भारत के दूरदराज आदिवासी गावों में अवस्थित एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों (ईएमआरएस) ने एक बड़ा कीर्तिमान स्थापित किया है। वर्ष 2024 -25 में इन स्कूलों के करीब 597 छात्रों ने देश की अत्यंत प्रतियोगी मानी जाने वाली जेईई मेन और जेईई एडवांस तथा नीट की परीक्षा में रिकार्ड सफलता हासिल की है। यह एक बड़ी उछाल है क्योंकि इन स्कूलों से उपरोक्त परीक्षाओं में सफल होने वाले छात्रों की संख्या वर्ष 2022-23 में केवल 2 हुआ करती थी । इन स्कूलों की यह उपलब्धि इस बात को दर्शाती है की कैसे लक्ष्य आधारित शिक्षा के प्रसार के जरिये भारत की अत्यंत उपेक्षित आदिवासी जनजातियों के जीवन में बदलाव और उन्हें बेहतर अवसर प्रदान किया जा सकता है। गौरतलब है की बारहवीं क्लास तक शिक्षा प्रदान करने वाले देश के कुल 230 एकलव्य आदर्श विद्यालयों मे 101 विद्यालयों के छात्रों ने उपरोक्त परीक्षाओं में यह सफलता हासिल की है।
इसमें एक उदाहरण हिमाचल प्रदेश की बसपा घाटी के सांगला गांव के जतिन नेगी का है। इस आदिवासी छात्र ने हिमालय इलाके के गांव की कपकपाती ठंड और बिजली आपूर्ति के अभाव के बावजूद जेईईएडवांस उत्तीर्ण कर आल इंडिया रैंकिंग में 421वा स्थान हासिल किया। अभी यह लड़का आईआईटी जोधपुर का छात्र है। इसी तरह दूसरा उदाहरण गुजरात के खपाटिया गांव की लड़की पदवी ऊर्जस्वी बेन अमृतभाई का है, इस लड़की ने प्रदेश के बरटांड़ स्थित एकलव्य विद्यालय में पढ़कर नीट की परीक्षा उत्त्तीर्ण की। यह लड़की जूनागढ़ स्थित जीएमईआरएस मेडिकल कॉलेज और हॉस्पिटल से एमबीबीएस कर रही है। यानी इसका डॉक्टर बनने का सपना जल्द ही साकार हो जायेगा।
एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय (ईएमआरएस) भारत सरकार द्वारा अनुसूचित जनजाति (एसटी) के छात्रों को कक्षा 6 से 12 तक मुफ्त आवासीय शिक्षा प्रदान करने के लिए स्थापित एक पहल है। इसका उद्देश्य गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना, शैक्षणिक अंतर को खत्म करना और छात्रों को उच्च और व्यावसायिक शिक्षा के लिए तैयार करना है। ईएमआरएस योजना के प्रबंधन के लिए जनजातीय छात्रों के लिए राष्ट्रीय शिक्षा सोसायटी (NESSTS) नामक एक स्वायत्त निकाय की स्थापना की गई है
ये सारी कहानी एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों से मिले जीवन बदलने वाले अवसरों की कहानी है जिसने सैकड़ो आदिवासी बच्चो की तक़दीर बदली।

