Homeहिन्दी जगतकथाकार एवं समीक्षक विजय जोशी सम्मानित

कथाकार एवं समीक्षक विजय जोशी सम्मानित

कोटा / विजय जोशी को राजस्थान साहित्य अकादमी उदयपुर एवं सारंग साहित्य समिति कोटा के संयुक्त तत्वावधान में  कोटा में 16 नवम्बर  को आयोजित संभागीय रचनाकार सम्मेलन में प्रतिवर्ष दिए जाने वाले सम्मान में कथाकार एवं समीक्षक विजय जोशी को उनके साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियों एवं साहित्यिक अवदान के लिए “सारंग साहित्य सम्मान – 2024 ” से प्रशस्ति – पत्र और प्रतीक चिह्न भेंट कर शाल एवं साफा पहनाकर सम्मानित किया।
समारोह में साहित्यकार रामदयाल मेहरा एवं रघुराज सिंह कर्मयोगी को सारंग साहित्य सम्मान तथा रमेश नकौड़ा, गौरस प्रचंड एवं महावीर मेहरा को सारंग शिखर सम्मान प्रदान किया गया।
समारोह में राजस्थान साहित्य अकादमी उदयपुर के सचिव बसंत सिंह सोलंकी के सान्निध्य में इस सत्र के मुख्य अतिथि नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. सुरेश पांडे विशिष्ट अतिथि साहित्यकार प्रद्युम्न वर्मा रहे तथा अध्यक्षता महाकवि किशन वर्मा ने की। संचालन कवि राम विलास रखवाला ने किया।
 इनको एवं कवि हेमराज सिंह हेम को  इसी दिन  राष्ट्रीय प्रेस दिवस के अवसर पर मीडिया हाउस राजस्थान, मीडिया क्लब कोटा, सद्भावना संदेश न्यूज़, वंदे भारत लाइव न्यूज़ चैनल, मयूर टाइम्स न्यूज़ के संयुक्त तत्वावधान में रविवार 16 नवम्बर को संत कंवर राम धर्मशाला में राष्ट्रीय प्रेस दिवस पर प्रतिभा सम्मान समारोह में सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर कथाकार एवं समीक्षक विजय जोशी ने अपने उद्बोधन में कहा कि लेखक – पत्रकार और प्रेस का समाज में  सामाजिक सरोकारों के हित हेतु एक त्रिआयामी सामंजस्य होता है। ये अपने संवेदनात्मक विचारों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से समाज के समक्ष रख कर एक दिशा प्रदान करते हैं। फिर चाहे वह मुद्रित मीडिया हो चाहे इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ये सभी समयानुरूप परिवर्तित होते जा रहे सामाजिक मूल्यों एवं  उनके प्रभावों का गहनता से अनुशीलन कर व्यक्ति में एक सकारात्मक समझ उत्पन्न कर बदलते समय में सामंजस्य स्थापित करने का महती योगदान प्रदान करते हैं।
उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय एवं राज्य स्तर पर विभिन्न संस्थाओं द्वारा पुरस्कृत एवं सम्मानित कथाकार एवं समीक्षक  विजय जोशी के अब तक दो हिन्दी उपन्यास – चीख़ते चौबारे, रिसते हुए रिश्ते, छह हिन्दी कहानी संग्रह – ख़ामोश गलियारे, केनवास के परे, कुहासे का सफ़र, बिंधे हुए रिश्ते, सुलगता मौन, वैकुण्ठगामी एवं अन्य कहानियाँ तथा एक हिन्दी बाल कहानी संग्रह – बदल गया मिंकू प्रकाशित हो चुके हैं। विजय जोशी के कथा साहित्य का मूल्यांकन करते हुए विद्वान् साहित्यकारों के सम्पादन में तीन समीक्षा ग्रन्थ और कथा साहित्य तथा समीक्षा साहित्य पर केन्द्रित एक विनिबन्ध प्रकाशित हुए हैं। यही नहीं देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों द्वारा छह शोधार्थियों को पीएच.डी. तथा एम. फिल. की उपाधि प्रदान की गई है।
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