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वे आठ सूत्र जिनकी वजह से भारत विश्व गुरु था और विश्व गुरू बन सकता है

हमारा वैदिक साहित्य मात्र धर्म, संस्कृति और जीवन जीने का ज्ञान नहीं देता है बल्कि उसमें युध्द नीति से लेकर कूटनीति, राजनीति और शासन-प्रशासन चलाने से लेकर राष्ट्र धर्म, राजधर्म, लोकनीति, अर्थशास्त्र, व्यापार, विदेशी नीति के तमाम ऐसे सूत्र हैं जिनकी वजह से हमारा देश विश्व गुरु था और आज भी अगर हम हमारे वैदिक वांग्मय के 8 सूत्रों को अपना लें तो हम दुनिया भर में अपनी धाक जमा सकते हैं।

ये विचार हिंदू मैनिफेस्टो के लेखक वर्ल्ड हिंदू फाउंडेशन (WHF) के संस्थापक व अध्यक्ष तथा विश्व हिंदू परिषद (VHP) के संयुक्त महासचिव स्वामी विज्ञानानंदजी ने एनएसई के भव्य सभागार में आयोजित  हिंदू मैनिफेस्टो  के  लोकार्पण कार्यक्रम में व्यक्त किए। कार्यक्रम की अध्यक्षता एनएसी के सीईओ श्री आशीेष चौहान ने की।

कार्यक्रम का संटालन श्रीमती दीपा सिंह ने किया व अंत में आभार श्री शैलेष त्रिवेदी ने माना।

पुस्तक का लोकार्पण  स्वामी विज्ञानानंद जी व श्री आशीष चौहान के साथ हिंदू इकानामिक फोरम के श्री स्वदेश खेतावत व श्री रविकांत मिश्रा ने किया।

कार्यक्रम के प्रारंभ में श्रीमती सपना अमित द्वारा हिंदू मैनिफेस्टो पर व्यक्त किए गए विचारों की वीडिओ का प्रदर्शन भी किया गया। श्रीमती सपना अमित अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से भारतीय वैदिक साहित्य व संस्कृति को आधुनिक परिवेश के साथ प्रचारित करने का कार्य कर रही है।

स्वामी विज्ञानानंद जी ने कहा कि हिंदू मेनिफेस्टो (The Hindu Manifesto) हिंदू सभ्यता के पुनरुद्धार के लिए एक क्रांतिकारी ब्लूप्रिंट है, जो प्राचीन हिंदू शास्त्रों से प्रेरित होकर आधुनिक समाज, शासन और नैतिकता की चुनौतियों का समाधान प्रस्तुत करती है। यह पुस्तक केवल एक घोषणा-पत्र नहीं, बल्कि एक सक्रिय आह्वान है—जो व्यक्तियों, समुदायों और राष्ट्रों को हिंदू सिद्धांतों को अपनाने के लिए प्रेरित करती है, ताकि न्यायपूर्ण, समृद्ध और सामंजस्यपूर्ण विश्व का निर्माण हो सके।

यह पुस्तक वर्षों के गहन शोध का परिणाम है, जिसमें वेद, रामायण, महाभारत, अर्थशास्त्र, शुकनीतिसार और मनुस्मृति जैसे दर्जनों पवित्र ग्रंथों से उद्धरण लिए गए हैं। स्वामी जी ने इसे  “सभ्यता पुनरुत्थान का ब्लूप्रिंट” बताते हुए कहा कि ये पुस्तक  हिंदू परंपरा को पश्चिमी पूंजीवाद या समाजवाद से अलग एक संतुलित आर्थिक-सामाजिक मॉडल के रूप में प्रस्तुत करती है।

इस अवसर पर कार्यक्रम के मुख्य अतिथि नेशनल स्टॉक एक्स्चेंज (एएसई) के सीईओ श्री आशीष चौहान ने कहा कि हमारी भारतीय जीवन शैली में हमारी सफलता के सारे राज छुपे हैं। उन्होंने कहा कि अगर देश के सभी हिंदू चाहें तो पुरी दुनिया में अपनी हिंदी पहचान बना सकते है।  यह पुस्तक इसी सोच को कई आयामों के साथ प्रस्तुत करती है।  उन्होंने कहा कि विदेश यात्रा के दौरान हमें कई बार अपना शाकाहारी भोजन नहीं मिल पाता है, यदि हिंदू लोग चाहें और संकल्प लें तो पूरी दुनिया में हिंदी भोजन की मांग पैदा कर इसे एक पहचान दे सकते हैं।

उन्होंने कहा कि आज देश के सफल व दूरदर्शी नेतृत्व की वजह से पूरी दुनिया में भारत की एक सम्मानजनक पहचान बनी है। हिंदू मैनिफेस्टो जैसी पुस्तक हर घर में पहुँचना चाहिए और हर व्यक्ति को अपने मित्र या साथी को ये पुस्तक भेंट में देकर हिंदू समाज की शक्ति को घर-घर पहुँचना चाहिए।

स्वामी विज्ञानानंद जी ने अपनी बात को विस्तार देते हुए कहा कि यह पुस्तक हिंदू सिद्धांतों को आधुनिक संदर्भ में पुनर्व्याख्या करती है, ताकि वैश्विक चुनौतियों का सामना हो सके। स्वामी जी कहते हैं, “हिंदू विचार हमेशा वर्तमान की आवश्यकताओं को संबोधित करता है, लेकिन ऋषियों के सूत्रों में निहित शाश्वत सिद्धांतों पर दृढ़ रहता है।” स्वामी जी ने पुस्तक के महत्वपूर्ण सूत्रों को रेखांकित करते हुए  कहा,“धर्म” को यहाँ सिर्फ धार्मिक कर्मकाण्ड तक सीमित नहीं माना गया। यह जीवन में कर्तव्य, नैतिकता, सामाजिक उत्तरदायित्व का भाव है।

  • शिक्षा केवल ज्ञान अर्जन नहीं बल्कि चरित्र निर्माणराष्ट्रीय प्रेमवैज्ञानिक दृष्टि और भारतीय संस्कृति-स्वाभिमान के बीच समन्वय होना चाहिए। India Today
  • रक्षा-सुरक्षा को सिर्फ सैन्य दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि “सभ्याता-रक्षा”, “संस्कृति-रक्षा”, “मानव-साध्यता-रक्षा” के रूप में देखा गया है।
  • सामाजिक व्यवस्था में भेदभाव-विरोधी दृष्टिकोण है — जाति, वर्ण-विभाजन आदि मूल रूप से हिंदू परंपरा में भेदभाव नहीं बल्कि समान-मानवता थी।
  • पर्यावरण, मातृभूमि, प्रकृति को सिर्फ संसाधन नहीं बल्कि पवित्रता-का अनुभव देने वाला आयाम माना गया है।

इसमें आठ संस्कृत सूत्र (प्रमुख सिद्धांत) प्रस्तुत किए गए हैं, जो धर्म-केंद्रित राज्य की कल्पना करते हैं। ये सूत्र समृद्धि, न्याय, शासन, शिक्षा, राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक सद्भाव जैसे आधुनिक मुद्दों को हिंदू दर्शन से जोड़ते हैं।ये सूत्र राम राज्य की अवधारणा पर आधारित हैं, जहां शासन न्यायपूर्ण, समावेशी और धर्म-आधारित हो। ये सूत्र हिंदू समाज को पुनः संरक्षित करने का आह्वान करते हैं, जहां पर्यावरण संरक्षण, महिलाओं की गरिमा और सामाजिक सद्भाव प्राथमिक हैं।सामाजिक: जाति-आधारित भेदभाव की गलतफहमियों को दूर कर एकता बढ़ाती है।

हिंदू मैनिफेस्टो में भारतीय वांगमय के जिन आठ प्रमुख सूत्रों को आधार बनाया गया है वे हैं-

  1. धर्मार्थकाममोक्षसिद्धये
    आर्थिक समृद्धि (अर्थ),नैतिक जीवन (धर्म),इच्छापूर्ति (काम) और आध्यात्मिक मुक्ति (मोक्ष) को संतुलित करना। हिंदू सभ्यता में धन सृजन को पवित्र माना गया है।

समृद्धि के लिए सभी का विकास: आर्थिक समृद्धि (अर्थ), नैतिक जीवन (धर्म), इच्छापूर्ति (काम) और आध्यात्मिक मुक्ति (मोक्ष) को संतुलित करना। हिंदू सभ्यता में धन सृजन को पवित्र माना गया है।

2. राष्ट्ररक्षायां प्रथमं प्रयत्
राष्ट्र की रक्षा के लिए प्रथम प्रयास करें। शत्रु की पहचान और संरक्षण पर जोर। हिंदू इतिहास से उदाहरण देकर सैन्य शक्ति और रणनीति को मजबूत करने का आह्वान किया गया है।

3.विद्यया संस्कारयते जनः
शिक्षा से जन को संस्कारित किया जाए। गुणवत्ता वाली शिक्षा: ज्ञान-आधारित समाज का निर्माण, जहां शिक्षा बौद्धिक और आध्यात्मिक उत्कृष्टता प्रदान करे। पश्चिमी मॉडल से अलग, हिंदू ग्रंथों पर आधारित हो।

4.धर्मेन राज्यं प्रशासति
धर्म से राज्य का प्रशासन करें। जिम्मेदार लोकतंत्र: राम राज्य जैसा शासन, जहां नेता धर्म (नैतिकता) से निर्देशित हों। समावेशी और न्यायपूर्ण निर्णय प्रक्रिया हो।

5.स्त्रीषु सम्मानं विधीयते
स्त्रियों में सम्मान स्थापित हो। हिंदू ग्रंथों में स्त्री को देवी माना गया है।

6.सामाजिकं सद्भावना रक्षति
सामाजिक सद्भावना की रक्षा करें। सामाजिक सद्भाव: वर्ण और जाति के गलत अर्थों का खंडन किया गया है। गरिमा, समानता और एकता पर आधारित समाज, जहां कोई भेदभाव न हो।

8. प्रकृतिं पवित्रं मंथति
प्रकृति को पवित्र मानकर संरक्षित करें। प्रकृति की पवित्रता: पर्यावरण संरक्षण को धर्म का हिस्सा माना गया है। सतत और सामंजस्यपूर्ण जीवनशैली, वेदों से प्रेरित है।

  1. स्वकीयं संस्कृतिं संनादति
    अपनी संस्कृति का सम्मान करें। अपनी विरासत का सम्मान हो।  हिंदू पहचान, वैश्विक हिंदू एकता और सांस्कृतिक कूटनीति से भारत को आध्यात्मिक शक्ति का केंद्र बनाना।

ये सूत्र न केवल आदर्श हैं, बल्कि कार्यान्वयन का आह्वान भी करते हैं। पुस्तक में इन्हें आधुनिक संदर्भों (जैसे अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और वैश्विक हिंदू एकता) से जोड़ा गया है। स्वामी जी के अनुसार, ये सूत्र “धर्मिक राष्ट्र” की नींव रखते हैं, जहां हिंदू सिद्धांत सभी के लिए समृद्धि और न्याय सुनिश्चित करें।

स्वामी विज्ञानानंदजी के बारे में

स्वामी जी विश्व हिंदू फाउंडेशन (WHF) के संस्थापक एवं वैश्विक अध्यक्ष हैं, साथ ही विश्व हिंदू परिषद (VHP) के संयुक्त महासचिव हैं। एक आईआईटी स्नातक होने के बावजूद, उन्होंने आध्यात्मिक जीवन अपनाया और हिंदू धर्म के पुनरुत्थान के लिए वैश्विक मंच जैसे वर्ल्ड हिंदू कांग्रेस और वर्ल्ड हिंदू इकोनॉमिक फोरम की स्थापना की।

पुस्तकः द हिंदू मेनिफेस्टो (The Hindu Manifesto: A Blueprint for Civilizational Resurgence)
लेखक: स्वामी विज्ञानानंद
प्रकाशक: BluOne Ink
पृष्ठ संख्या: 448 (पेपरबैक संस्करण)
ISBN: 9789365474978
उपलब्धता: अमेज़न (भारत और अंतरराष्ट्रीय), हिंदू एशॉप आदि पर उपलब्ध।

श्री आशीष चौहान के बारे में

श्री आशीष चौहान नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) हैं। वह बीएसई के पूर्व एमडी और सीईओ भी रह चुके हैं और उन्हें भारत में आधुनिक वित्तीय डेरिवेटिव्स के जनक के रूप में जाना जाता है। चौहान को सूचना प्रौद्योगिकी, वित्त और बाजार संरचना में विशेषज्ञता हासिल है, और वह एनएसई के संस्थापक सदस्यों में से एक हैं।  वह उस टीम का हिस्सा थे जिसने मूल रूप से एनएसई की स्थापना की थी और जिसे अब एनएसई माना जाता है।  उन्‍होंने भारतीय स्‍टॉक मार्केट को आधुनिक बनाने में सबसे ज्‍यादा योगदान दिया है. वे भारतीय फाइनेंशियल डेरिवेटिव्स के जनक हैं. चौहान बीएसई की कमान संभाल चुके हैं और रिलायंस इंडस्‍ट्रीज में भी बड़े पद पर काम कर चुके हैं. उन्‍हीं के नेतृत्‍व में बीएसई दुनिया का सबसे तेज एक्सचेंज बना दिया।

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