब उसने बच्ची को उठाया, तो वह रो भी नहीं पाई — बस एक हल्की सी कराह निकली, जैसे किसी घायल प्राणी की… एक ऐसी बच्ची की आवाज, जिसके आंसू और उम्मीद दोनों खत्म हो चुके हों।

ग्रेट की मां रेचल मिलर, केवल उन्नीस वर्ष की थीं। वह खुद भी एक बालिका वधू थीं — तेरह साल की उम्र में उनकी शादी कर दी गई थी। उनका पति उन्हें गर्भवती छोड़कर चला गया था, और वह सबसे नजदीकी पड़ोसी से सोलह मील दूर एक केबिन में अकेली रहती थीं।

4 नवम्बर 1917 को गर्भपात की जटिलताओं के कारण रेचल की मृत्यु हो गई। वह केबिन में अकेली थीं — तीस मील तक कोई डॉक्टर नहीं था। उनकी नौ महीने की बेटी ग्रेट उनकी आंखों के सामने उन्हें खून बहाते हुए मरते देख रही थी।

मरने से पहले रेचल ने आखिरी बार अपनी बेटी को दूध पिलाया। मरते हुए भी उन्होंने अपनी बच्ची को सीने से लगाया और जो कुछ उनके पास बचा था, वह उसे दे दिया।

उनकी मृत्यु के बाद ग्रेट तीन दिन तक मां के शव के पास लेटी रही — बार-बार दूध पीने की कोशिश करती, रोती, समझ नहीं पाती कि मां क्यों नहीं उठ रही, क्यों उसे गोद में नहीं ले रही।

जिस पड़ोसी ने ग्रेट को पाया, उनका नाम थॉमस वेब था। उन्होंने बच्ची को उठाया — वह इतनी कमजोर थी कि ठीक से रो भी नहीं पा रही थी। थॉमस उसे अपने घर ले गए। उनकी पत्नी मार्था ने उसे नहलाया, पानी पिलाया और खाना खिलाया। ग्रेट ने पानी ऐसे पिया जैसे वह प्यास से मरने वाली थी — और सच में वह मौत के बेहद करीब थी। फिर वह लगातार सोलह घंटे तक सोती रही।
थॉमस और मार्था वेब ने ग्रेट को पाला-पोसा। ग्रेट 2003 तक जीवित रहीं और 86 वर्ष की आयु में उनका निधन हुआ।

उन्हें उस घटना की कोई याद नहीं थी — वह बहुत छोटी थीं। लेकिन समुदाय में उनकी कहानी बार-बार सुनाई जाती रही — नौ महीने की बच्ची, जो तीन दिन तक अपनी मृत मां के पास पड़ी रही।

1985 में, जब ग्रेट 68 वर्ष की थीं, एक इतिहासकार ने उनका साक्षात्कार लिया। उन्होंने कहा: “मुझे अपनी मां याद नहीं। मैं नौ महीने की थी जब वह मर गईं। लोग मुझे बताते हैं कि मैं तीन दिन तक उनकी लाश के पास पड़ी रही, दूध पीने की कोशिश करती रही। लोग कहते हैं कि मेरा बच जाना चमत्कार है। लेकिन मैं इसलिए बची क्योंकि मेरी मां ने मरने से पहले आखिरी बार मुझे दूध पिलाया। उन्होंने अपना सब कुछ मुझे दे दिया।

मेरी मां उन्नीस साल की थीं। वह अकेली मरीं। खून बहता रहा। उनका आखिरी ख्याल अपनी बच्ची को खिलाना था।

मैं छियासी साल जिंदा रही — क्योंकि मेरी मां का आखिरी काम मुझे दूध पिलाना था। मेरी जिंदगी का हर दिन मेरी मां की आखिरी सांस का तोहफा है।

मैंने उन्हें कभी नहीं जाना। लेकिन मैं जानती हूं उन्होंने मेरे लिए क्या किया। यही प्यार है। यही मां का प्रेम है — जब मौत सामने हो और देने के लिए कुछ भी न बचा हो… सिवाय अपने बच्चे को एक आखिरी बार खिलाने के।”

साभार- https://www.facebook.com/HistoryUnfolded05 से

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#मां_का_प्यार

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