Homeपत्रिकाकला-संस्कृतिचित्रनगरी संवाद मंच में जी उठी कहानी और कविताएं

चित्रनगरी संवाद मंच में जी उठी कहानी और कविताएं

मुंबई के चित्र नगरी संवाद मंच में हर रविवार की तरह इस बार भी लेखकों और कवियों के साथ  सुधी पाठकों की उपस्थिति से ताजा हवा का झोंका आया।  सोनाली बोस का कहानी पाठ उम्मीद से भी ज़्यादा अच्छा रहा। सोनाली ने अभी तक सिर्फ़ तीन ही कहानियां लिखी हैं, मगर उनकी कहानी ऐसी असरदार थी कि श्रोताओं ने उन्हें डूब कर सुना। रविवार, 15 मार्च 2026 को चित्रनगरी संवाद मंच मुम्बई द्वारा केशव गोरे स्मारक ट्रस्ट गोरेगांव में आयोजित कार्यक्रम में मधुबाला शुक्ल ने उनका परिचय देते हुए बताया कि सोनाली बोस दिल्ली में उद्घोषक और पत्रकार हैं।

सोनाली के पढ़ने का अंदाज़ किसी मंजे हुए कलाकार की तरह आकर्षक था। कहानी का शीर्षक था ‘काफ़ी हाउस की कॉर्नर सीट’। ज़ाहिर है कि कहानी की पृष्ठभूमि मोहब्बत थी। इस विषय ने सभी को अपने साथ जोड़ लिया। ज़िंदगी के चंद अनमोल लम्हों को जिस कशिश के साथ सोनाली ने पेश किया उसकी सभी ने तारीफ़ की।
जाने-माने कथाकार सूरज प्रकाश ने मुक्त कंठ से कहानी की प्रशंसा करते हुए कहा कि ख़ूबसूरत विषय वस्तु के साथ उसे अभिव्यक्त करने के लिए सोनाली के पास भरपूर शब्द संपदा भी है। कहानी सफलता के साथ अपने गंतव्य तक पहुंच जाती है। संचालक देवमणि पांडेय के अनुसार अपनी बुनावट और कथ्य में दमदार होने के साथ ही अभिव्यक्ति का आकर्षक अंदाज़ कहानी को दिलकश और यादगार बना देता है। कुल मिलाकर चित्रनगरी संवाद मंच में अपनी इस पहली प्रस्तुति से सोनाली ने दर्शकों के दिलों पर अपनी गहरी छाप छोड़ी।
#कवयित्री_सम्मेलन
दूसरे सत्र में आयोजित कवयित्री सम्मेलन में देश, समाज और समय के सवालों से जुड़ी विविधरंगी कविताओं की प्रस्तुति सराहनीय रही। काव्य पाठ करने वाली कवयित्रियों के नाम हैं- वर्षा गर्ग, मधु चौधरी, रचना शंकर, उषा साहू, मधु अरोड़ा, अंबिका झा, कुसुम तिवारी किरण मिश्रा, शोभा स्वप्निल, अर्चना वर्मा सिंह और मंजू शर्मा। गायिका नाज़नीन के मधुर गायन से कार्यक्रम का समापन हुआ। पहले उन्होंने देवमणि पांडेय और हेमंत शर्मा की ग़ज़लें दिलकश तरन्नुम में सुनाईं। फिर उन्होंने दो सिने गीत सुनाए- “मैं तो तुम संग नैन मिलाकर हार गई सजना” और “वो दिल कहां से लाऊं तेरी याद जो भुला दे”। ये सुंदर गीत सुनकर श्रोता समुदाय मंत्रमुग्ध हो गया।
छह वर्ष पहले गोरेगांव पूर्व की साहित्यिक फिज़ा में एक छोटा-सा बीज बोया गया था। विशाल अट्टालिकाओं से घिरे इस इलाके में कुछ साहित्यप्रेमी मित्र पहली बार इडलिश कैफे की मेज़ पर जमा हुए। चाय की भाप और बातचीत की गर्माहट के बीच यह विचार जन्मा कि क्यों न यहाँ एक ऐसा अनौपचारिक मंच बनाया जाए, जहाँ दोस्ताना महफ़िलें सजें—
कोई अपनी सुनाए, कोई मित्रों की सुने, और शब्दों के बहाने दिलों का संवाद चलता रहे।
यहीं से शुरू हुई चित्र नगरी संवाद मंच की यात्रा।
धीरे-धीरे इस छोटे से विचार ने एक खूबसूरत सिलसिले का रूप ले लिया। समय के साथ देश के जाने-माने साहित्यकार, कवि, कथाकार और कलाकार इस मंच से जुड़ते चले गए। आज स्थिति यह है कि सिर्फ़ मुंबई ही नहीं, बल्कि देश भर के साहित्यकार इस मंच से जुड़ना और इसका सहयात्री बनना गर्व की बात मानते हैं।
इस मंच की लोकप्रियता का सबसे बड़ा कारण शायद इसकी सहजता और लोकतांत्रिक आत्मा है। यहाँ कोई औपचारिक संचालक मंडल नहीं, कोई पदाधिकारियों की लंबी सूची नहीं। यहाँ आने वाला हर रचनाकार, हर कलावंत इस मंच का बराबरी का सहभागी है—जैसे किसी बड़े परिवार की खुली बैठक, जहाँ हर आवाज़ का सम्मान है।
उस पहली अनौपचारिक बैठक में मौजूद थे —कथाकार सूरज प्रकाश, शायर देवमणि पांडेय, अभिनेता राजीव जोशी, लेखक प्रदीप गुप्ता, अभिनेता शैलेंद्र गौड़, कवि राजू मिश्र ‘कबिरा’ और व्यंग्यकार के.पी. सक्सेना ‘दूसरे’।
पहली ही बैठक में चर्चा का दायरा व्यापक था। मराठी साहित्य में किताबों की संस्कृति पर दिलचस्प बातचीत हुई। प्रदीप गुप्ता ने विदेशों में पुस्तकों को उपहार के रूप में देने की सुंदर परंपरा के बारे में बताया। इसी दौरान कथाकार सूरज प्रकाश की बाल कविता “गुल्लक” का पाठ अभिनेता शैलेंद्र गौड़ ने इतने रोचक अंदाज़ में किया कि महफ़िल देर तक मुस्कुराती रही। देवमणि पांडेय, कबिरा और के.पी. सक्सेना ‘दूसरे’ ने भी अपने काव्य पाठ से उस शाम को यादगार बना दिया।
समय बीतता गया, ज़िंदगी की व्यस्तताएँ बढ़ती गईं—किसी के पास लंबी यात्राएँ, किसी के सामने स्वास्थ्य की चुनौतियाँ—लेकिन इस मंच से जुड़े संस्थापक साहित्यकार आज भी उसी आत्मीयता से जुड़े हुए हैं। यही इस मंच की असली ताक़त है।यही नहीं इडलिश कैफ़े से मृणाल गोरे हाल तक की यात्रा भी काफ़ी रोमांचक रही है ।
छह वर्षों की यह यात्रा सिर्फ़ एक मंच की कहानी नहीं, बल्कि उन रिश्तों की कहानी है जो शब्दों, कविता और संवाद से बने हैं।
चित्र नगरी संवाद मंच को उसके छठे जन्मदिन पर ढेरों शुभकामनाएँ—
कि ये महफ़िल यूँ ही सजती रहे, शब्दों की रोशनी यूँ ही फैलती रहे।
चित्रनगरी संवाद मंच में अगले रविवार 22 मार्च को “मेरे लिखने की मेज” पुस्तक पर चर्चा का आयोजन किया गया है। इस पुस्तक के संपादक कथाकार सूरज प्रकाश अपने रोचक और रोमांचक अनुभव साझा करेंगे। इस पुस्तक में शामिल मुम्बई के रचनाकारों को भी अपनी बात कहने के लिए इस कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया है।
spot_img
RELATED ARTICLES
- Advertisment -spot_img

लोकप्रिय

उपभोक्ता मंच

- Advertisment -

वार त्यौहार