सेवा में,
संयुक्त सचिव,
राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय,
भारत सरकार, नई दिल्ली।
संदर्भ- मेरी शिकायत 15 सितंबर 2025 एवं राजभाषा विभाग का 26 सितंबर 2025 का संसदीय कार्य मंत्रालय को लिखा गया पत्र (संलग्न)
विषय: संसद टीवी द्वारा भाषाई भेदभाव और लोक शिकायतों पर कार्यवाही न करने के विरुद्ध लोक शिकायत।
महोदय,
सादर निवेदन है कि भारत के लोकतंत्र के प्रहरी और जन-संवाद के मुख्य माध्यम ‘संसद टीवी’ की आधिकारिक वेबसाइट (https://sansadtv.nic.in) वर्तमान में पूर्णतः राजभाषा विरोधी स्वरूप में संचालित हो रही है और संसदीय कार्य मंत्रालय और संसद टीवी का प्रबंधन लोक शिकायतों व राजभाषा विभाग के पत्रों को कूड़ेदान में फेंक रहे हैं और कार्यवाही तो दूर उत्तर भी नहीं दे रहे हैं जो अत्यंत निंदनीय है। इस विषय में मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
1. संवैधानिक एवं विधिक प्रावधानों का उल्लंघन
संसद टीवी की वेबसाइट पर संपूर्ण सामग्री केवल अंग्रेज़ी भाषा में उपलब्ध होना राजभाषा अधिनियम, 1963 की धारा 3(3) का प्रत्यक्ष उल्लंघन है। यह अधिनियम स्पष्ट करता है कि केंद्र सरकार के स्वामित्व या नियंत्रण वाले निगमों, निकायों और कार्यालयों द्वारा जारी किए जाने वाले प्रेस नोट, विज्ञप्तियाँ, आधिकारिक कागजात और संविदाएँ अनिवार्य रूप से द्विभाषी (हिन्दी और अंग्रेज़ी) होनी चाहिए।
2. राजभाषा नियम, 1976 की अवहेलना
राजभाषा नियम, 1976 के नियम 11 के अनुसार, सभी सरकारी मैनुअल, संहिताएँ और अन्य प्रक्रिया संबंधी सामग्री हिन्दी और अंग्रेज़ी दोनों भाषाओं में होनी चाहिए। वेबसाइट पर उपलब्ध सूचनाएँ, कार्यक्रम विवरण और आधिकारिक सूचनाएँ इस नियम की परिधि में आती हैं, जिनका वर्तमान स्वरूप केवल एकभाषी (अंग्रेज़ी) है।
3. डिजिटल इंडिया एवं सूचना के अधिकार का हनन
संसद टीवी, जो लोकसभा और राज्यसभा टीवी के विलय के पश्चात भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था का प्रतिबिंब है, उसका मुख्य उद्देश्य जनता को संसदीय कार्यवाहियों से जोड़ना है। भारत की एक विशाल जनसंख्या हिन्दी भाषी है, जो तकनीकी और भाषाई बाधाओं के कारण संसद टीवी की वेबसाइट पर उपलब्ध सूचनाओं से वंचित रह जाती है। यह डिजिटल इंडिया के समावेशी दृष्टिकोण और भाषाई समानता के सिद्धांतों के विपरीत है।
4. तकनीकी विसंगति
अत्यधिक खेद का विषय है कि जहाँ निजी समाचार माध्यम अपनी वेबसाइटों को बहुभाषी बना रहे हैं, वहीं भारत सरकार का आधिकारिक संसदीय चैनल होने के बावजूद यह और इसका प्रबंधन राजभाषा का विकल्प देने को तैयार नहीं है। यह राष्ट्रपति के आदेशों व राजभाषा विभाग द्वारा समय-समय पर जारी किए गए कार्यालय ज्ञापनों व वार्षिक कार्यक्रमों और निर्देशों की घोर उपेक्षा को दर्शाता है।
अतः आपसे विनम्र आग्रह है कि:
- द्विभाषी स्वरूप: संसद टीवी की वेबसाइट को तत्काल प्रभाव से पूर्णतः द्विभाषी (हिन्दी और अंग्रेज़ी) बनाया जाए।
- सामग्री: वेबसाइट पर उपलब्ध सभी पूर्ववर्ती और वर्तमान वीडियो विवरण, लेख और आधिकारिक दस्तावेजों को हिन्दी में उपलब्ध कराया जाए।
- उत्तरदायित्व का निर्धारण: राजभाषा नियमों की इस प्रकार की जा रही अनदेखी हेतु संबंधित अधिकारियों का उत्तरदायित्व निर्धारित किया जाए।
- अनुपालन रिपोर्ट: इस सुधार हेतु की गई कार्यवाही से अवगत कराने की कृपा करें ताकि नागरिकों का राजभाषा के प्रति विश्वास सुदृढ़ हो सके।
राष्ट्र की लोकतांत्रिक संस्थाओं में राजभाषा ‘हिन्दी’ का गौरव बनाए रखना हमारा संवैधानिक उत्तरदायित्व है। आशा है कि आप इस संवेदनशील विषय पर त्वरित संज्ञान लेंगे।
सधन्यवाद।
भवदीय,
अभिषेक कुमार
ग्राम सुल्तानगंज, तहसील बेगमगंज,
जिला-रायसेन, मध्यप्रदेश-464570
ई-मेल: digitalhindi1008@gmail.
प्रतिलिपि :
- माननीय केंद्रीय गृह मंत्री, भारत सरकार
- सचिव, संसदीय राजभाषा समिति

