महान् शिक्षाविद् प्रो. अच्युत सामंतः संस्थापकः कीट-कीस-कीम्स तथा पूर्व सांसद राज्यसभा और लोकसभा (कंधमाल) पिछले लगभग 30 सालों से न कभी थकते हैं, न ही कभी आराम करते हैं। प्रतिदिन 18-18 घण्टे काम (शिक्षा, स्वास्थ्य, खेलकूद, समाजसेवा तथा लोकसेवा आदि) करते रहते हैं। हंसमुख, सहृय, मृदुभाषी, अति सरल और सहज स्वभाव के प्रोफेसर अच्युत सामंत का व्यक्तिगत जीवन एक खुली किताब है जिसे कोई भी सहजता के साथ पढ़ सकता है। सच कहा जाय तो उनके व्यक्तिगत जीवन-रुपी-किताब का प्रत्येक पन्ना करुणा, दया, सहयोग, सहानुभूति और ऑर्ट ऑफ गिविंग का पावन संदेश देता है।
वे अपने द्वारा स्थापित कीट-कीस के बच्चों को देश का एक चरित्रवान, जिम्मेवार, कर्तव्यनिष्ठ तथा ईमानदार नागरिक बनाते हैं। इसीलिए कीस आज दुनिया की एकमात्र ऐसी शैक्षिक संस्था बन चुकी है जहां पर सिर्फ सच्चरित्र और देशहित के लिए जिम्मेदार नागरिक ही तैयार होते हैं। सच कहा जाय तो चरित्रवान मानव-निर्माण करनेवाली एकमात्र शैक्षिक संस्था कीस है जिसे प्रोफेसर अच्युत सामंत ने बड़े शोक से और करुणा का बीज डालकर तैयार किया है।
लगभग 59 वर्षों से प्रो. अच्युत सामंत का विदेह जीवन सत्य, अहिंसा, त्याग और तपस्या की अमर गाथा बन चुका है। आदिवासी समुदाय के लिए तो वे दानवीर कर्ण हैं। अपने गुरुकुल कीस के आदिवासी बच्चों के जीवन के वे सच्चे पथप्रदर्शक हैं। वे निष्काम भाव से नर सेवा को नारायण सेवा मानकर करते हैं। वे सभी के लिए आलोकपुरुष हैं। वे महात्मा हैं, संत हैं, संन्यासी हैं। उनका पारदर्शीं व्यक्तित्व आदर्श, अनुकरणीय और वंदनीय है। वे अपने अच्छे कार्यों की छाप दूसरों पर अमिट रुप से छोड़ देते हैं। वे अपनी सेवा-धुन के भी पक्के हैं। वे हमेशा यह कहते हैं कि सच कह देना ही सत्य नहीं है और झूठ कह देना ही झूठ नहीं है। जिससे लोगों का सबसे अधिक हित हो वह वाणी सत्य है और जिस वाणी से सबसे अधिक दुख और कष्ट पहुंचे वह झूठ है।
इस प्रकार महान् शिक्षाविद् प्रो. अच्युत सामंत न कभी थकते हैं, न ही कभी आराम ही करते हैं।
(लेखक भुवनेश्वर में रहते हैं और ओड़िशा के साहित्य, संस्कृति से लेकर वहाँ के सामाजिक जीवन पर नियमित लेखन करते हैं)

