नई राष्ट्रीय सहकारिता नीति: सहकार से समृद्धि की ओर ऐतिहासिक कदम
नई राष्ट्रीय सहकारिता नीति तैयार करने हेतु श्री सुरेश प्रभाकर प्रभु की अध्यक्षता में एक 48 सदस्यीय राष्ट्रीय स्तरीय समिति का गठन किया गया था, जिसमें सहकारी क्षेत्र के विशेषज्ञ, राष्ट्रीय/राज्य/ज़िला/प्राथमिक स्तर की सहकारी समितियों के प्रतिनिधि, राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के सचिव (सहकारिता) और क्षेत्रीय सहकारी समितियाँ (RCS), केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों के अधिकारी शामिल थे।
इस संबंध में, राष्ट्रीय स्तरीय समिति ने सुझाव/सिफारिशें प्राप्त करने हेतु देश भर में 17 बैठकें और 4 क्षेत्रीय कार्यशालाएँ आयोजित की गईं।
राष्ट्रीय सहकारिता नीति के माध्यम से पर्यटन, टैक्सी सेवा, बीमा और हरित ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में भी सहकारी समितियां स्थापित की जाएंगी।
नीति के प्रमुख लक्ष्य
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2034 तक सकल घरेलू उत्पाद में सहकारी क्षेत्र के योगदान को तीन गुना करना
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50 करोड़ सक्रिय सदस्यों को इसके दायरे में लाना
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युवाओं को रोजगार के अवसरों से जोड़ना
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सहकारी समितियों की संख्या में 30% की वृद्धि
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प्रत्येक गांव में कम से कम एक सहकारी समिति की स्थापना
नीति का विमोचन
केंद्रीय गृह मंत्री एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने नई दिल्ली में श्री सुरेश प्रभु द्वारा सरकार को सौंपी गई “राष्ट्रीय सहकारिता नीति – 2025” का अनावरण किया।
इस अवसर पर केंद्रीय सहकारिता राज्य मंत्री श्री कृष्ण पाल गुर्जर, श्री मुरलीधर मोहोल, सहकारिता सचिव डॉ. आशीष कुमार भूटानी, पूर्व केंद्रीय मंत्री श्री सुरेश प्रभु सहित कई अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
समारोह में केंद्रीय मंत्री श्री अमित शाह का संबोधन
श्री अमित शाह ने कहा कि श्री सुरेश प्रभु के नेतृत्व में 40 सदस्यीय समिति ने विभिन्न हितधारकों के साथ संवाद के बाद देश के सहकारिता क्षेत्र के समक्ष एक व्यापक और दूरदर्शी सहकारिता नीति प्रस्तुत की है।
उन्होंने बताया कि समिति को लगभग 750 सुझाव प्राप्त हुए। 17 बैठकें की गईं और आरबीआई तथा नाबार्ड से विमर्श के पश्चात नीति को अंतिम रूप दिया गया।
नई नीति प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘सहकार से समृद्धि’ के विजन को साकार करने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है।
नीति के प्रभाव और सरकार की दृष्टि
श्री शाह ने बताया कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने सहकारिता मंत्रालय की स्थापना करके 75 वर्षों बाद इस क्षेत्र को केंद्र में लाया।
उन्होंने कहा कि 2020 से पहले तक सहकारिता को निष्क्रिय क्षेत्र माना जाता था, लेकिन अब यह कॉर्पोरेट क्षेत्र के समकक्ष खड़ा हुआ है।
83 हस्तक्षेप बिंदुओं में से 58 पर कार्य पूरा हो चुका है। 3 पूर्ण क्रियान्वयन में हैं, और शेष पर काम प्रगति में है। 2 बिंदुओं पर सतत कार्य की आवश्यकता है।
प्रमुख लक्ष्य
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50 करोड़ निष्क्रिय या गैर-सदस्य नागरिकों को सहकारिता में सक्रिय भागीदार बनाना
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8.3 लाख समितियों में 30% वृद्धि करना
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प्रत्येक पंचायत में कम से कम एक प्राथमिक सहकारी इकाई की स्थापना
रोज़गार और पारदर्शिता की दिशा में पहल
नई समितियां युवाओं के लिए रोजगार के अवसर उत्पन्न करेंगी। पारदर्शिता, वित्तीय स्थिरता और संस्थागत विश्वास को बढ़ाने के लिए निगरानी प्रणाली और क्लस्टर मॉडल लागू किया जाएगा।
PACS से जुड़ी प्रगति
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45,000 नई PACS की स्थापना लगभग पूरी
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PACS का कंप्यूटरीकरण पूर्ण
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PACS को 25 नई गतिविधियाँ सौंपी गईं
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4,108 PACS को प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र खोलने की मंज़ूरी
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393 PACS ने पेट्रोल/डीजल दुकानें खोलने हेतु आवेदन
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100+ PACS ने एलपीजी वितरण हेतु आवेदन किया
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“हर घर नल से जल” और “प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना” में भी PACS की भागीदारी
पृष्ठभूमि और समिति का गठन
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2 सितंबर 2022 को केंद्र सरकार ने 48–49 सदस्यीय समिति का गठन किया
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समिति में राज्य सचिव, मंत्रालयों के अधिकारी, विशेषज्ञ, सहकारी संस्थाओं के प्रतिनिधि शामिल थे
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वर्तमान नीति 2002 में लागू हुई थी; बदले हुए सामाजिक-आर्थिक परिवेश के अनुसार संशोधन आवश्यक था
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समिति ने 17 बैठकें और 4 क्षेत्रीय कार्यशालाएं कीं, 500+ सुझाव प्राप्त हुए
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जून 2023 में ड्राफ्ट रिपोर्ट श्री अमित शाह को सौंपी गई
प्रमुख सिफारिशें और नीतिगत उद्देश्य
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संरचनात्मक सुधार व शासन: मजबूत कानूनी एवं संस्थागत ढांचा
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सहकारी संस्थाओं का आधुनिकीकरण: संचालन व प्रबंधन में सुधार
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समान अवसर: सहकारिता और निजी क्षेत्र में निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा
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विशेष सहायता निधि: कमजोर समितियों के लिए पुनर्जीवन कोष
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राष्ट्रीय सहकारी विश्वविद्यालय: सहकारी शिक्षा व चुनाव प्राधिकरण की स्थापना
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निर्यात केंद्र: Co-operative Economic Zones (CEZs) का गठन
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तकनीक व प्रशिक्षण: DCCB बैंक, PACS विस्तार, युवा व महिला भागीदारी पर जोर
नीति का दीर्घकालिक दृष्टिकोण (2025–2050)
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‘सहकार से समृद्धि’ की परिकल्पना को अगले 25 वर्षों में साकार करना
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ग्रामीण और शहरी सहकारी आंदोलन को आत्मनिर्भर, तकनीकी व वित्तीय रूप से सशक्त बनाना
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PACS, DCCBs, डेयरी और मत्स्य सहकारिता को मजबूती देना
वर्तमान स्थिति (जुलाई 2025 तक)
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ड्राफ्ट रिपोर्ट जुलाई 2023 में तैयार थी; परिष्कृत पुनरीक्षण के कारण आगे बढ़ी
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24 जुलाई 2025 को नीति सार्वजनिक की गई
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15.02.2023 को योजना को सरकारी मंज़ूरी प्राप्त हुई
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अगले 5 वर्षों में सभी वंचित पंचायतों/गांवों को बहुउद्देशीय PACS या अन्य प्राथमिक सहकारी समितियों से जोड़ने की योजना
सरकारी योजनाओं से अभिसरण
नई सहकारी समितियों की स्थापना भारत सरकार की प्रमुख योजनाओं जैसे:
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डेयरी अवसंरचना विकास निधि (DIDF)
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राष्ट्रीय डेयरी विकास कार्यक्रम (NPDD)
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प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY)
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मत्स्य पालन एवं जलीय कृषि अवसंरचना निधि (FIDF)
के अभिसरण के माध्यम से की जाएगी।

