भुवनेश्वर। कीट डीम्ड विश्वविद्यालय,भुवनेश्वर(ओड़िशा),भारत के 22वें विश्वविद्यालय स्थापना दिवस के अवसर पर चार विशिष्ट अंतर्राष्ट्रीय विभूतियों को कीट लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।
कीट डीम्ड विश्वविद्यालय, भुवनेश्वर (ओड़िशा),भारत के 22वें स्थापना दिवस के अवसर पर विशेष व्याख्यानमाला का आयोजन किया जबकि अवसर पर चार विशिष्ट अंतर्राष्ट्रीय विभूतियों को कीट लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित भी किया गया।सम्मानित अतिथि थे, जॉन ओपेनहैमर, संस्थापक एवं अध्यक्ष, कोलंबिया हॉस्पिटलिटी (अमेरिका) किरिण्डे ओसाजी नायक थिरो, मुख्य अधिष्ठाता, हनुपिटिया गंगाराम मंदिर, कोलंबो, के.एन. शांता कुमार, निदेशक,दी प्रिंटर्स(मैसूर) प्राइवेट लिमिटेड तथा बोर्ड सदस्य, प्रेस ट्रस्ट आफ इण्डिया.
गिट्रुल जिग्मे रिनपोचे, तिब्बती बौद्ध धर्म के आचार्य एवं आध्यात्मिक निदेशक, रीपा इंटरनेश्नल सेंटर, स्विट्ज़रलैंड।
अपने वक्तव्य में जॉन ओपेनहाइमर ने संस्थान की उन्मुक्त कण्ठ से सराहना की। उन्होंने कहा कि कीट प्रांगण उनकी कल्पना से परे है और यह समाज पर स्थायी प्रभाव डाल रहा है। उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा, “आप समाज, अपने परिवार, अपने देश और पूरी दुनिया के लिए महत्वपूर्ण योगदान देने की क्षमता रखते हैं। अपने हृदय की आवाज़ का अनुसरण करें—तब निर्णय लेना आसान हो जाता है।”
मीडिया जगत के वरिष्ठ व्यक्तित्व के. एन. शांता कुमार ने कहा, “कीट केवल एक संस्थान की कहानी नहीं, बल्कि एक दूरदृष्टि की कहानी है।” उन्होंने कहा कि भले ही मीडिया का स्वरूप तेजी से बदल रहा है, परंतु सत्य, विश्वसनीयता, सत्यापन और नैतिक पत्रकारिता आज भी इसकी आधारशिला हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से जिज्ञासु बने रहने, विश्वसनीयता को महत्व देने और जिम्मेदार नागरिक पत्रकारिता को अपनाने का आह्वान किया।
डॉ. किरिंदे अस्साजी नायक थेरो ने इस दिन को “इतिहास का आध्यात्मिक पुनर्मिलन” बताया। उन्होंने कहा कि उन्होंने अनेक देशों और संस्थानों का दौरा किया है, किंतु करुणा, अनुशासन, मानवता और दूरदृष्टि का ऐसा समन्वय विरले ही देखने को मिलता है।
ग्येत्रुल जिग्मे रिनपोछे ने विनम्रता और करुणा पर बल देते हुए कहा, “सफलता पाने वाले बहुत होते हैं, परंतु विनम्र बने रहना ही सच्ची सफलता है।” उन्होंने ‘व्यावहारिक करुणा’ की बात करते हुए कहा कि इसके लिए जटिल दार्शनिक ज्ञान की आवश्यकता नहीं, बल्कि दूसरों के प्रति संवेदनशील हृदय ही पर्याप्त है। उन्होंने अपनी दादी के शब्दों को स्मरण करते हुए कहा, “देने से कोई गरीब नहीं होता। जो नहीं देते, वही सदा गरीब रहते हैं। गरीबी मन में होती है।”
स्वागत भाषण में महान् शिक्षाविद् संस्थापक, प्रेफेसर अच्युत सामंत ने अपने आभार संबोधन में बताया कि कीट की कामयाबी का सफर एक साहसिक स्वप्न और दृढ़ संकल्प के साथ प्रारंभ हुई थी।
उन्होंने कहा, “अब तक की हमारी सारी उपलब्धियाँ कीट-कीस-कीम्स के विद्यार्थियों और कर्मचारियों की हैं। यह उनकी सफलता है।”
इस प्रकार कीट डीम्ड विश्वविद्यालय,भुवनेश्वर(ओड़िशा) भारत का 22वां स्थापना दिवस केवल उपलब्धियों का उत्सव नहीं, बल्कि करुणा, सत्यनिष्ठा, विनम्रता और दूरदर्शी नेतृत्व के मूल्यों का भी उत्सव सिद्ध हुआ।

