जन्म वर्ष: 1954 (दिल्ली) निधन- 13 फरवरी 2025 दिल्ली
दूरदर्शन एंकर सरला माहेश्वरी का 71 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। मधुर आवाज, सटीक उच्चारण और गरिमामय प्रस्तुति से उन्होंने दूरदर्शन पर अपनी खास पहचान बनाई थी।
वे अपनी शांत और सौम्य आवाज़, सटीक हिंदी उच्चारण, और गरिमापूर्ण प्रस्तुति के लिये दर्शकों के बीच बहुत लोकप्रिय थीं। सरला माहेश्वरी ने अपना करियर 1976 में दूरदर्शन से न्यूज़ अनाउंसर के रूप में शुरू किया, जब वे दिल्ली यूनिवर्सिटी में पीएचडी कर रही थीं। बाद में वे न्यूज रीडिंग की भूमिका में आईं और दूरदर्शन के बुलेटिन को प्रस्तुत करने लगीं।
उन्होंने दूरदर्शन के लिए 1976 से लगभग 2005 तक समाचार पढ़ा। अपने करियर के दौरान उन्होंने ब्लैक-एंड-व्हाइट से लेकर कलर टीवी तक के परिवर्तन को देखा और भारतीय टीवी समाचार के बदलते दौर को करीब से अनुभव किया। कुछ समय के लिए वे यूके में BBC के साथ भी न्यूज़रीडर के रूप में काम कर चुकी थी, जहाँ वे 1986 तक रहीं और फिर 1988 में भारत लौटकर दूरदर्शन से जुड़ीं।
सरला माहेश्वरी को उनकी शांत, सौम्य आवाज़, संयमित प्रस्तुति, और कठोर परिशुद्ध हिंदी उच्चारण के लिये याद किया जाता है। उस दौर में जब दूरदर्शन ही मुख्य सूचना स्रोत था, उनके समाचार पढ़ने का अंदाज़ लाखों दर्शकों के लिए विश्वास और भरोसे का प्रतीक बन गया। साथी पत्रकारों ने उन्हें शालीनता और गरिमा का पर्याय बताया है, और उनके काम को भारतीय टीवी पत्रकारिता की “गोल्डन एरा” का हिस्सा माना गया है।

उन्होंने बीए, एमए और PhD (हिंदी) – दिल्ली यूनिवर्सिटी से किया। उनके पति पवन माहेश्वरी (गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट) हैं। उनके दो बेटे — कविश माहेश्वरी (प्लास्टिक सर्जन) और हिमांशु माहेश्वरी
उनकी तीन बहनें हैं।
शुरुआत: 1976 में दूरदर्शन में ऑडिशन देकर उन्होंने पहले अन्नाउंसर/स्क्रिप्ट-राइटर के रूप में काम किया। 1982 में वे न्यूज़रीडर (News Reader) बनीं और जल्दी ही अपनी
शांत प्रस्तुति और सटीक हिंदी के लिए प्रसिद्ध हुईं।उन्होंने पहली बार भारत में Asiad (एशियाई खेलों) के कलर टेलीकास्ट को एंकर किया — यह टीवी पर रंगीन प्रसारण की नई शुरुआत का एक ऐतिहासिक पल था।
1984 में शादी के बाद उन्होंने बीबीसी (BBC) इंग्लैंड में भी न्यूज़ रीडर के रूप में काम किया। फिर 1986 में भारत लौटीं और दोबारा दूरदर्शन से जुड़ीं।
कुछ यादगार क्षण / उपलब्धियाँ
मई 1991 में भारत के प्रधानमंत्री राजीव गांधी की मृत्यु का समाचार उन्होंने भरे मन से गमनीम चेहरे के साथ दूरदर्शन पर देश को पहली बार पढ़कर सुनाया — जो उस समय का एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक प्रसारण था।
पंजाब में दशक 1980–90 के मिलिटेंसी दौर में खबर पढ़ने के कारण उन्हें धमकियाँ भी मिलीं — तब भी उन्होंने निर्भीकता से अपने कर्तव्य का निर्वाह किया। 1997 में मदर टेरेसा के अंतिम संस्कार के कवरेज के बाद उन्होंने परिवार को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया और करीबी रिपोर्टिंग से दूरी बनाई।

उनके कई प्रसिद्ध सहकर्मी थे जैसे सलमा सुल्तान, मीना तलवार, शीला चमन और शम्मी नारंग, जो उस समय के दूरदर्शन न्यूज के अन्य प्रतिष्ठित चेहरों में से थे।
दूरदर्शन ने उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी और उनके योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने दर्शकों के दिलों में गहरा भरोसा और सम्मान प्राप्त किया।
सरला माहेश्वरी न केवल एक न्यूज एंकर थीं, बल्कि उन वर्षों के युग की भारतीय टेलीविजन समाचार की पहचान थीं — जब संदेशों को गर्व, शांत स्वभाव और सटीक भाषा के साथ प्रस्तुत करना बेहद महत्वपूर्ण माना जाता था।
लोग आज भी याद करते हैं कि जब वे शाम के समाचार देखते थे, तो सरला माहेश्वरी की सौम्य, शांत आवाज़ और स्पष्ट हिंदी ने उनके दिन को पूरा किया — इतनी विश्वसनीय आवाज़ कि दर्शक हर रोज़ आने वाले समाचार को उनका चेहरा और बोली से जोड़ लेते थे।
साक्षात्कारों में उन्होंने खुद याद किया कि उस जमाने में कोई टेलीप्रॉम्प्टर नहीं होता था और उन्हें समाचार को याद करके प्रस्तुत करना पड़ता था, जिससे दिन-प्रतिदिन का प्रसारण और भी चुनौतीपूर्ण और यादगार बन जाता था।
दर्शकों की व्यक्तिगत यादें
प्रसिद्ध वकील संजय हेगड़े जैसे लोग याद करते हैं:
“The passing of a gentle era of Doordarshan News. I remember my sister and me, looking forward to her reading of the Hindi news.”
(दूरदर्शन न्यूज़ के उस शांत समय के जाने का दुख; मैं और मेरी बहन उनके हिंदी समाचार पढ़ने का इंतज़ार करते थे)।
दूरदर्शन ने लिखा:
“Her simplicity, restraint and personality instilled a deep trust in her viewers.”
(उनकी सादगी, संयम और व्यक्तित्व ने दर्शकों में गहरा भरोसा पैदा किया)।
दूरदर्शन ने एक्स पर पोस्ट में लिखा- दूरदर्शन परिवार की ओर से हम श्रीमती सरला माहेश्वरी को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। वह एक सम्मानित और पूजनीय दूरदर्शन समाचार वाचक थीं, जिन्होंने अपनी मधुर आवाज, सटीक उच्चारण और गरिमामय प्रस्तुति से भारतीय समाचार जगत में एक विशेष स्थान बनाया। उनकी सादगी, संयम और व्यक्तित्व ने दर्शकों में गहरा विश्वास जगाया।
दिग्गज समाचार एंकर और माहेश्वरी के पूर्व सहकर्मी, शम्मी नारंग ने भी अपनी पूर्व सह-एंकर के निधन पर शोक व्यक्त किया। नारंग ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा- वह शालीनता और शिष्टाचार की साक्षात मूर्ति थीं। न सिर्फ दिखने में सुंदर, बल्कि हृदय से भी कहीं अधिक उदार, भाषा पर उनकी अद्भुत पकड़ थी और वे ज्ञान का भंडार थीं। दूरदर्शन स्क्रीन पर उनकी उपस्थिति का एक अनूठा आकर्षण था। उन्होंने सभी का सम्मान किया और जिस भी क्षेत्र में वे रहीं, उसे बेहतर बनाया। मैं प्रार्थना करता हूं कि ईश्वर उनकी आत्मा को शाश्वत शांति प्रदान करें और महेश्वरी परिवार को शक्ति दें।
अखिल भारतीय महिला कांग्रेस ने सरला माहेश्वरी के निधन को टेलीविजन पत्रकारिता के स्वर्ण युग का अंत बताया। उनकी विश्वसनीयता और शालीनता आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा प्रेरणा बनी रहेगी।

