Homeदुनिया मेरे आगेआगाज़ तो अच्छा है,अधिकारियों को सीख, अपना धर भी देखें

आगाज़ तो अच्छा है,अधिकारियों को सीख, अपना धर भी देखें

कोटा के नवनियुक्त कलेक्टर  पीयूष समारिया   कल कुछ अधिकारियों के साथ शहर के निचले इलाकों में सीवरेज व सफाई व्यवस्था देखने जा पहुंचे। नागरिकों से जानकारी की कचरा लेने टीपर कब आता है ? सड़क सुरक्षा बैठक को केवल तकमील पूर्ति के लिए नहीं वरन जनसमस्याओं पर फोकस कर जनहित को सर्वोपरि रख निर्णय लिए गए। स्कूल के बच्चों की सुरक्षा के लिए जिन वाहनों का वे उपयोग करते हैं का डाटा बेस बनाने के निर्देश दिए और टोल प्लाजा पर सुविधाओं की चर्चा की।
पद संभालते ही कलेक्टर की सक्रियता से उनकी जनहित वाली छवि सामने आई है। नागरिकों को कुछ अच्छा होने की उम्मीद जागी है। कार्य शैली का आगाज़ तो आशा की उम्मीद लेकर आई है। अधिकारियों को भी स्पष्ट संकेत है अब ऑफिस में बैठने से काम नहीं चलने वाला। कमरों से बाहर निकल कर जनता के बीच जाएं और उनकी समस्याएं देखे, पूछे, सुने और त्वरित समाधान देवें।
पद संभालते ही उनकी कार्य शैली चर्चा में आ गई है।
  प्रतीत होता है जहां वे एक और वे नागरिकों को अच्छे प्रशासन का अहसास कराएंगे वहीं सरकारी कार्यालयों को भी जनता के प्रति जिम्मेदार बनाएंगे। देखने में आता है कार्यालय का समय प्रातः 9. 30 बजे से है , शायद की कहीं अधिकारी और कर्मचारी समय पर आते हैं। और तो और कमोबेश कलेक्टरी कार्यालयों तक की यही स्थिति है। कार्यालय निरीक्षण, उपस्थिति की औचक जांच भूले भटके ही कभी होती हो। लगता है इस और भी उनका फोकस रहेगा।
     कलेक्टर साहब को अपना घर भी देखना होगा। कलेक्ट्री परिसर जो कभी कलेक्टर टी. रविकांत के समय चमचमाता था उनके बाद भीड़ केंद्र और अव्यवस्थाओं का गढ़ बन गया है। सारा परिसर बेतरतीब खड़े चौपहिया और दुपहिया वाहनों का घर बन गया है। कार्यालय परिसरों में धूम्रपान करना निषेध  है , इसका खुला उल्लंघन देखा जा सकता है। न कोई नियम है न व्यवस्था, अव्यवस्थाओं का बोल बाला है ।
      पार्किंग स्थल बने हैं पर वहां वाहन खड़े नहीं हो कर कलेक्टरी के सामने और आसपास की पूरी सड़क घेर लेते हैं। यहां की दैनिक यातायात  पुलिस व्यवस्था कहीं दिखाई नहीं देती। कोई जुलूस , धरना या वीआईपी विजिट हो तो ही यातायात पुलिस कलेक्टरी चौराहे पर सक्रिय होती है। कल की बैठक में इस पर विस्तार से चर्चा की जाती तो अच्छा होता। जनहित के साथ कलेक्टर साहब अपने अस्तव्यस्त घर को भी संभालें तो यहां आने वाले को भी राहत मिलेगी।
डॉ. प्रभात कुमार सिंघल
अधिस्वीकृत स्वतंत्र पत्रकार, कोटा
चित्र : कलेक्टर पीयूष समारिया, कोटा
spot_img
RELATED ARTICLES
- Advertisment -spot_img

लोकप्रिय

उपभोक्ता मंच

- Advertisment -

वार त्यौहार