Homeदुनिया मेरे आगेवैश्विक नेतृत्व की ओर बढ़ते भारतीय कदम !

वैश्विक नेतृत्व की ओर बढ़ते भारतीय कदम !

भारत वैश्विक स्तर की समस्याओं के निदान में ‘ महत्वपूर्ण भूमिका’ निभाकर दुनिया में अपने काबिलियत का स्वीकारोक्ति दिखाया है। भारत ने लोकतांत्रिक मूल्यों में प्रबल आस्था, संयुक्त राष्ट्र के सिद्धांतों एवं उद्देश्यों में पूर्ण सहमति, नैतिकता एवं नैतिक मूल्यों में आस्था एवं वैश्विक संस्थानों में अपनी उपादेयता को निभाने में उच्चीकृत भूमिका प्रदान किया है। भारत वर्तमान में विज्ञान, तकनीक, नवाचार, नवोन्मेष एवं उद्योग में महत्ती योगदान कर रहा है।

बदलते भू – राजनीतिक परिदृश्य में “नए भारत” ने हर क्षेत्र में अपनी साख एवं वैश्विक व्यक्तित्व का असाधारण प्रदर्शन करते हुए वैश्विक समुदाय को नेतृत्व कर रहा है। संयुक्त राज्य अमेरिका, चीन, रूस, कनाडा एवं यूरोपियन संघ (EU ) सभी भारत के साथ “निकट संबंध एवं राजनयिक संबंध” बनाने के लिए आतुर है। समकालीन में भारत वैश्विक नेतृत्व की धारिता के लिए तैयार है। भारत वैश्विक स्तर पर अपनी महत्ती भूमिका निभाने के लिए तैयार है। भारत समकालीन में 40 से अधिक देशों को अनाज का निर्यात कर रहा है।

भारत ने स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात से ही’ वैश्विक दक्षिण’ की एकता के लिए काम किया है, ताकि वह इन देशों के विश्वास को जीत सके। “विश्वास भारत की मजबूत पूंजी बन गई है।” इसी विश्वास के कारण यूरोपीय यूनियन, ब्रिटेन एवं संयुक्त राज्य अमेरिका भारत के व्यापार साझेदार बनने के लिए हृदय से आकर्षित हैं। इससे भारत वैश्विक स्तर पर ‘ वैश्विक दक्षिण के देशों’ से अपने हित को सुरक्षित कर सकता है। भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद,( जो वैश्विक व्यवस्था के कार्यकारिणी) है जिसमें संरचनात्मक सुधार की पुरजोर पैरवी करता है एवं सुरक्षा परिषद की स्थाई सदस्यता के लिए अपना दावा भी प्रस्तुत करता है। सुरक्षा परिषद की स्थाई सदस्यता भारत के वैश्विक व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका के लिए अति आवश्यक है। इस तरह भारत वैश्विक स्तर पर शांति ,सुरक्षा एवं स्थायित्व प्रदान करने में महनीय भूमिका का निर्वहन कर रहा है।

भारत वैश्विक स्तर की ‘ तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था ‘ बनने के लक्ष्य की प्राप्ति की दिशा में अग्रसर है। चीन के साथ रिश्तों में सुधार, निवेश से पाबंदियों को हटाने में अथक परिश्रम एवं संयुक्त राज्य अमेरिका से दंडात्मक आयात शुल्क से मुक्ति एवं पारस्परिक आयात शुल्क 18% पर लाना “भारत की कूटनीतिक सफलता” है। इन सबके अतिरिक्त एवं वैश्विक चुनौतियों के बावजूद वित्त वर्ष2025- 2026 के लिए विकास दर 7.4 प्रतिशत है। वैश्विक स्तर के राज्यों के अर्थव्यवस्थाओं में अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की आर्थिक विकास गति स्थाई एवं स्थिरांक को बनाए हुए हैं। इस उपादान के द्वारा भारत वैश्विक स्तर पर अपने नेतृत्व को उन्नयन कर रहा है। भारत ने अपने व्यवहारिकता, राजनीतिक नेतृत्व की दूरदर्शिता एवं उपादेयता के साथ” सामयिक हालात” पर नियंत्रण प्राप्त कर लिया है। भारत ने चुनौतियों को अवसर में बदलकर वैश्विक नेतृत्व में सहयोग किया है। सुधारों के प्रति मजबूत प्रतिबद्धता, व्यापक आर्थिक नीतियों एवं वैश्विक परिस्थितियों से मिले अवसरों की महती भूमिका है।

भारत विकासशील देश होने के नाते ‘ ग्लोबल साउथ के देशों’ के उत्थान की बड़ी नैतिक जिम्मेदारी है। भारत का नैतिक दायित्व है कि ‘ वैश्विक ऋण प्रणाली ‘ को विकासशील देशों के लिए हितकारी बनाएं। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ( आईएमएफ) एवं विश्व बैंक (WB ) की कर्ज देने की” कठोर शर्तों” पर विकासशील देश इनके “मानकों” पर खरे नहीं उतर पाते, जिससे इन देशों को वांछित ऋणनहीं मिल पाता है। यह देश अपने ज्वलंत समस्याओं का आर्थिक अक्षमता के कारण समाधान नहीं कर पाते हैं जिससे उनके शासकीय व्यवस्था से ‘ जन विश्वास’ उठने लगता है।

डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकारी निर्णय के कारण वैश्विक स्तर के विकसित देशों व विकासशील देशों में “मनोनमालिन्य “की स्थिति उत्पन्न हो जा रही है। वीजा नियमों एवं कटौती शुल्क ( टैरिफ) के कारण वैश्विक स्तर की शासकीय नीतियों में भय, दबाव एवं असमर्थता उत्पन्न हो रही है। ऐसी स्थिति में भारत ने “BRICS ” एवं “SCO”के मंचों से संयुक्त राज्य अमेरिका को प्रति संतुलित किया है। वैश्विक स्तर पर इस कदम से ‘ अमेरिका के तानाशाही कार्यकारी निर्णय’ का निष्क्रिय विरोध करके भारत ने उन देशों का साथ दिया है, जो डोनाल्ड ट्रंप की कार्यकारी नीतियों का विरोध नहीं कर पा रहे हैं। भारत संयुक्त राज्य अमेरिका की दादागिरी से परेशान एवं भयभीत विश्व के सभी देशों का नेतृत्व कर रहा है। यही भारत के लिए सबसे उपयुक्त
एवं राजनयिक सफलता है।

भारत को बौद्धिक एवं मानसिक स्तर पर सशक्त होकर वैश्विक नेतृत्व को मार्गदर्शन करना है। वर्तमान सामायिक परिदृश्य में भारत एक समृद्ध , सशक्त एवं महान अर्थव्यवस्था है। यह विश्व समुदाय को सहयोग एवं समन्वय के लिए नेतृत्व कर रहा है। महान आध्यात्मिक संत एवं राष्ट्रवाद के उन्नयन के प्रबल प्रणेता विवेकानंद जी ने” शिशु नेतृत्व” की संकल्पना दिया था, अर्थात विचार, बौद्धिक एवं मानसिक व्यवहार के आधार पर वैश्विक नेतृत्व प्रदान करना है।

भारत वैश्विक स्तर की आपदाओं में राष्ट्रों को बौद्धिक एवं व्यवहार के स्तर पर सहयोग करता है। यह देश के सांस्कृतिक अवयवों में सहयोग करता है। भारत विषम और दुर्लभ क्षणों में सहयोग के लिए तत्पर रहता है। प्राकृतिक आपदाओं में सबसे पहले सहयोग के लिए संकल्पित रहता है। भारत को समृद्ध, सशक्त एवं महानता के साथ वैश्विक स्तर पर सहयोग, समन्वय ,बंधुत्व एवं परिवार भाव की भावना का उन्नयन करके वैश्विक स्तर पर “भारतीय कदम” को बढ़ाना होगा। संपूर्ण मानवता की संरक्षा करना, मानवीय समुदाय को धैर्य देना, मनोबल बढ़ाना एवं सामयिक में संयुक्त राज्य अमेरिका एवं चीन की’ विस्तारवादी नीतियों’ का विरोध करना भारत का वैश्विक स्तर पर’ भारतीयता के भावना ‘ का उन्नयन करना है।

प्रमुख मुद्देः
1. भारत एक तेज, स्थिर एवं प्रदर्शन आधारित अर्थव्यवस्था है, जो वैश्विक निवेशकों का ‘ विश्वसनीय गंतव्य’ है।
2. भारत’ हरित अर्थव्यवस्था’ एवं ‘ नरम शक्ति’ (सॉफ्ट पावर) में केंद्रीय भूमिका निभा रहा है।
3. भारत वैश्विक स्तर पर सहयोग, समन्वय एवं संतुलन की नीति का समर्थक है। यह ‘ जिम्मेदार नेतृत्व’ है जो ग्लोबल साउथ का वैश्विक मंचों पर नेतृत्व कर रहा है।
4. हर देश और हर निवेशक भारत को ‘ प्रथम वरीयता’ दे रहे हैं।
5. भारत वैश्विक स्तर पर ‘ स्वहित’ के बजाय ‘ वैश्विक हित’ की आवाज है।

(लेखक अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना केशवकुंज झंडेवालान, नई दिल्ली के राष्ट्रीय संगठन सचिव हैं)

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