संस्कृति मंत्रालय ने भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा देने और भारत की वैश्विक छवि को बेहतर बनाने के लिए “वैश्विक सहभागिता योजना” लागू की है। इस योजना के मुख्य उद्देश्यों में अन्य देशों के साथ सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करना, द्विपक्षीय सांस्कृतिक संपर्कों को बढ़ावा देना, दुनिया के मंच पर भारत की सांस्कृतिक पहचान को पेश करना और विदेशी पर्यटकों को प्रोत्साहित करना है। वैश्विक सहभागिता योजना के निम्नलिखित 3 घटक हैं:
भारत के महोत्सव, भारत-विदेशी मैत्री सांस्कृतिक समितियों को अनुदान सहायता व अंतर्राष्ट्रीय संगठनों को अंशदान अनुदान
इस योजना के तहत, संस्कृति मंत्रालय ने विदेशों में ‘भारत के महोत्सव’ में भाग लेने के लिए विभिन्न कला रूपों के कलाकारों/समूहों को सूचीबद्ध किया है। विदेशों में आयोजित होने वाले इन महोत्सवों में प्रदर्शन के लिए कलाकारों का चयन इसी सूचीबद्ध सूची से किया जाता है। वर्तमान में, मंत्रालय के पास 627 कलाकार/समूह सूचीबद्ध हैं। इनमें से 119 कलाकार/समूह लोक कला श्रेणी में सूचीबद्ध हैं।
अब तक विभिन्न देशों में 62 ‘भारत के महोत्सव’ आयोजित किए जा चुके हैं। जिन देशों में भारतीय लोक कला और संस्कृति का प्रदर्शन किया गया है, वे हैं: सेनेगल, घाना, लाओस, फिजी, किरिबाती, टोंगा, वानुअतु, नाउरू, तुवालु और कुक द्वीप समूह, त्रिनिदाद और टोबैगो, यूके, तुर्कमेनिस्तान, हंगरी, डेनमार्क, जापान, केन्या, आइवरी कोस्ट, लाइबेरिया, गिनी, श्रीलंका, तंजानिया, उज्बेकिस्तान, ट्यूनीशिया, कतर, क्रोएशिया, कुवैत और फ्रांस।
जुलाई 2025 तक ‘भारत के महोत्सव’ में कुल 2,348 कलाकारों ने भाग लिया है।
वर्तमान वैश्विक सहभागिता योजना 15वें वित्त आयोग चक्र की अवधि तक के लिए मान्य है।
यह जानकारी आज राज्यसभा में केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने एक लिखित उत्तर में दी गई।

