सबसे भली मित्रता कौन-सी?
तो कहते हैं बचपन की। बाल सखाओं ने इस बात को सच कर दिखाया। शहर छोड़ा पर शहर न छूट पाया। इंदौर से दूर रहकर भी इंदौर के कई साथियों को साथ लेकर हमने अपनी यात्रा जारी रखी, जैसे इंदौर से दोस्ती निभाई। इंदौर में ‘यार’ शब्द बहुत प्रचलित है, तो उसे लेकर कह सकते हैं हमने इंदौर से अपना याराना निभाया।
इंदौर छोड़ पुणे आए ज़माना हो गया था और बचपन की गलियों से फिर गुज़रने का कोई अवसर ज़िंदगी कभी देगी ऐसा भी नहीं लग रहा था, लेकिन लॉकडाउन लगा, लोग घरों में बंद हुए और वर्चुअल दुनिया के विंडोज़ खुल गए। एक से दूसरे करते हुए हम बचपन के कई मित्र सोशल मीडिया से जुड़े।
उनमें से बहुतों ने पूछा – “तू अब भी लिखती है क्या?”
मैं ‘हँस पड़ी’, मैंने जवाब दिया – “बस लिखती ही तो हूँ।”
इसी तरह मैंने अब बैंगलुरु में रहते भुवन सरवटे को बचपन की याद दिलाते हुए पूछा कि क्या वह अब भी गाता है, उसने कहा – “संगीत देना अधिक पसंद है।”
मैंने तपाक से पूछ लिया – “मेरे किसी लिखे को संगीत देगा?”
वह भी मान गया। मैंने उसे अपना लिखा भेजा और कुछ ही दिनों में उसने उसे संगीतबद्ध कर दिया। अब इसका क्या किया जाए?
अब कैलिफ़ोर्निया में रहते तीसरे मित्र अमित जोशी ने सुझाव दिया – “इसे यू-ट्यूब पर डाला जाए।” यू-ट्यूब पर अपलोड किए पहले ही गीत ‘बातें पिया की’ को इतना पसंद किया गया, तो गीतों का कारवां चल पड़ा।
कोविड के समय कई लोग आपस में जुड़े थे, कइयों ने बहुतेरा नया शुरू किया था, पर हमारे साथ खास बात यह रही कि हम इसे अब तक जारी रख पाए। नवंबर 2020 से उनकी यह यात्रा अथक जारी है। हर महीने हम कुछ नया, मौलिक देने की कोशिश करते हैं।
अमेरिकी मित्र के साथ टाइम ज़ोन भी अलग हो जाता है, पर बचपन की दोस्ती में न भौगोलिक सीमा आड़े आती है, न समय आड़ आता है।
देखा जाए तो भुवन और अमित दोनों आईटी जगत से हैं और दोनों का ही वैसा वास्ता साहित्य से नहीं, लेकिन जब पता चला कि कक्षा चौथी से आठवीं तक की उनकी सहपाठी रही स्वरांगी अब भी पूर्णकालिक लेखन कर्म कर रही है, तो उन्होंने उसे बढ़ावा देने का तय कर लिया। इन तीनों की दोस्ती कई अलग-अलग मिसालें कायम कर रही है।
एक मिसाल तो यही है कि तीनों अहिंदीभाषी क्षेत्रों से हैं फिर भी हिंदी लेखन को प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष बढ़ावा दे रहे हैं।
चूँकि ये लोग बचपन में एक ही स्कूल में पढ़ते थे, इसलिए अब भी इंदौर में रहते उस स्कूल के मित्रों में अमित के साथ ललित, पंकज, रश्मि, रानू, हिमांशु, विनया, चंद्रभान, कमल, हर्षा, भालचंद्र, रत्नेश आदि ने एक गीत की शूटिंग पुराने स्कूल प्रांगण में ही की।
शहर के तबला गुरु पं. दिनकर मुजुमदार, मध्यप्रदेश की पहली महिला पत्रकार अलकनंदा साने, नृत्य गुरु डॉ. पुरु दाधीच, विभा दाधीच, नरहरि पटेल, पं. संतोष संत, संजय पटेल आदि के साथ वार्ताओं को प्रसारित किया गया।
इंदौर ही की स्मिता वाजपेयी की सितार का साथ कई बार मिला।
शहर के कौशल बरोट, जगदीश बरोट, भरत बरोट, उत्सव मेहता, मनीष मोडक, मृणाल नागर, रूना गुप्ते ने स्वर, गायन-वादन से हमेशा साथ दिया।
शास्त्रीय संगीत से जुड़ते हुए स्वरांगी की एक कविता पर शहर की उर्वी गोरे का कथक भी प्रस्तुत हुआ, जिसे आभा निवसरकर ने पढ़ा।
तनवीर फ़ारूकी के छायाचित्र उसके कलात्मक पक्ष को उभार रहे थे। जिसमें उनके साथ देश-विदेश से भी लोग जुड़ते गए।
स्वरांगी रचित और भुवन द्वारा संगीतबद्ध किसी गीत में सिंगापुर से रविंद्र परचुरे की शास्त्रीय गायिकी है, तो स्वरांगी की किसी कविता को मॉस्को निवासी प्रगति टिपणीस की आवाज़।
अमेरिका में हिंदी को प्रोत्साहन देने का कार्य कर रहे अनूप भार्गव, जो कहते हैं “हिंदी से प्यार है”, स्वरांगी की कई कविताओं को पढ़ चुके हैं।
हुआ यूँ कि इन गीतों-कविताओं का पठन-पाठन, गायन कहाँ हो, उसे मंच कैसे मिले – तो इसके लिए अमित की तरकीब थी कि यू-ट्यूब चैनल खोला जाए।
बस फिर क्या था, अमित के नाम से ‘ए’, भुवन के संगीत की मैलोडी और स्वरांगी के लिरिक्स से नाम बन गया –
🎶 “A Melodious Lyrical Journey”
जिसे आप देख-सुन सकते हैं YouTube पर।
यू-ट्यूब चैनल ने हमें अपनी लिंक का नाम स्वयं देने का अधिकार दिया, तो ‘A Melodious Lyrical Journey’ के साथ जुड़ गया ‘अभिस्वर’।
ऋग्वेद की ऋचा में ‘अभिस्वर’ का अर्थ है – स्तुतियों के अर्थों को यथावत स्वीकार करने/कराने और गाने वाले।
यह हमारे चैनल से इस अर्थ में भी एकरूप था।
साथ ही, अंग्रेजी में अमित की स्पेलिंग से ‘A’, भुवन की स्पेलिंग से ‘B’, ‘H’, और स्वरांगी की स्पेलिंग से ‘स्वर’ लेकर तीनों को परिभाषित भी कर रहा था।
चैनल पर गीत हैं, कविताएँ हैं, कथा और बाल मनोविज्ञान पर आधारित छोटी-छोटी कहानियाँ भी।
वर्णमाला श्रृंखला में क्रमशः अ से श्र तक हर वर्ण है, उस वर्ण से जुड़े सैकड़ों शब्द किसी रूपक में बँधकर पहुँचते हैं ताकि देखने-सुनने वाले एक ही स्थान पर रोचक शैली में उस एक वर्ण से बनने वाले सैकड़ों शब्दों, मुहावरों को जान पाएँ।
एक साल फ्रेंडशिप डे पर हमने कविता अपलोड की, जो महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी, मुंबई द्वारा स्वीकृत अनुदान से प्रकाशित मेरे काव्य संग्रह “वह हँसती बहुत है” की टाइटल कविता है।
मित्रता को नया कलेवर देते हुए उसे पढ़ा अमित ने और संगीत तथा महाराष्ट्र की वारली डिज़ाइन से उसे सजाया भुवन ने।
भुवन की पत्नी सोनाली ने वारली का कॉन्सेप्ट दिया था।
सोनाली ही हमारे पहले गीत की गायिका भी थी।
हम तीनों की मैत्री का इस तरह वह चौथा मज़बूत स्तंभ है।
हमारी यह दोस्ती सार्थकता और सृजनात्मकता के साथ निरंतरता पाते हुए अब पाँच साल पूरे करने जा रही है।

