कॉन्ग्रेसी पत्रकार मृणाल पांडे ने महाभारत की ‘द्रौपदी’ पर गलत तथ्य प्रस्तुत कर उनकी छवि को बिगाड़ा। इसके बाद जब संस्कृत विद्वान ने उनके तथ्यों को सही किया, तो माफी माँगने की बजाए विद्वान को ही ब्लॉक कर दिया। यह वामपंथी इकोसिस्टम का तय पैटर्न है।
कॉन्ग्रेसी नेशनल हेराल्ड की पत्रकार मृणाल पांडे की हिंदू घृणा छिपाए नहीं छिपती, वह बार-बार सामने आ ही जाती है। ताजा मामले में उन्होंने इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश करते हुए महाभारत की ‘द्रौपदी’ की छवि बिगाड़ने की कोशिश की। सोशल मीडिया पर जैसे ही उनकी टिप्पणी वायरल हुई, लोगों ने उनके दावे पर सवाल उठाने शुरू कर दिए और पुराणों व महाभारत के संदर्भों के साथ तथ्य सामने रखे।
लेकिन जैसे ही मृणाल पांडे एक्सपोज होने लगी, तो उन्होंने सवाल पूछने वालों को ही ब्लॉक करना शुरू कर दिया। यह वही वामपंथी सोच है जिसमें पहले एकतरफा नैरेटिव गढ़ा जाता है, फिर जब सच सामने आता है तो असहमति की आवाज दबाने की कोशिश की जाती है।
पहले मृणाल पांडे ने रश्मिका के संदर्भ में ‘द्रौपदी’ पर कसा तंज
दरअसल, साउथ एक्ट्रेस रश्मिका मंदाना और एक्टर विजय देवरकोंडा की शादी की फोटो पर एक यूजर ने लिखा था कि यह जोड़ी ‘महाभारत के द्रौपदी और अर्जुन’ जैसी वाइब्स दे रहा है। इसी पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए मृणाल पांडे ने एक तरफ से महाभारत की सभी स्त्रियों को निशाना बनाते हुए कहा, “उम्मीद है कि दुल्हन की किस्मत द्रौपदी, कुंती, गांधारी, तारा, मंदोदरी, अहिल्या से बहुत अलग होगी।”
मृणाल की बात का जवाब देते हुए ‘एक्स’ यूजर नमिता बाल्यान ने महाभारत की इन सभी स्त्रियों के प्रभावशाली व्यक्तित्व की जानकारी दी। नमिता ने कहा, “द्रौपदी, कुंती, गाँधारी, तारा, मंदोदरी और अहिल्या सभी बेहद शक्तिशाली, साहसी, धैर्यवान और अपने समय की बहुत महत्वपूर्ण महिलाएँ थीं। उनका योगदान सिर्फ उनके विवाह या वैवाहिक जीवन तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी मजबूती और समझदारी का परिचय दिया।”
मृणाल को जवाब देते हुए नमिता कहती हैं, “ऐसी महान महिलाओं को केवल उनकी ‘शादी’ के आधार पर आँकना न सिर्फ अधूरी जानकारी दिखाता है, बल्कि उनकी भूमिका को छोटा करने जैसा है। यह सोच खुद में पिछड़ी हुई है, जबकि पोस्ट करने वाला व्यक्ति खुद को प्रगतिशील बताने की कोशिश कर रहा था।”
अहंकारी मृणाल ने द्रौपदी को गलत रूप में किया पेश
मृणाल पांडे का अहंकार ‘द्रौपदी’ का नाम गलत संदर्भ में पेश करने तक भी शांत नहीं हुआ, तो उन्होंने गलत धारणाएँ बनाकर महाभारत और द्रौपदी की छवि को तोड़-मरोड़कर पेश करना शुरू कर दिया है। मृणाल ने द्रौपदी को ‘चिदग्निकुंड सम भूता’ कहा, यानी उनके अनुसार ‘द्रौपदी’ भीतर की प्रचंड अग्नि से उत्पन्न हुई थीं।
नमिता के कमेंट पर जवाब देते हुए मृणाल लिखती हैं, “इसने उनके कीमती और युवा वर्षों को जरूर प्रभावित किया होगा। इतना बड़ा आघात मन पर गहरी छाप छोड़ गया होगा। उदाहरण के तौर पर द्रौपदी को चिदग्निकुंड सम भूता कहा गया है, यानी वह भीतर की प्रचंड अग्नि से उत्पन्न हुई थीं। इसका मतलब है कि उनके व्यक्तित्व में अंदर की आग, आक्रोश और आत्मसम्मान की तीव्र शक्ति दिखाई देती है।”
मृणाल की गलत धारणाओं का सामने आया सच
मृणाल पांडे की महाभारत और द्रौपदी को लेकर तोड़-मरोड़कर पेश किए गए तथ्यों पर जब हिंदू संस्कृत स्कॉलर नित्यानंद मिश्रा ने सच्चाई सामने रखी तो यह उन्हें रास नहीं आया। उन्होंने विस्तार से बताया कि द्रौपदी के बारे में जो दावा किा गया, वह न तो महाभारत के मूल पाठ में मिलता है और न ही उसके प्रामाणिक संस्करणों में।
मिश्रा ने साफ कहा कि महाभारत के क्रिटिकल एडिशन में कहीं भी द्रौपदी को ‘चिदग्निकुण्डसम्भूता’ नहीं कहा गया है। यह शब्द महाभारत का नहीं है। उन्होंने समझाया कि ‘चिदग्निकुण्डसम्भूता’ शब्द दरअसल ‘देवी ललिता’ के लिए आता है, जिसका उल्लेख ललिता सहस्ननाम में मिलता है और जिसे ब्राह्माण्ड पुराण से जोड़ा जाता है। यानी जिस शब्द को द्रौपदी से जोड़कर पेश किया गया, उसका महाभारत से कोई संबंध ही नहीं है।


उन्होंने विद्वानों के अनुवाद और पारंपरिक व्याख्याओं को हवाला देते हुए कहा कि संस्कृत ग्रंथों के शब्दों का अर्थ संदर्भ और परंपरा के आदार पर समझना चाहिए, मनमाने ढंग से नहीं।
यह सच सामने आने के बाद मृणाल पांडे का हिंदुओं और उनके इतिहास को गलत तरीके से पेश करने वाला नैरेटिव नही ढहता नजर आया। इसके बाद अपनी टिप्पणी को सुधारने, माफी माँगने या पोस्ट डिलीट करने के बजाए उन्होंने नित्यानंद मिश्रा को ही ब्लॉक कर दिया।
कंगना से कफील खान तक: मृणाल पांडे की हिंदू-घृणा की लिस्ट
ये वही मृणाल पांडे हैं, जो एक महिला के चुनावी मैदान में उतरने पर गाली देती हैं। जब कंगना रनौत को बीजेपी ने मंडी लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाया, तो यही पांडे ने ‘मंडी में सही रेट मिलता है?’ जैसा आपत्तिजनक इशारा कर दिया। खुद को नारीवादी बताने वाली पांडे का नारीवाद बीजेपी को निशाना बनाने के सामने गिर गया और उन्होंने महिला को निशाना बनाना चुना, जो बीजेपी का चेहरा है।
दूसरी तरफ जब गोरखपुर के BRD मेडिकल कॉलेज कांड के आरोपित रहे कफील खान जेल से बाहर आए, तो मृणाल पांडे की खुशी छिपाए नहीं छिपी। उन्होंने खान की तुलना भगवान श्रीकृष्ण से कर डाली। जिस मामले में मासूम बच्चों की मौत हुई, उसमें आरोपी रहे व्यक्ति को भगवान से जोड़ना लोगों को बेहद आपत्तिजनक लगा। तब भी पांडे नहीं हिचकिचाई।
उनकी हिंदू-घृणा यहीं खत्म नहीं होती। कोलकाता पोर्ट का नाम श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नाम पर रखे जाने के बाद भी पांडे ने जहर उगला था। पांडे ने श्यामा प्रसाद मुखर्जी का नाम ‘बंदर‘ से जोड़ा। इतना ही नहीं एक बार महाकाल के दर्शन करने वाले सिख नेता का मजाक उड़ाते हुए पांडे ने कहा कि स्वर्ण मंदिर कब जाओगे?
झूठ फैलाओ, सवाल उठे तो ब्लॉक करो: वामपंथियों का तय पैटर्न
मृणाल पांडे का ताजा मामला केवल एक बयान का विवाद नहीं है, बल्कि उस सोच की झलक है जो लंबे समय से वामपंथी इकोसिस्टम में देखने को मिलती रही है। पहले आधी अधूरी जानकारी के आधार पर नैरेटिव बनाया जाता है, हिंदू धर्म और परंपराओं पर सवाल खड़े किए जाते हैं और उसे प्रगतिशील बहस का नाम दिया जाता है। लेकिन जैसे ही कोई तथ्य और ग्रंथों के संदर्भ के साथ जवाब देता है, वही लोग असहज हो जाते हैं। बहस करने का दावा करने वाले अचानक संवाद से पीछे हटते नजर आते हैं।
इस पूरे घटनाक्रम में भी यही देखने को मिला। जब तक उनकी बात पर सवाल नहीं उठे, तब तक सोशल मीडिया पर बयान जारी रहे। लेकिन जैसे ही संस्कृत विद्वानों और आम लोगों ने प्रमाणों के साथ गलतियाँ बताई, जवाब देने के बजाए ब्लॉक करने का रास्ता चुना गया। यह वामपंथी विमर्श का पुराना तरीका है। पहले आरोप लगाओ, फिर विरोध होने पर खुद को पीड़ित दिखाओ और आखिर में असहमति की आवाज ही बंद कर दो।
यही वजह है कि इसे प्रतिशोध की राजनीति कहा जाता है। जब तर्क खत्म हो जाते हैं तो बहस भी खत्म कर दी जाती है और सामने को ही गायब कर दिया जाता है। गलत सूचना फैलाने के लिए कोई माफी नहीं, कोई पछतावा नहीं। मृणाल पांडे का मामला भी उसी पैटर्न की एक और मिसाल बन गया, जहाँ सवालों का जवाब देने के बजाए सवाल पूछने वालों को ब्लॉक कर दिया गया। यह दिखाता है कि झूठ फैलाने वाले वामपंथी, असलियत सामने आते ही कितनी आसानी से पीछे हट जाते हैं।

