Homeकवितामाँ भाषा माँ भारती तुम्हें नमन तुम्हें नमन....

माँ भाषा माँ भारती तुम्हें नमन तुम्हें नमन….

माँ भाषा माँ भारती तुम्हें नमन तुम्हें नमन………………………………….
कामना है तू फले फूले,
याचना है ,तुझे सब पूजें.
धरा गगन का अंत हो जहाँ तक,
उधर उधर तक सब तुझे समझें.
तू मति मेरी, तू मेरा अभिमान,
तू है मैया मेरी, तू मेरी पहिचान.
जो तुझे जाना तो ही जाना संसार,
गर तू मेरे ह्रदय में नहीं तो है सब बर्बाद .
तू इतनी बड़े ,इतनी फले,
सकल विश्व तेरा आधिपत्य में हो,
तू इतनी निखरे, रोशन तुझसे हर ह्रदय हो.
खो गई तू जाने कहाँ,
कहते हैं तुझे भुला दिया.
भुलाना तुझे पढ़ा महंगा,
संस्कारों ने नाता तोड़ दिया.
भारत माँ की एक बहिन को,
भारत माँ से जुदा कर दिया.
जुदा हुई जब ये दो बहिने,
तो यह वीभत्स मचा.
उठ खड़ा संग्राम देखो,
देश भी परेसान हुआ.
इधर उधर भटका हर आदमी,
जैसे अपने देश में मेहमान हुआ.
संस्कार तेरी पहिनी चूनर है,
हम वापस लायेंगे.
सकल विश्व को दिखा दिखा कर,
हम तुझे सजायेंगे.
ओ माँ तू है मैया हमारी,
तुझे छोड़ जी न पाएंगे.
विश्व अधिपत्य होगा तुम्हारा,
वादा हम निभाएंगे.
संग तेरे माँ भारती की ,
खुशियाँ वापस लायेंगे.
भारतवर्ष का वह स्वर्णिम युग,
हम पुनः सजायेंगे.
माँ भाषा ,माँ भारती ,
हमपर तुम विश्वास रखो.
जगद्गुरु फिर कह्लोगी,
इस कसम को मरते दम तक निभाएंगे.
वही राष्ट्र, वही स्वर्णिम युग, माँ भाषा संग लायेंगे,
विकासशील नहीं विकसित देश, चरण छूने आयेंगे.
माँ भाषा, माँ भारती विश्वास रखना,
बच्चे तुम्हारे जान लगायेंगे.
विधि “विप्र” शपथ लेती है, ,
पुनः वही संस्कारी भारत,
स्वच्छ सुन्दर सजायेंगे.
स्वच्छ सुन्दर सजायेंगे.
जय हिन्द , जय भारत.

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