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इस्लाम को समझने के लिए उपयोगी पुस्तकें

इस्लाम के दीपक
आज से 140 साल पहले सत्यार्थ प्रकाश में कुरआन की निष्पक्ष समीक्षा की गई थी। यह पहला प्रयास था जिससे हिंदुओं को इस्लाम के विषय मे पता चला।
इसी तरह आज से 50 साल पहले वैदिक विद्वान गंगा प्रसाद उपाध्याय जी ने अपनी पुस्तक इस्लाम के दीपक में कुरआन और हदीसों के द्वारा कोमल भाषा में इस्लाम की आधारशिला को दिखाया। लेखक अपने क्षेत्र के विशेषज्ञ थे। सरल भाषा मे लिखी पुस्तक आपको इस विषय का मर्मज्ञ बनाने के लिए अत्यधिक प्रभावी हैं।

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कुरान में युद्ध की अवधारणा
पाकिस्तानी फौज में राष्ट्रपति जिया उल हक़ के कार्यकाल में उनके एक ब्रिगेडियर एस के मलिक ने एक किताब लिखी थी
” दि क़ुरानिक कांसेप्ट ऑफ़ वॉर ”

अर्थात कुरान में युद्ध की अवधारणा

इस किताब की प्रस्तावना खुद ज़िआ उल हक़ ने लिखी थी।
.इसकी भूमिका भारत में पाकिस्तान के राजदूत रह चुके “अल्लाह बक्श ब्रोही ने लिखी थी। इसकी भूमिका में ब्रोही लिखते हैं

” इस्लामी शब्दकोष में जिहाद सर्वाधिक गौरवशाली शब्द है , जिसका अंग्रेजी में अनुवाद संभव नहीं , लेकिन जिसका प्रयोग उद्यमशील, संघर्षशील और अल्लाह के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने में प्रयासरत रहने के अर्थ में अधिकता से किया जाता है।
इसके आगे अपनी लम्बी चौड़ी प्रस्तावना में ब्रोही लिखता है कि पश्चिमी चिंतक अक्सर क़ुरान की आयतों पर उंगली उठाते हैं कि इनकी वजह से इस्लाम के अनुयायी गैर इस्लामियों के साथ हमेशा संघर्षरत रहते है। उनके लिए यह जवाब काफी है कि —खुदा के गुलाम द्वारा खुदा के हुक्म को न मानना उसे इस्लामिक क़ानून की दृष्टि में गुनहगार मानती है और उसका इलाज वैसे ही किया जाना चाहिए जैसे कैंसर युक्त अंग को शरीर से काट कर अलग कर दिया जाता है।

“जिहाद लगातार चलने_वाली लड़ाई है जिसे काफिरों के खिलाफ लड़ा जाता है। ब्रिग मलिक ने लिखा है, ” जिहाद कुफ्र के विरुद्ध राजनितिक, आर्थिक , सामाजिक, मानसिक, नैतिक, आध्यात्मिक, गृह और अंतरराष्ट्रीय मोर्चों पर लड़ी जाने वाली सदा चलते रहने वाली लड़ाई है। सशस्त्र युद्ध तो उसके अनेक तरीकों में से एक है। जिहाद हर मुसलमान का निजी और सामूहिक फ़र्ज़ है।
मलिक आगे लिखते हैं “जिहाद में हमारा लक्ष्य दुश्मन का दिल और दिमाग होता है। दुश्मन के दिलों में पैदा किया हुआ खौफ या आतंक हमारा साधन नहीं बल्कि लक्ष्य होता है। यदि एक बार दुश्मनों के दिलों में खौफ पैदा कर दिया फिर कुछ और करने के लिए बाकि नहीं बचता। ”
ब्रिग मलिक आगे लिखता है कि ” उनके दिलों में डर तभी भरा जा सकता है यदि आप उनकी आस्था को ध्वस्त कर दें। अंतिम विश्लेषण का निष्कर्ष यही निकलता है कि काफिरों के दिलों में डर भरने के लिए उसकी आस्था की नींव हिला दी जाये।

1- इस्लाम के दीपक ₹300
2- कुरान में युद्ध की अवधारणा ₹240
दोनों पुस्तकें ₹500 (डाक खर्च सहित)
मंगवाने के लिए 9485599275 पर वट्सएप द्वारा सम्पर्क करें।

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