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पीयूष पाण्डेयः देश के सुरों को मिलाने वाला सुर अनंत में खो गया

विज्ञापन जगत की जानी मानी हस्ती पीयूष पांडेय अब हमारे बीच नहीं रहे। वह 70 साल के थे।   पीयूष पांडे एक महीने से कोमा में थे और गंभीर संक्रमण (इंफेक्शन) से जूझ रहे थे. पीयूष पांडे ने ‘हमारा बजाज’, ‘फेविकॉल का जोड़’, ‘कैडबरी का कुछ खास है’, ‘दो बूंद जिंदगी की’ पोलियो अभियान और ‘अबकी बार मोदी सरकार’ जैसे आइकॉनिक विज्ञापनों से भारतीय विज्ञापन को नई पहचान दी.    उनकी आवाज, सोच और भारतीय अंदाज ने आधुनिक भारतीय विज्ञापन की दिशा तय की। पीयूष पांडेय, ओगिलवी के वर्ल्डवाइड चीफ क्रिएटिव ऑफिसर और इंडिया के एग्जिक्यूटिव चेयरमैन थे। ग्लोबल ऐडवर्टाइजिंग इंडस्ट्री में वह जाना-माना नाम थे। उन्हें एलआईए लेजेंड अवॉर्ड (2024) और पद्म श्री (2016) सहित कई सम्मान मिल चुके थे।

पीयूष पांडेय को भारतीय विज्ञापन जगत में एक अलग और खास आवाज देने के लिए जाना जाता था। उन्होंने इंडस्ट्री को पश्चिमी अंदाज से दूर कर देश की भाषा, संस्कृति और भावना से जोड़ने का काम किया।

5 अगस्त 1988 का दिन था. पूरा देश आजादी की वर्षगांठ हर्षोल्लास के साथ मना रहा था. ये वो दौर था जब मनोरंजन के साधन सीमित थे. दूरदर्शन ही वो जरिया था जहां से मनोरंजन की डोज हमें मिलती थी. उस पर आने वाली फिल्में, समाचार, गीत और यहां तक कि विज्ञापन भी कुछ खास मायने रखते थे. इस दिन प्रधानमंत्री का संबोधन खत्म होने के बाद दूरदर्शन पर राष्ट्रीय एकता के एक गीत ने दस्तक दी. इसके बोल, इसमें नजर आने वाली हस्तियां और पूरा माहौल बेमिसाल था. संगीत, खेल और सिनेमा जगत समेत कई क्षेत्रों की नामचीन हस्तियों को इस अंदाज में देखना नया अनुभव था. यह गीत कुछ इस तरह से जेहन में उतरा कि देश की धड़कन बन गया. इसके शब्द हर किसी की जुबां पर चढ़ गए. इस गीत के मायने इतने गहरे थे कि आज भी प्रासंगिक हैं. हम बात कर रहे हैं विविधता में एकता की मिसाल समेटे ‘मिले सुर मेरा तुम्हारा’ गीत की. इस मशहूर गीत को लिखा था पीयूष पांडे ने और इसका म्यूजिक कंपोज किया था पंडित भीमसेन जोशी और अशोक पटकी ने.

ये गीत आज भी लोगों के मन में भारतीयता के तार झनझना देता है…
‘मिले सुर मेरा तुम्हारा’ के बोल…
मिले सुर मेरा तुम्हारा तो सुर बने हमारा
सुर की नदियाँ हर दिशा से बहते सागर में मिलें
बादलों का रूप ले कर बरसे हल्के हल्के
मिले सुर मेरा तुम्हारा तो सुर बने हमारा
मिले सुर मेरा तुम्हारा …
मिले सुर मेरा तुम्हारा …

इस गीत  को 14 भारतीय भाषाओं हिंदी, असमी, तमिल, तेलुगू, कश्मीरी, पंजाबी, सिन्धी, उर्दू, कन्नड़, मलयालम, बांग्ला, ओडिया, गुजराती और मराठी में गाया था. इसमें अमिताभ बच्चन, जितेंद्र, मिथुन चक्रवर्ती, हेमा मालिनी, तनूजा समेत कई सिनेमा जगत की कई हस्तियां इस गीत में नजर आईं. उनके अलावा खिलाड़ियों में सुनील गावस्कर, पीटी उषा, कपिल देव, प्रकाश पादुकोण और मिल्खा सिंह जैसे कई दिग्गज दिखे. पहली बार राष्ट्रीय एकता के संदेश को इस खूबसूरती के साथ पिरोया गया था.

राजस्थान के जयपुर में जन्मे पीयूष पांडे बचपन से ही रचनात्मक सोच के लिए जाने जाते थे. उनके घर का माहौल कलात्मक था उनके भाई प्रसून पांडे फिल्म निर्देशक बने और दोनों ने मिलकर रेडियो जिंगल्स में अपनी आवाज दी. ओगिल्वी इंडिया से 1982 में जुड़ने से पहले, पीयूष क्रिकेट खेलते थे लेकिन असली पहचान उन्हें विज्ञापन की दुनिया में मिली, जहां उन्होंने हर विज्ञापन में भारतीयता और भावनाओं को जगह दी. पीयूष पांडे का जन्म 1955 में जयपुर में हुआ था और उनके परिवार में नौ बच्चे थे – सात बेटियाँ और दो बेटे। उनके भाई-बहनों में फिल्म निर्देशक प्रसून पांडे और गायिका-अभिनेत्री इला अरुण शामिल हैं । उनके पिता राजस्थान राज्य सहकारी बैंक में काम करते थे।  उन्होंने राजस्थान राज्य के लिए रणजी ट्रॉफी खेली। उन्होंने चाय चखने का काम भी किया।  पीयुष पांडे ने जयपुर के सेंट जेवियर्स स्कूल से पढ़ाई की और दिल्ली के सेंट स्टीफंस कॉलेज से इतिहास में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की । उनका विवाह नीता पांडे से हुआ था।
पीयूष पांडे कुल 9 भाई-बहन थे, 7 बहनें और 2 भाई।

जब उन्होंने करियर की शुरुआत की, तब विज्ञापन जगत में अंग्रेज़ी और पश्चिमी स्टाइल का बोलबाला था. लेकिन पीयूष पांडे ने इस ढर्रे को तोड़ दिया. उन्होंने ऐसे विज्ञापन बनाए जो आम भारतीय की ज़ुबान में बात करते थे. उनके यादगार प्रोजेक्ट्स में शामिल हैं एशियन पेंट्स का हर खुशी में रंग लाए, कैडबरी का कुछ ख़ास है, फेविकोल का मजेदार एग एड, और हच का प्यारा व्हेयरएवर यू गो, आवर नेटवर्क फॉलोज वाला पग विज्ञापन. ये सिर्फ विज्ञापन नहीं, लोगों की भावनाओं और यादों का हिस्सा बन गए.

विज्ञापन के क्षेत्र में उनका सफर वर्ष 1982 में शुरू हुआ, जब उन्होंने ओगिलवी में क्लाइंट सर्विसिंग एग्जिक्यूटिव के रूप में काम शुरू किया। उनके शुरुआती प्रोजेक्ट्स में से एक था डिटर्जेंट ब्रैंड सनलाइट। छह साल में ही वह क्रिएटिव डिपार्टमेंट में आ गए, जहां उनकी कहानी कहने की कला ने सभी को मंत्रमुग्ध किया। इसके बाद उन्होंने लुमो, फेविकोल, कैडबरी और एशियन पेंट्स जैसे ब्रैंड्स के लिए यादगार कैंपेन बनाए।

पीयूष पांडेय के विज्ञापन हमेशा सादगी, भावना और भारतीय संस्कृति का मिश्रण दिखाते थे।

उनके प्रसिद्ध कामों में शामिल हैं-
फेविक्विक और फेविकोल: ‘तोड़ो नहीं, जोड़ो’, फेविकोल सोफा, और ‘बस फंस गया फेविकोल में’ वाला विज्ञापन

पॉंड्स–’गूगली वूगली वूश!!’

कैडबरी डेयरी मिल्क–’कुछ खास है’

वोडाफोन–जूजू

एशियन पेंट्स–’हर घर कुछ कहता है’

बजाज–’हमारा बजाज’

एयरटेल–’हर एक फ्रेंड जरूरी होता है’

राजनीतिक विज्ञापन, जैसे बीजेपी का 2014 का अभियान ‘अबकी बार मोदी सरकार’

अमिताभ बच्चन के साथ पोलियो अभियान ।

पीयूष पांडे को केवल एक विज्ञापन विशेषज्ञ के रूप में ही नहीं बल्कि ऐसी शख्सियत के रूप में याद किया जाएगा, जिन्होंने भारतीय विज्ञापन को उसकी अपनी भाषा और आत्मा दी. भाजपा को ‘अबकी बार मोदी सरकार’ का नारा उन्होंने ही दिया था. इतना ही नहीं, मिले सुर मेरा तुम्हारा से भी वह जुड़े थे.भारतीय विज्ञापन जगत में उन्हें महान कहा जाता है. उन्हें पद्मश्री से नवाजा जा चुका था.

पीयूष पांडे का जन्म 1955 में जयपुर में हुआ था. उनके परिवार में नौ बच्चे थे, जिनमें सात बहनें और दो भाई शामिल थे. उनके भाई प्रसून पांडे फिल्म निर्देशक हैं, जबकि बहन ईला अरुण गायिका और अभिनेत्री थीं. उनके पिता राजस्थान राज्य सहकारी बैंक में कार्यरत थे. उन्होंने दिल्ली के सेंट स्टीफंस कॉलेज से इतिहास में स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल की और 1982 में विज्ञापन जगत में कदम रखा और ओगिल्वी इंडिया में क्लाइंट सर्विसिंग एक्जीक्यूटिव के रूप में शामिल हुए.

उनका पहला प्रिंट विज्ञापन सनलाइट डिटर्जेंट के लिए लिखा गया. छह साल बाद वे क्रिएटिव विभाग में आए और लूना मोपेड, फेविकोल, कैडबरी और एशियन पेंट्स जैसे ब्रांड्स के लिए कई प्रसिद्ध विज्ञापन बनाए। इसके बाद उन्हें क्रिएटिव डायरेक्टर और फिर राष्ट्रीय क्रिएटिव डायरेक्टर बनाया गया. 1994 में उन्हें ओगिल्वी इंडिया के निदेशक मंडल में भी स्थान मिला. उनके नेतृत्व में ओगिल्वी इंडिया ने लगातार 12 वर्षों तक भारत की नंबर 1 एजेंसी का दर्जा हासिल किया.

पीयूष पांडे द्वारा बनाए गए विज्ञापन आज भी लोगों की यादों में बसे हुए हैं. उन्होंने एशियन पेंट्स के लिए ‘हर खुशी में रंग लाए,’ कैडबरी के लिए ‘कुछ खास है,’ फेविकोल के लिए आइकॉनिक ‘एग’ विज्ञापन और हच के पग वाले विज्ञापन जैसी रचनाएं तैयार कीं. इसके अलावा, उन्होंने 2014 में भारतीय जनता पार्टी के लिए चुनावी नारा ‘अबकी बार, मोदी सरकार’ दिया. उनका योगदान केवल व्यावसायिक विज्ञापन तक सीमित नहीं था. उन्होंने राष्ट्रीय एकता गीत ‘मिले सुर मेरा तुम्हारा’ लिखा और कई सामाजिक अभियान जैसे पोलियो जागरूकता और धूम्रपान विरोधी अभियानों में भी सक्रिय भूमिका निभाई.

पीयूष पांडे को उनके योगदान के लिए कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया. उन्हें 2016 में पद्म श्री से नवाजा गया और 2024 में एलआईए लीजेंड अवार्ड दिया गया. इसके अलावा, उन्हें क्लियो लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड, मीडिया एशिया अवार्ड्स और कान्स लायंस में कई प्रतिष्ठित पुरस्कार भी मिल चुके हैं. उनके नेतृत्व में ओगिल्वी इंडिया को वैश्विक स्तर पर सबसे रचनात्मक कार्यालयों में से एक माना गया. उनकी रचनात्मकता, सहजता और भारतीय विज्ञापन को दी गई दिशा उन्हें हमेशा यादगार बनाएगी.

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