Homeपुस्तक चर्चाभारत के महान हिंदू राजा, जिनका नाम इतिहास से गायब है

भारत के महान हिंदू राजा, जिनका नाम इतिहास से गायब है

इतिहास पर समय की धूल को हटा कर वास्तविकता को समझने के लिए उपयोगी पुस्तकें।

1- भारत के पराक्रमी राजा।
पुस्तक में भारत के पराक्रमी राजाओं की गौरवगाथा है। इसमें चोल राजवंश का शासनकाल वर्णित है, जिसने 9वीं से 13वीं शताब्दी तक दक्षिणी भारत पर शासन किया था। चोल राजा अपने सैन्य कौशल, कला और साहित्य के संरक्षण के लिए जाने जाते थे। मराठा साम्राज्य 1674 से 1818 ई. तक चला। मराठा राजाओं ने भारत के राजनीतिक इतिहास में एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई और छत्रपति शिवाजी महाराज जैसे कुछ सबसे प्रमुख राजाओं के शासनकाल को भी संकलित किया गया है, जिन्होंने हिंदवी साम्राज्य की स्थापना की। पेशवा बाजी राव का वर्णन है, जिन्होंने मराठा साम्राज्य का विस्तार किया और एक मजबूत केंद्रीकृत शासन की स्थापना की।

विदेशी आक्रांताओं की कलंक कथा-
भारत पर आक्रमण करने वाले विदेशी शासकों के बुरे कार्यों और अत्याचारों की कहानी। इन कथाओं में, आक्रमणकारियों द्वारा की गई लूटपाट, मंदिरों को तोड़ा जाना, और जबरन धर्म परिवर्तन जैसी घटनाओं का वर्णन है, जिससे भारतीय संस्कृति, धर्म और सामाजिक संरचना पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा।
यह कथाएँ न केवल तलवारों और युद्धों की कहानी हैं, बल्कि उस मानसिक, नैतिक और सांस्कृतिक आक्रमण की भी कहानी है जिसने भारत की आत्मा को झकझोर दिया। इसमें नालंदा विश्वविद्यालय का पुस्तकालय जलाने से लेकर अनेक महत्वपूर्ण मंदिरों व श्रद्धाकेंद्रों को ध्वस्त करना प्रमुख था। इन्हें न केवल ध्वस्त किया गया, बल्कि इन जगहों पर उन्होंने अपने उपासना-स्थलों का निर्माण भी किया।

इसमें मुहम्मद बिन कासिम, महमूद गजनवी, मुहम्मद गोरी, बाबर और ईस्ट इंडिया कम्पनी के कुकर्मों पर प्रकाश डालने का उत्कृष्ट प्रयास भी किया गया है।

प्रथम अध्याय सिकंदर के बारे में बताता है जिसमें उसकी भारत-विजय की योजना और भारत पर उसके आक्रमण के प्रमुख कारणों पर प्रकाश डाला गया है। इसके साथ ही सिकन्दर का पुरु से युद्ध और झेलम के युद्ध का वर्णन भी है। अंत में सिकन्दर की सेना के वापस लौटने की इच्छा और 33 वर्ष की आयु में उसकी मृत्यु बताई गयी है।

पुस्तक का दूसरा अध्याय मुहम्मद बिन कासिम, तीसरा अध्याय महमूद गजनवी, चौथा अध्याय सैयद सालार मसूद ‘गाजी’, पर है वहीँ पांचवा अध्याय भारत पर 17 बार आक्रमण करने वाले मुगल लुटेरे मुहम्मद गोरी पर है। इसके बाद कुतुबद्दीन ऐबक, अलाउद्दीन खिलजी, मुहम्मद बिन तुगलक, चंगेज खां, बख्तियार खिलजी के कुकर्मों का चिट्ठा दिया गया है।
पुस्तक का ग्यारवां अध्याय है क्रूर आक्रांता तैमूर लंग पर। ” सम्भवतः किसी अन्य आक्रमणकारी ने भारत में न तो इतना क़त्लेआम किया था और न ही इतनी क्षति पहुंचाई थी, जितनी की उसने।” यह भारत देश में एक विडंबना है कि ऐसे दुष्ट आक्रांता पर लोग अपने बच्चों के नाम रखते हैं। और इससे भी अधिक दुःखद यह है कि लोग इनको स्टार मानते हैं और फॉलो करते हैं। वास्तव में ऐसे आक्रांता प्रेमियों का सार्वजनिक बहिष्कार होना चाहिए।

अगले अध्याय में आक्रांता फ़िरोज शाह तुग़लक़ जिसके नाम पर तुग़लकाबाद नामक स्थान भारत में है, लेखक ने विस्तारपूर्वक लिखा है। जिसका हल्का सा संकेत इस पंक्ति में है,”बंगाल में हार के बदले के लिए फिरोजशाह ने आदेश दिया कि असुरक्षित बंगाली हिंदुओं का अंग-भंग करके वध कर दिया जाए। अंग- भंग किए गए प्रत्येक हिंदू के ऊपर पुरस्कारस्वरूप एक चाँदी का टका दिया जाता था। हिंदू मृतकों के कटे अंगों की गिनती की गई, जो 1,80,000 थी। ….. “सुल्तान ने ज्वालामुखी मंदिर की मूर्तियों को तोड़ डाला तथा उसके टुकड़ों को वध की गई गऊवों के मांस में मिला दिया तथा इस मिश्रण को बड़ों में भरवाकर ब्राह्मणों की गरदनों में बंधवा दिया और प्रमुख मूर्ति को मदीना भेज दिया।” ऐसे आक्रांता का महिमंडन करने के लिए आज भी किसी जगह का नाम भारत में होना शर्मनाक है।

पुस्तक के अगले दो अध्याय आक्रांताओं बाबर और औरंगजेब की कलंक कथाओं से भरे हुए हैं, जिन्हे पाठकों को बहुत ध्यान से पढ़ना चाहिए। ताकि भारत में आज भी रहने वाली बाबर और औरंगजेब की औलादों को मुंहतोड़ उत्तर दिया जा सके और भारत प्रेमियों के सामने इनको लेकर सत्य का अनावरण किया जा सके। पुस्तक के अगले तीन अध्याय नादिर शाह, अहमद शाह अब्दाली और ईस्ट इंडिया कम्पनी के कुकर्मों का काला चिट्ठा है।

हिन्दू इतिहास – वीरो की दास्तान
पुस्तक में उस संघर्ष का संक्षिप्त और सारगर्भित विवरण है जो हिन्दुओं ने क्रूर विदेशी और विधर्मी आक्रमणकारियों से किया। गागर में सागर की उपमा इसी तरह की पुस्तक के लिए है।

मंदिरों की लूट
लगभग 800 साल के इस्लामिक आक्रमण में मंदिरों कों किस तरह लूटा गया इसका संक्षिप्त विवरण इसमें दिया गया है।

क्या भारत का इतिहास इसके शत्रुओं द्वारा लिखा गया है?
प्रसिद्ध इतिहासकार PN Oak द्वारा लिखित यह छोटी सी पुस्तक उस षड्यंत्र को बताती है जो इतिहास लेखन के नाम पर किया गया।

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