Homeहिन्दी जगतशायद कल हम यहाँ नहीं हों, आज हमें यादों में भर लो…

शायद कल हम यहाँ नहीं हों, आज हमें यादों में भर लो…

कोटा। समरस संस्थान साहित्य सृजन भारत के तत्वावधान में वर्ष 2025 की अंतिम ऑनलाइन विशेष काव्य गोष्ठी का भव्य एवं गरिमामय आयोजन शुक्रवार को सम्पन्न हुआ। यह गोष्ठी साहित्यिक संवेदनाओं, राष्ट्रीय चेतना और रचनात्मक ऊर्जा से ओतप्रोत रही।
काव्य गोष्ठी का कुशल, सौम्य एवं प्रभावी संचालन संस्थान के संचालक एवं संस्थापक डॉ. मुकेश कुमार व्यास ‘स्नेहिल’ जी द्वारा किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता नवगठित जालौर इकाई के वरिष्ठ साहित्यकार श्री मदन लाल बौहरा जी ने की, जिनकी अध्यक्षीय उद्बोधन ने गोष्ठी को वैचारिक ऊँचाई प्रदान की।
गोष्ठी का शुभारंभ श्री राजेश शर्मा जी द्वारा प्रस्तुत भावपूर्ण सरस्वती वंदना से हुआ, जिसने संपूर्ण वातावरण को सरस, पवित्र और सृजनात्मक बना दिया।
इस साहित्यिक संगम में देश के विभिन्न राज्यों- राजस्थान, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश, पंजाब, दिल्ली, कर्नाटक, झारखंड, हरियाणा, महाराष्ट्र एवं गुजरात  से पधारे लगभग 30 साहित्यकारों ने अपनी प्रतिनिधि रचनाओं के माध्यम से काव्य पाठ किया। कवियों ने नूतन वर्ष के स्वागत और विदा होते वर्ष की स्मृतियों,जीवन की क्षणभंगुरता,समाज और सत्ता से उठते प्रश्न,प्रेम, पीड़ा और मानवीय संवेदनाओं को अपनी सशक्त पंक्तियों में स्वर दिया-
“शायद कल हम यहाँ नहीं हों, आज हमें यादों में भर लो…”,
“कब उठेगा सवाल दिल्ली में…”,
“प्रेम के प्यालों से ज़हर पी रहा हूँ मैं,
ग़म की सुई से ज़ख़्म सी रहा हूँ मैं…”
जैसी पंक्तियों ने श्रोताओं को गहराई से आंदोलित किया।
इस अवसर पर  राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमती शशि जैन जी ने नवगठित जालौर इकाई का हार्दिक स्वागत करते हुए साहित्यिक एकता एवं सृजनशीलता के विस्तार की शुभकामनाएँ प्रदान कीं। राजस्थान प्रांतीय प्रभारी डॉ वैदेही गौतम ने नवगठित इकाई के साहित्यकारों से परिचय करवाया।
कार्यक्रम के समापन सत्र में राष्ट्रीय महामंत्री श्री आनंद जैन जी ने सभी कवियों, अध्यक्ष, संचालक एवं सहभागियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए गोष्ठी को स्मरणीय बनाने के लिए सभी का हृदय से धन्यवाद ज्ञापित किया।
यह काव्य गोष्ठी निश्चय ही साहित्यिक सौहार्द, भावनात्मक अभिव्यक्ति और राष्ट्रीय साहित्यिक चेतना का एक उज्ज्वल उदाहरण बनकर स्मृतियों में अंकित हो गई।
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